Chapter-गति पर बलों का प्रभाव Science Exploration class 9 in hindi Medium CBSE Notes
CBSE Class 9 Science Exploration Notes in Hindi Medium based on latest NCERT syllabus, covering definitions, diagrams, formulas, and exam-oriented explanations.
गति पर बलों का प्रभाव
न्यूटन का द्वितीय एवं तृतीय नियम
अध्याय 6. गति पर बलों का प्रभाव
न्यूटन के प्रथम नियम से यह स्पष्ट होता है कि किसी वस्तु की गति में परिवर्तन के लिए परिणामी बल आवश्यक है। अब हम न्यूटन (Newton) के द्वितीय एवं तृतीय नियमों का अध्ययन करेंगे। ये नियम बल, द्रव्यमान (Mass), त्वरण (Acceleration), संवेग (Momentum) तथा क्रिया-प्रतिक्रिया (Action-Reaction) के बीच संबंध को स्पष्ट करते हैं और दैनिक जीवन की अनेक घटनाओं की वैज्ञानिक व्याख्या करते हैं।
न्यूटन का द्वितीय एवं तृतीय नियम
न्यूटन का गति का द्वितीय नियम (Newton's Second Law of Motion)
न्यूटन का द्वितीय नियम बताता है कि किसी वस्तु पर लगाया गया परिणामी बल उसके संवेग (Momentum) में परिवर्तन की दर के समानुपाती होता है तथा यह परिवर्तन उसी दिशा में होता है जिस दिशा में बल लगाया जाता है। यदि वस्तु का द्रव्यमान नियत हो, तो यह नियम F = ma के रूप में व्यक्त किया जाता है।
- बल, द्रव्यमान तथा त्वरण के बीच संबंध स्थापित करता है।
- अधिक बल लगाने पर अधिक त्वरण उत्पन्न होता है।
- अधिक द्रव्यमान वाली वस्तु को समान त्वरण देने के लिए अधिक बल चाहिए।
- इस नियम का गणितीय रूप F = ma है।
संवेग (Momentum)
संवेग (Momentum) किसी वस्तु के द्रव्यमान एवं वेग का गुणनफल होता है। किसी वस्तु का द्रव्यमान या वेग जितना अधिक होगा, उसका संवेग भी उतना अधिक होगा।
| राशि | सूत्र |
|---|---|
| संवेग (Momentum) | p = mv |
| बल (Force) | F = ma |
न्यूटन का गति का तृतीय नियम (Newton's Third Law of Motion)
न्यूटन का तृतीय नियम कहता है कि प्रत्येक क्रिया (Action) के बराबर परिमाण की तथा विपरीत दिशा में एक प्रतिक्रिया (Reaction) होती है। क्रिया एवं प्रतिक्रिया बल सदैव अलग-अलग वस्तुओं पर कार्य करते हैं और एक साथ उत्पन्न होते हैं।
- प्रत्येक क्रिया के साथ प्रतिक्रिया अवश्य होती है।
- क्रिया एवं प्रतिक्रिया का परिमाण समान होता है।
- दोनों बलों की दिशा विपरीत होती है।
- दोनों बल अलग-अलग वस्तुओं पर कार्य करते हैं।
द्वितीय एवं तृतीय नियम में अंतर
| न्यूटन का द्वितीय नियम | न्यूटन का तृतीय नियम |
|---|---|
| बल, द्रव्यमान एवं त्वरण का संबंध बताता है। | क्रिया एवं प्रतिक्रिया बल का संबंध बताता है। |
| F = ma पर आधारित है। | प्रत्येक क्रिया की बराबर एवं विपरीत प्रतिक्रिया होती है। |
| एक वस्तु की गति में परिवर्तन समझाता है। | दो वस्तुओं के बीच पारस्परिक बलों को समझाता है। |
दैनिक जीवन में उपयोग
- वाहनों के इंजन एवं ब्रेक प्रणाली में।
- रॉकेट के प्रक्षेपण (Rocket Launch) में।
- बंदूक चलाने पर पीछे की ओर झटका लगना।
- नाव चलाते समय चप्पू से पानी को पीछे धकेलना।
- चलने एवं दौड़ने की प्रक्रिया में।
Our Concept Builder
जब कोई व्यक्ति नाव में बैठकर चप्पू से पानी को पीछे की ओर धकेलता है, तो पानी भी नाव पर उतने ही परिमाण का बल विपरीत दिशा में लगाता है। परिणामस्वरूप नाव आगे बढ़ती है। यह न्यूटन के तृतीय नियम का सबसे सरल और प्रसिद्ध उदाहरण है। इसी प्रकार किसी भारी वस्तु को तेजी से गति देने के लिए अधिक बल की आवश्यकता होती है, जो न्यूटन के द्वितीय नियम को स्पष्ट करता है।
Exam Booster
- न्यूटन का द्वितीय नियम F = ma द्वारा व्यक्त किया जाता है।
- संवेग = द्रव्यमान × वेग (p = mv)
- अधिक द्रव्यमान वाली वस्तु को समान त्वरण देने के लिए अधिक बल चाहिए।
- क्रिया एवं प्रतिक्रिया बल समान परिमाण तथा विपरीत दिशा में होते हैं।
- रॉकेट, बंदूक, नाव तथा चलना न्यूटन के तृतीय नियम के महत्वपूर्ण उदाहरण हैं।
- द्वितीय एवं तृतीय नियम के अंतर तथा उनके दैनिक जीवन के उदाहरण CBSE परीक्षा में अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
इस पाठ के अन्य दुसरे विषय भी देखे :
1. Chapter Review and Key Points
2. बल की अवधारणा एवं बल का मापन
3. संतुलित, असंतुलित एवं परिणामी बल
5. घर्षण का अध्ययन एवं जड़त्व की भूमिका
6. न्यूटन का गति का प्रथम नियम
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