Chapter-Chapter 11. प्रकाश, छाया एवं परावर्तन Science Curiosity class 7 in hindi Medium CBSE Notes
CBSE Class 7 Science Curiosity Notes in Hindi Medium based on latest NCERT syllabus, covering definitions, diagrams, formulas, and exam-oriented explanations.
Chapter 11. प्रकाश, छाया एवं परावर्तन
Important Notes
Chapter 11: प्रकाश, छाया एवं परावर्तन
परिचय: हमारे आसपास की दुनिया को देखने के लिए प्रकाश अत्यंत आवश्यक है। यदि प्रकाश न हो, तो हम किसी भी वस्तु को नहीं देख सकते।
प्रकाश एक प्रकार की ऊर्जा है जो हमें वस्तुओं को देखने में सहायता करती है।
प्रकाश के स्रोत: वे वस्तुएँ जो स्वयं प्रकाश उत्पन्न करती हैं, प्रकाश स्रोत कहलाती हैं।
- प्राकृतिक स्रोत: सूर्य, तारे
- कृत्रिम स्रोत: बल्ब, टॉर्च
महत्वपूर्ण समझ: कुछ वस्तुएँ स्वयं प्रकाश देती हैं, जबकि कुछ केवल प्रकाश को परावर्तित करती हैं।
प्रकाश का सीधी रेखा में चलना: प्रकाश हमेशा सीधी रेखा में चलता है। इसी कारण छाया बनती है।
छाया (Shadow): जब कोई अपारदर्शी वस्तु प्रकाश के मार्ग में आती है, तो उसके पीछे अंधेरा भाग बनता है जिसे छाया कहते हैं।
छाया बनने की शर्तें:
- प्रकाश स्रोत होना चाहिए
- एक अपारदर्शी वस्तु होनी चाहिए
- एक स्क्रीन (जैसे दीवार) होनी चाहिए
छाया की विशेषताएँ:
- छाया का रंग हमेशा काला होता है
- यह वस्तु के आकार पर निर्भर करती है
- छाया का आकार दूरी के अनुसार बदलता है
उदाहरण: जब हम धूप में खड़े होते हैं, तो हमारी छाया जमीन पर बनती है।
महत्वपूर्ण समझ: छाया हमें वस्तु के आकार और स्थिति के बारे में जानकारी देती है, लेकिन उसमें रंग या विवरण नहीं होते।
परावर्तन (Reflection of Light): जब प्रकाश किसी चिकनी सतह से टकराकर वापस लौटता है, तो इसे परावर्तन कहते हैं।
उदाहरण: दर्पण में अपना चेहरा देखना
दर्पण (Mirror): दर्पण एक चिकनी और चमकदार सतह होती है जो प्रकाश का परावर्तन करती है।
समतल दर्पण (Plane Mirror): यह एक साधारण दर्पण होता है जिसमें हमें सीधा प्रतिबिंब दिखाई देता है।
समतल दर्पण के गुण:
- प्रतिबिंब सीधा होता है
- प्रतिबिंब का आकार वस्तु के बराबर होता है
- प्रतिबिंब दर्पण के पीछे समान दूरी पर बनता है
- दाएँ-बाएँ उलट जाते हैं (Lateral Inversion)
प्रतिबिंब (Image): दर्पण में दिखाई देने वाला चित्र प्रतिबिंब कहलाता है।
लेटरल इनवर्ज़न (Lateral Inversion): दर्पण में दाईं ओर की वस्तु बाईं ओर और बाईं ओर की वस्तु दाईं ओर दिखाई देती है।
उदाहरण: दर्पण में “AMBULANCE” शब्द उल्टा दिखाई देता है, इसलिए इसे उल्टा लिखा जाता है ताकि सामने से सही दिखे।
महत्वपूर्ण समझ: परावर्तन के कारण ही हम दर्पण में स्वयं को देख सकते हैं और कई उपकरण काम करते हैं।
पिनहोल कैमरा (Pinhole Camera): यह एक सरल उपकरण है जिसमें एक छोटा छेद होता है। इस छेद से होकर प्रकाश गुजरता है और सामने की वस्तु का चित्र स्क्रीन पर बनता है।
विशेषताएँ:
- चित्र वास्तविक (Real) होता है
- चित्र उल्टा (Inverted) होता है
- किसी दर्पण या लेंस की आवश्यकता नहीं होती
कार्य सिद्धांत: प्रकाश सीधी रेखा में चलता है, इसलिए छेद से गुजरते समय वस्तु का उल्टा चित्र बनता है।
दैनिक जीवन में उपयोग:
- कैमरा और प्रोजेक्टर में
- दर्पण का उपयोग सजने-संवरने में
- वाहनों में रियर व्यू मिरर
प्रकाश का महत्व: प्रकाश के बिना जीवन संभव नहीं है। यह हमें देखने, ऊर्जा प्राप्त करने और जीवन को बनाए रखने में मदद करता है।
समग्र समझ (Overall Understanding): प्रकाश, छाया और परावर्तन के सिद्धांत हमें यह समझने में मदद करते हैं कि हम वस्तुओं को कैसे देखते हैं और विभिन्न उपकरण कैसे कार्य करते हैं।
Final Key Concept: प्रकाश → सीधी रेखा में चलता है छाया → अपारदर्शी वस्तु से बनती है परावर्तन → दर्पण से प्रकाश लौटता है
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