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Chapter-4. नवारंभ:नगर एवं राज्य Social Science Part-1 class 7 in hindi Medium CBSE Notes

CBSE Class 7 Social Science Part-1 Notes in Hindi Medium based on latest NCERT syllabus, covering definitions, diagrams, formulas, and exam-oriented explanations.

Chapter-4. नवारंभ:नगर एवं राज्य Social Science Part-1 class 7 in hindi Medium CBSE Notes
Updated on: 23 May 2026

4. नवारंभ:नगर एवं राज्य

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Quick Revising Notes

Quick Revision Notes — नवारंभ : नगर एवं राज्य

• द्वितीय नगरीकरण भारत में नगरों के पुनः विकास की प्रक्रिया थी।

• हड़प्पा सभ्यता के पतन के बाद लंबे समय तक नगरीय जीवन कमजोर रहा।

• प्रथम सहस्राब्दी ईसा पूर्व में नए नगरों का विकास प्रारंभ हुआ।

• गंगा के मैदान द्वितीय नगरीकरण का प्रमुख केंद्र बने।

• पुरातात्विक उत्खनन से प्राचीन नगरों के प्रमाण मिले हैं।

• बौद्ध और जैन साहित्य में नए नगरों का वर्णन मिलता है।

• जनपद ऐसे क्षेत्र थे जहाँ कोई जन या समुदाय निवास करता था।

• प्रत्येक जनपद का अपना शासक होता था।

• व्यापारिक मार्गों के विकास से जनपद समृद्ध हुए।

• महाजनपद बड़े और शक्तिशाली राज्य थे।

• 16 महाजनपद प्राचीन भारत में प्रसिद्ध थे।

• मगध सबसे शक्तिशाली महाजनपदों में से एक था।

• कोसल, वत्स और अवंति भी महत्वपूर्ण महाजनपद थे।

• महाजनपदों की राजधानियाँ मजबूत किलों से घिरी होती थीं।

• परिखा सुरक्षा के लिए बनाई गई गहरी खाई होती थी।

• सभा और समिति प्रारंभिक शासन संस्थाएँ थीं।

• राजा मंत्रियों और सभा से परामर्श लेकर निर्णय लेता था।

• कुछ महाजनपदों में गणतांत्रिक शासन प्रणाली थी।

• वज्जि और मल्ल प्रारंभिक गणराज्य माने जाते हैं।

• गणराज्य में राजा का चयन सभा द्वारा किया जाता था।

• इस काल में बौद्ध और जैन धर्म का विकास हुआ।

• लौह धातु के प्रयोग से कृषि और युद्ध में प्रगति हुई।

• लोहे के औजारों से खेती का विस्तार हुआ।

• लोहे के हथियार कांस्य की तुलना में अधिक प्रभावशाली थे।

• इस समय भारत में सिक्कों का प्रयोग शुरू हुआ।

• प्रारंभिक सिक्के चाँदी के बने होते थे।

• आहत सिक्के प्रतीकों को अंकित करके बनाए जाते थे।

• व्यापार के विस्तार से मुद्रा का महत्व बढ़ा।

• समाज विभिन्न वर्गों और समूहों में विभाजित होने लगा।

• जाति विशेष व्यवसाय से जुड़ा सामाजिक समूह था।

• कौशल पीढ़ी-दर-पीढ़ी हस्तांतरित होते थे।

• वर्ण व्यवस्था में चार प्रमुख वर्ण थे।

• ब्राह्मण ज्ञान और धार्मिक कार्यों से जुड़े थे।

• क्षत्रिय रक्षा और शासन का कार्य करते थे।

• वैश्यों का कार्य व्यापार और कृषि था।

• शूद्र सेवा और शिल्प कार्यों में लगे रहते थे।

• प्रारंभिक समाज में व्यवसाय बदलना संभव था।

• समय के साथ वर्ण-जाति व्यवस्था कठोर होती गई।

• उत्तरापथ महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्ग था।

• दक्षिणापथ उत्तर भारत को दक्षिण भारत से जोड़ता था।

• शिशुपालगढ़ पूर्वी भारत का प्रमुख नगर था।

• दक्षिण भारत में चोल, चेर और पांड्य राज्यों का उदय हुआ।

• दक्षिण भारत मसालों और बहुमूल्य वस्तुओं के लिए प्रसिद्ध था।

• लगभग 300 ईसा पूर्व तक पूरा उपमहाद्वीप व्यापार से जुड़ चुका था।

• महाजनपदों के बाद नए साम्राज्यों का उदय हुआ।

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