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Chapter-9. शासक से शासित तक : सरकार के प्रकार Social Science Part-1 class 7 in hindi Medium CBSE Notes

CBSE Class 7 Social Science Part-1 Notes in Hindi Medium based on latest NCERT syllabus, covering definitions, diagrams, formulas, and exam-oriented explanations.

Chapter-9. शासक से शासित तक : सरकार के प्रकार Social Science Part-1 class 7 in hindi Medium CBSE Notes
Updated on: 24 May 2026

9. शासक से शासित तक : सरकार के प्रकार

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Details Notes

शासक से शासित तक — सरकार के प्रकार

परिचय

समाज को व्यवस्थित ढंग से चलाने के लिए सरकार की आवश्यकता होती है। सरकार कानून व्यवस्था बनाए रखती है, लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करती है और नागरिकों के कल्याण के लिए कार्य करती है। विभिन्न देशों में अलग-अलग प्रकार की सरकारें पाई जाती हैं।

इस अध्याय में सरकार के प्रकार, लोकतंत्र, राजतंत्र और अन्य शासन व्यवस्थाओं के बारे में अध्ययन किया गया है। :contentReference[oaicite:0]{index=0}

सरकार क्या है?

सरकार वह व्यवस्था है जो किसी देश या राज्य का संचालन करती है। सरकार नागरिकों के हितों की रक्षा करती है और समाज में शांति तथा स्थिरता बनाए रखती है।

सरकार के प्रमुख कार्य

  • कानून व्यवस्था बनाए रखना
  • राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करना
  • अन्य देशों से संबंध स्थापित करना
  • शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करना
  • आर्थिक गतिविधियों का संचालन करना
  • जनकल्याण के लिए कार्य करना

सरकार समाज में आवश्यक वस्तुओं और सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करती है। :contentReference[oaicite:1]{index=1}

लोकतंत्र क्या है?

लोकतंत्र का अर्थ है — जनता का शासन। इसमें शक्ति और सत्ता का वास्तविक स्रोत जनता होती है।

लोकतंत्र में लोग अपने प्रतिनिधियों का चुनाव करते हैं और वे प्रतिनिधि सरकार चलाते हैं।

लोकतंत्र की विशेषताएँ

  • जनता सर्वोच्च होती है
  • प्रतिनिधियों का चुनाव होता है
  • सरकार जनता के प्रति उत्तरदायी होती है
  • नियम और कानून संविधान के अनुसार बनाए जाते हैं

अब्राहम लिंकन ने लोकतंत्र को “जनता का, जनता द्वारा और जनता के लिए शासन” कहा था। :contentReference[oaicite:2]{index=2}

विद्यालय का उदाहरण और लोकतंत्र

अध्याय में विद्यालय की विद्यार्थी समिति का उदाहरण देकर लोकतंत्र को समझाया गया है।

विद्यालय में विभिन्न कार्यों के संचालन के लिए समिति बनाने की आवश्यकता पड़ती है। इस समिति के सदस्यों का चुनाव लोकतांत्रिक तरीके से किया जा सकता है।

समिति गठन के तीन तरीके

  • सभी विद्यार्थी समिति का भाग बनें
  • प्रधानाध्यापिका स्वयं चयन करें
  • विद्यार्थी मतदान द्वारा प्रतिनिधि चुनें

तीसरा तरीका लोकतांत्रिक प्रक्रिया का उदाहरण है क्योंकि इसमें प्रतिनिधियों का चुनाव जनता द्वारा किया जाता है। :contentReference[oaicite:3]{index=3}

प्रतिनिधि

प्रतिनिधि वह व्यक्ति होता है जिसे किसी समूह की ओर से कार्य करने और निर्णय लेने का अधिकार दिया जाता है।

लोकतंत्र में नागरिक अपने प्रतिनिधियों का चुनाव करते हैं।

सरकार के प्रमुख कार्य

सरकार के कार्यों को मुख्यतः तीन भागों में बाँटा जाता है —

1. विधायी कार्य

कानून बनाना विधायिका का कार्य है।

2. कार्यपालिका संबंधी कार्य

कानून लागू करना और प्रशासन चलाना कार्यपालिका का कार्य है।

3. न्यायिक कार्य

कानूनों की व्याख्या करना और विवादों का समाधान करना न्यायपालिका का कार्य है।

ये तीनों कार्य लोकतांत्रिक शासन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। :contentReference[oaicite:4]{index=4}

सरकारों के बीच अंतर

विभिन्न देशों की सरकारें कई आधारों पर एक-दूसरे से भिन्न होती हैं।

मुख्य अंतर

  • सरकार को शक्ति कौन देता है
  • सरकार का गठन कैसे होता है
  • सरकार के विभिन्न अंग कौन-कौन से हैं
  • सरकार का उद्देश्य क्या है

लोकतांत्रिक देशों में शक्ति जनता से प्राप्त होती है, जबकि अन्य व्यवस्थाओं में शक्ति राजा, धर्म या किसी विशेष समूह से प्राप्त हो सकती है। :contentReference[oaicite:5]{index=5}

लोकतंत्र के मूल सिद्धांत

1. समानता

लोकतंत्र में सभी नागरिक कानून के समक्ष समान होते हैं। सभी को समान अवसर प्राप्त होने चाहिए।

2. स्वतंत्रता

नागरिकों को विचार व्यक्त करने और अपने निर्णय लेने की स्वतंत्रता होती है।

3. प्रतिनिधि सहभागिता

नागरिक चुनाव के माध्यम से अपने प्रतिनिधि चुनते हैं।

4. सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार

निर्धारित आयु से ऊपर प्रत्येक नागरिक को मतदान का अधिकार प्राप्त होता है।

भारत में 1950 से सभी वयस्क नागरिकों को मतदान का अधिकार प्राप्त है। :contentReference[oaicite:6]{index=6}

मौलिक अधिकार

लोकतंत्र में नागरिकों को कुछ मौलिक अधिकार दिए जाते हैं।

प्रमुख अधिकार

  • मतदान का अधिकार
  • अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता
  • शोषण के विरुद्ध अधिकार
  • समानता का अधिकार

इन अधिकारों की रक्षा स्वतंत्र न्यायपालिका द्वारा की जाती है। :contentReference[oaicite:7]{index=7}

लोकतांत्रिक सरकारों के प्रकार

1. प्रत्यक्ष लोकतंत्र

प्रत्यक्ष लोकतंत्र में सभी नागरिक सीधे शासन संबंधी निर्णयों में भाग लेते हैं।

स्विट्जरलैंड प्रत्यक्ष लोकतंत्र का प्रमुख उदाहरण है।

प्रत्यक्ष लोकतंत्र की विशेषताएँ

  • जनता सीधे निर्णय लेती है
  • नागरिकों की प्रत्यक्ष भागीदारी होती है
  • छोटे देशों में अधिक प्रभावी होता है

बड़े देशों में इस व्यवस्था को लागू करना कठिन होता है। :contentReference[oaicite:8]{index=8}

2. प्रतिनिधि लोकतंत्र

प्रतिनिधि लोकतंत्र में नागरिक अपने प्रतिनिधियों का चुनाव करते हैं और वे प्रतिनिधि सरकार चलाते हैं।

भारत प्रतिनिधि लोकतंत्र का उदाहरण है।

प्रतिनिधि लोकतंत्र की विशेषताएँ

  • नियमित चुनाव
  • जनता के प्रति उत्तरदायित्व
  • सरकार में परिवर्तन की संभावना
  • प्रतिनिधियों द्वारा शासन संचालन

भारत में प्रत्येक पाँच वर्ष में आम चुनाव आयोजित किए जाते हैं। :contentReference[oaicite:9]{index=9}

संसदीय लोकतंत्र

संसदीय लोकतंत्र में कार्यपालिका विधायिका का हिस्सा होती है।

भारत में प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद संसद के सदस्य होते हैं और संसद के प्रति उत्तरदायी रहते हैं।

विशेषताएँ

  • प्रधानमंत्री सरकार का प्रमुख होता है
  • मंत्रिपरिषद संसद के प्रति उत्तरदायी होती है
  • कार्यपालिका और विधायिका जुड़े होते हैं

भारत संसदीय लोकतंत्र का प्रमुख उदाहरण है। :contentReference[oaicite:10]{index=10}

अध्यक्षीय शासन प्रणाली

इस प्रणाली में कार्यपालिका विधायिका से स्वतंत्र होती है।

राष्ट्राध्यक्ष जनता द्वारा चुना जाता है और उसे पद पर बने रहने के लिए विधायिका के समर्थन की आवश्यकता नहीं होती।

संयुक्त राज्य अमेरिका अध्यक्षीय शासन प्रणाली का उदाहरण है। :contentReference[oaicite:11]{index=11}

सरकार के अंग

1. विधायिका

विधायिका कानून बनाने का कार्य करती है। भारत में इसे संसद कहा जाता है।

2. कार्यपालिका

कार्यपालिका कानून लागू करने और प्रशासन चलाने का कार्य करती है।

3. न्यायपालिका

न्यायपालिका कानूनों की व्याख्या करती है और न्याय प्रदान करती है।

उच्च सदन और निम्न सदन

अधिकांश लोकतांत्रिक देशों में विधायिका के दो सदन होते हैं।

  • लोकसभा — निम्न सदन
  • राज्यसभा — उच्च सदन

लोकसभा के सदस्य सीधे जनता द्वारा चुने जाते हैं। :contentReference[oaicite:12]{index=12}

शक्तियों का पृथक्करण

लोकतंत्र में विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका स्वतंत्र रूप से कार्य करती हैं।

इसे शक्तियों का पृथक्करण कहा जाता है।

प्रारंभिक गणराज्य

प्राचीन भारत में भी गणराज्य व्यवस्था मौजूद थी।

लिच्छवि गणराज्य इसका प्रमुख उदाहरण था जहाँ प्रतिनिधियों द्वारा निर्णय लिए जाते थे।

उत्तरमेरूर शिलालेखों में स्थानीय चुनाव व्यवस्था का वर्णन मिलता है। :contentReference[oaicite:13]{index=13}

राजतंत्र

राजतंत्र वह शासन प्रणाली है जिसमें राजा या रानी शासन करते हैं।

यह सामान्यतः वंशानुगत व्यवस्था होती है।

राजतंत्र की विशेषताएँ

  • राजा सर्वोच्च शासक होता है
  • सत्ता परिवार में हस्तांतरित होती है
  • शासन वंशानुगत होता है

राजधर्म

भारतीय परंपरा में राजाओं से अपेक्षा की जाती थी कि वे राजधर्म के अनुसार शासन करें और जनता के कल्याण को सर्वोपरि रखें।

महाभारत में भीष्म ने युधिष्ठिर को न्यायपूर्ण शासन की शिक्षा दी थी। :contentReference[oaicite:14]{index=14}

वर्तमान राजतंत्र

1. निरंकुश राजतंत्र

इस व्यवस्था में राजा के पास पूर्ण सत्ता होती है।

वह कानून बनाता है, उन्हें लागू करता है और न्यायिक निर्णय भी देता है।

सऊदी अरब निरंकुश राजतंत्र का उदाहरण है।

2. संवैधानिक राजतंत्र

इस व्यवस्था में राजा की शक्तियाँ सीमित होती हैं और वास्तविक शासन निर्वाचित सरकार द्वारा चलाया जाता है।

ब्रिटेन संवैधानिक राजतंत्र का प्रमुख उदाहरण है। :contentReference[oaicite:15]{index=15}

धर्मतंत्र

धर्मतंत्र वह शासन प्रणाली है जिसमें शासन धार्मिक नियमों और धार्मिक नेताओं के निर्देशों के अनुसार चलता है।

ईरान धर्मतंत्र का प्रमुख उदाहरण माना जाता है।

लोकतंत्र का महत्व

लोकतंत्र नागरिकों को समानता, स्वतंत्रता और भागीदारी का अवसर प्रदान करता है।

यह सरकार को जनता के प्रति उत्तरदायी बनाता है और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करता है।

निष्कर्ष

विश्व में अनेक प्रकार की शासन व्यवस्थाएँ पाई जाती हैं, लेकिन लोकतंत्र आधुनिक युग की सबसे लोकप्रिय शासन प्रणाली है। लोकतंत्र जनता को शासन में भागीदारी का अधिकार देता है और समानता, स्वतंत्रता तथा न्याय जैसे मूल्यों की रक्षा करता है। :contentReference[oaicite:16]{index=16}

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