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Chapter-14. प्राकृतिक संसाधन Science class 9 in hindi Medium CBSE Notes

CBSE Class 9 Science Notes in Hindi Medium based on latest NCERT syllabus, covering definitions, diagrams, formulas, and exam-oriented explanations.

Chapter-14. प्राकृतिक संसाधन Science class 9 in hindi Medium CBSE Notes
Updated on: 25 March 2026

14. प्राकृतिक संसाधन

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प्रदुषण : भूमि (मृदा) प्रदुषण

प्रदुषण : भूमि (मृदा) प्रदुषण 


मृदा (Soil) : भूमि की उपरी सतह पौधों के लिए आवश्यक पोषक तत्वों से भरपूर होता है | इसमें कार्बनिक पदार्थ एवं वायु प्रचुर मात्रा में उपस्थित होती है | भूमि की यह सतह मृदा (Soil) कहलाती है |

भूमि/मृदा प्रदुषण (Soil Polution) : मृदा के गुणवता को कम करने वाले अवांछित तत्व या विषैले पदार्थों का मृदा में उपस्थिति भूमि/मृदा प्रदुषण कहलाता है | 

भूमि/मृदा प्रदुषण के कारण : 

(i) मृदा में जैव अनिम्नकरणीय पदार्थों की उपस्थिति 

(ii) पोलीथिन और प्लास्टिक 

(iii) पीडकनाशी और रासायनिक उर्वरक 

मृदा अपरदन (Soil errosion): 

मृदा का सबसे ऊपरी  भाग काफी उपजाऊ एवं ह्यूमस से परिपूर्ण होता है | यह हल्का भी होता है, कई बार ये बहते हुए वायु या जल के साथ एक जगह से दुसरे जगह स्थानांतरित हो जाते है | मृदा का इस प्रकार स्थानांतरित होना मृदा अपरदन कहलाता है | 

मृदा अपरदन का कारण : 

(i) वन विनाश 

(ii) तेज वायु 

(iii) जल का तेज बहाव या बाढ़ जो मृदा के उपरी भाग को अपने साथ बहा ले जाता है | 

मृदा अपरदन रोकने के उपाय : 

(i) पौधो की जड़े मृदा को रोकती है और ये मृदा कणो को बाँधे रखती है ।

(ii) विश्व मे बड़े स्तर पर पेड़ो वृक्षो को काटा जा रहा है । इससे मृदा का अपरदन होता है । उपरिमृदा को हटाने पर मृदा का अपरदन होता है । अंतः अधिक से अधिक पेड़ लगाने चाहिए । 

उपरी मृदा (Top Soil): मृदा की सबसे उपरी परत जिसमें मृदा के कणों के अतिरिक्त ह्यूमस और सजीव स्थित होते हैं उसे ऊपरी मृदा कहते हैं | 

ह्यूमस (Humus): मृदा के ऊपरी भाग में सड़े-गले जीवों के टुकड़े भी मिले होते हैं, जिसे ह्यूमस (Humus) कहते हैं | 

मृदा के गुण : 

मृदा के गुण जिसमें किसी पौधा का उगना निर्भर करता है :

(i) मृदा में पोषक तत्व की उपस्थिति |

(ii) उपस्थित ह्यूमस की मात्रा |

(iii) उपस्थित ह्यूमस की गहराई | 

मृदा निर्माण की प्रक्रिया : 

1. सूर्य पत्थरो को दिन मे गर्म कर देता है जिससे वे फैलते है तथा वे रात मे ठंडे होकर सिकुड़ते है । अंतः इन पत्थरो मे दरार पड़ जाती है । बड़े पत्थर टूटकर छोटे हो जाते है ।

2. पत्थरों की दरार मे जल भरने पर दरारें अधिक चौड़ी हो जाती है । बहता जल पत्थरो को तोड़ देता है तथा उन्हे अपने साथ बहा ले जाती है । पत्थर आपस मे टकराकर छोटे कणो मे बदल जाती है जिससे मृदा का निर्माण होता है ।

3. तेज वायु भी पत्थरों को तोड़ देती है । तेज हवा बालू को उड़ा कर ले जाती है ।

4. लाइकेन और मॉस चट्टानों की सतह पर उगती है और उनको कमजोर बनाकर महीन कणों में बदल देते हैं। उनकी जड़ों के पास मृदा का निर्माण होता है | 

मृदा निर्माण में सहायक कारक : 

(i) सूर्य की गर्मी 

(ii) पानी का तेज बहाव 

(iii) तेज वायु 

(iv) लाइकेन और मॉस जैसे जीव 

 

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