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Chapter-वस्तु विनिमय से मुद्रा तक Social Science Part-1 class 7 in hindi Medium CBSE Notes

CBSE Class 7 Social Science Part-1 Notes in Hindi Medium based on latest NCERT syllabus, covering definitions, diagrams, formulas, and exam-oriented explanations.

Chapter-वस्तु विनिमय से मुद्रा तक Social Science Part-1 class 7 in hindi Medium CBSE Notes
Updated on: 25 May 2026

वस्तु विनिमय से मुद्रा तक

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Quick Revising Notes

Quick Revision Notes — वस्तु विनिमय से मुद्रा तक

• वस्तु विनिमय प्रणाली में वस्तुओं और सेवाओं का आदान-प्रदान बिना मुद्रा के किया जाता था।

• बार्टर सिस्टम वस्तु विनिमय प्रणाली का दूसरा नाम है।

• प्राचीन समय में लोग कौड़ी, नमक, पशु, बीज और कपड़ों का विनिमय करते थे।

• वस्तु विनिमय प्रणाली लेन-देन का सबसे प्रारंभिक रूप थी।

• मुद्रा वस्तुओं और सेवाओं के बदले भुगतान का स्वीकृत माध्यम है।

• विनिमय के लिए दोनों पक्षों की सहमति आवश्यक होती थी।

• आवश्यकताओं का द्विसंयोग वस्तु विनिमय प्रणाली की प्रमुख समस्या थी।

• द्विसंयोग का अर्थ है कि दोनों व्यक्तियों को एक-दूसरे की वस्तु चाहिए हो।

• मूल्य का सामान्य मानक वस्तु विनिमय प्रणाली में उपलब्ध नहीं था।

• विभाज्यता की समस्या के कारण बड़ी वस्तुओं का छोटा भाग नहीं किया जा सकता था।

• बैल को छोटे भागों में बाँटकर विनिमय नहीं किया जा सकता था।

• सुवाह्यता का अर्थ वस्तु को आसानी से एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाना है।

• अनाज और पशु को ले जाना कठिन होता था।

• टिकाऊपन की कमी के कारण वस्तुएँ जल्दी खराब हो जाती थीं।

• गेहूँ लंबे समय तक सुरक्षित नहीं रखा जा सकता था।

• मुद्रा ने वस्तु विनिमय प्रणाली की समस्याओं को कम किया।

• मुद्रा व्यापार को सरल और सुविधाजनक बनाती है।

• मुद्रा मूल्य के संग्रहण का कार्य करती है।

• मुद्रा भविष्य में भुगतान के साधन के रूप में भी प्रयोग की जाती है।

• मुद्रा वस्तुओं और सेवाओं के मूल्य को मापने का कार्य करती है।

• सिक्के मुद्रा के सबसे प्राचीन रूपों में से एक हैं।

• प्राचीन सिक्के सोना, चाँदी, ताँबा और मिश्रधातु से बनाए जाते थे।

• कार्षापण या पण प्राचीन भारतीय सिक्कों के नाम थे।

• सिक्कों पर राजा, देवी-देवताओं और पशुओं की आकृतियाँ बनाई जाती थीं।

• सिक्के ढालना शासकों के नियंत्रण में होता था।

• शक्तिशाली शासकों के सिक्के अन्य राज्यों में भी स्वीकार किए जाते थे।

• सिक्कों ने व्यापार को बढ़ाने में सहायता की।

• रोमन सिक्के दक्षिण भारत में मिले हैं।

• रोमन सिक्कों से समुद्री व्यापार के प्रमाण मिलते हैं।

• वर्तमान सिक्कों पर हिंदी और अंग्रेज़ी दोनों भाषाओं का प्रयोग होता है।

• ₹ चिह्न वर्ष 2010 में स्वीकार किया गया था।

• उदय कुमार ने भारतीय रुपये का प्रतीक डिज़ाइन किया था।

• कागजी मुद्रा बड़े लेन-देन के लिए उपयोगी सिद्ध हुई।

• कागजी मुद्रा का प्रयोग सबसे पहले चीन में हुआ था।

• भारत में 18वीं शताब्दी के अंत में कागजी मुद्रा का प्रयोग शुरू हुआ।

• भारतीय रिज़र्व बैंक मुद्रा जारी करने वाली केंद्रीय संस्था है।

• आर.बी.आई. के अलावा कोई अन्य संस्था मुद्रा जारी नहीं कर सकती।

• डिजिटल मुद्रा आधुनिक तकनीक का नया रूप है।

• डिजिटल भुगतान मोबाइल और इंटरनेट के माध्यम से किया जाता है।

• डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड और नेट बैंकिंग डिजिटल भुगतान के साधन हैं।

• यू.पी.आई. आधुनिक डिजिटल लेन-देन प्रणाली है।

• क्यू.आर. कोड स्कैन करके डिजिटल भुगतान किया जाता है।

• डिजिटल मुद्रा तेज, सरल और सुरक्षित लेन-देन में सहायक है।

• समय के साथ मुद्रा के रूपों में निरंतर परिवर्तन होता रहा है।

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