Chapter-कार्य का महत्त्व Social Science class 6 in hindi Medium CBSE Notes
CBSE Class 6 Social Science Notes in Hindi Medium based on latest NCERT syllabus, covering definitions, diagrams, formulas, and exam-oriented explanations.
कार्य का महत्त्व
Chapter Review and Key Points
अध्याय 13. कार्य का महत्त्व
हमारे आसपास के लोग अनेक प्रकार के कार्य और गतिविधियाँ करते हैं। इस अध्याय में आर्थिक तथा गैर-आर्थिक गतिविधियों, उनके महत्व, पारिश्रमिक, मूल्य संवर्धन और सामुदायिक सहभागिता को समझाया गया है।
कार्य और गतिविधियाँ
- मनुष्य अपने दैनिक जीवन में अनेक प्रकार के कार्य करता है।
- कुछ कार्य आय या धन प्राप्त करने के लिए किए जाते हैं।
- कुछ कार्य बिना किसी मौद्रिक लाभ के सेवा, प्रेम, सम्मान या कर्तव्य की भावना से किए जाते हैं।
- इस आधार पर गतिविधियों को मुख्य रूप से आर्थिक गतिविधियाँ और गैर-आर्थिक गतिविधियाँ में बाँटा जाता है।
आर्थिक गतिविधियाँ
आर्थिक गतिविधियाँ वे गतिविधियाँ हैं जिनमें धन या मौद्रिक मूल्य शामिल होता है अथवा जिन्हें अर्थोपार्जन के लिए किया जाता है।
- व्यापारी द्वारा वस्तुओं की बिक्री।
- किसान द्वारा अपनी उपज बेचना।
- वकील द्वारा सेवाओं के बदले शुल्क लेना।
- ट्रक चालक द्वारा सामान एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचाना।
- कारखाने में श्रमिक द्वारा काम करना।
- शिक्षक द्वारा शुल्क लेकर पढ़ाना।
- किसी कर्मचारी द्वारा वेतन प्राप्त करना।
गैर-आर्थिक गतिविधियाँ
गैर-आर्थिक गतिविधियाँ वे गतिविधियाँ हैं जिनसे आय या संपत्ति अर्जित करना मुख्य उद्देश्य नहीं होता। इन्हें प्रेम, सेवा, कृतज्ञता, स्नेह और आदर जैसी भावनाओं से किया जाता है।
- अभिभावकों द्वारा परिवार के लिए भोजन बनाना।
- बच्चों को विद्यालय के कार्य में सहायता करना।
- दादा-दादी या नाना-नानी की सेवा करना।
- परिवार के सदस्यों द्वारा घर के नवीनीकरण में सहायता करना।
- किसी को स्वेच्छा से निःशुल्क पढ़ाना।
- सामुदायिक सेवा में स्वयंसेवा करना।
आर्थिक और गैर-आर्थिक गतिविधियों में अंतर
| आधार | आर्थिक गतिविधियाँ | गैर-आर्थिक गतिविधियाँ |
|---|---|---|
| मुख्य उद्देश्य | आय या मौद्रिक मूल्य प्राप्त करना | सेवा, प्रेम, कर्तव्य, सम्मान आदि |
| धन का संबंध | मौद्रिक मूल्य शामिल होता है | आमतौर पर मौद्रिक भुगतान नहीं होता |
| उदाहरण | व्यापार, नौकरी, मजदूरी | परिवार की सेवा, स्वयंसेवा |
वस्तु का नकद मूल्य
वस्तु का नकद मूल्य किसी वस्तु का वह मौद्रिक मूल्य है जिसे व्यक्ति उस वस्तु से मिलने वाले लाभ के आधार पर निर्धारित करता है।
बाजार
बाजार वह स्थान है जहाँ व्यक्ति वस्तुओं और सेवाओं का लेन-देन करते हैं। वस्तुओं और सेवाओं का आदान-प्रदान अन्य वस्तुओं या सेवाओं के बदले भी हो सकता है, लेकिन अधिकांश बाजारों में इनका लेन-देन धनराशि के लिए किया जाता है।
शुल्क
शुल्क किसी व्यावसायिक परामर्श या सेवा के लिए किसी व्यक्ति या संगठन को किया गया भुगतान है।
उदाहरण: चिकित्सक या वकील को उनकी सेवा के बदले दिया गया भुगतान।
वेतन
वेतन किसी नियोक्ता द्वारा कर्मचारी को नियमित रूप से, सामान्यतः प्रतिमाह, किया जाने वाला निश्चित भुगतान है।
उदाहरण: भारतीय वायुसेना की पायलट गीता मौसी और सॉफ्टवेयर इंजीनियर रोहन को उनके कार्य के बदले वेतन मिलता है।
मजदूरी
मजदूरी किसी विशेष समय अवधि के लिए नियोक्ता द्वारा श्रमिक को किया जाने वाला भुगतान है।
मजदूरी दैनिक, साप्ताहिक या कार्य की निर्धारित अवधि के आधार पर दी जा सकती है।
वस्तु के रूप में भुगतान
वस्तु के रूप में भुगतान वह गैर-मौद्रिक भुगतान है जो किए गए कार्य के बदले वस्तु के रूप में प्राप्त होता है।
अध्याय में साहिल का उदाहरण दिया गया है, जिसे खेत में ट्रैक्टर चलाने के कार्य के बदले कुछ धनराशि तथा शेष भुगतान आमों के रूप में प्राप्त होता है। आम के रूप में प्राप्त भुगतान वस्तु के रूप में भुगतान है।
आर्थिक गतिविधियों के उदाहरण
| व्यक्ति/कार्य | गतिविधि | प्राप्ति |
|---|---|---|
| पायलट | विमान चलाना | वेतन |
| सॉफ्टवेयर इंजीनियर | कंप्यूटर से संबंधित कार्य | वेतन |
| दुकानदार | वस्तुओं की बिक्री | बिक्री से आय |
| किसान | उपज बेचना | मौद्रिक आय |
| वकील | कानूनी सेवा | शुल्क |
| श्रमिक | कारखाने में कार्य | वेतन/मजदूरी |
स्वैच्छिक कार्य
किसी व्यक्ति द्वारा बिना मौद्रिक भुगतान की अपेक्षा के अपनी इच्छा से किया गया कार्य स्वैच्छिक कार्य हो सकता है।
अध्याय में रोहन का उदाहरण दिया गया है। वह सप्ताहांत में युवा विकास कार्यक्रम में विद्यार्थियों को कंप्यूटर संबंधी कौशल स्वेच्छा से सिखाता है। यह उसकी गैर-आर्थिक गतिविधि है।
गैर-आर्थिक गतिविधियों का महत्व
- इन गतिविधियों में धन का प्रत्यक्ष भुगतान नहीं होता।
- फिर भी इनसे उत्पन्न मूल्य हमारे जीवन में महत्वपूर्ण होता है।
- ये परिवार के सदस्यों के बीच सहयोग और स्नेह बढ़ाती हैं।
- ये सामाजिक कल्याण में योगदान देती हैं।
- सेवा और स्वयंसेवा समाज के लिए उपयोगी होती हैं।
- ये व्यक्तिगत और सामाजिक कल्याण में योगदान देती हैं।
मूल्य संवर्धन
मूल्य संवर्धन वह प्रक्रिया है जिसमें किसी वस्तु को दूसरे रूप में बदलने के प्रत्येक चरण पर उसके मूल्य में वृद्धि होती है।
उदाहरण: लकड़ी से कुर्सी बनाने पर लकड़ी का मूल्य बढ़ जाता है क्योंकि उसमें श्रम, कौशल, समय और प्रयास शामिल होते हैं।
राजेश का उदाहरण
- राजेश एक बढ़ई हैं।
- उन्होंने बाजार से ₹600 की लकड़ी खरीदी।
- उन्होंने उस लकड़ी से कुर्सी बनाई।
- कुर्सी को ₹1000 में बेचा।
- लकड़ी की लागत = ₹600।
- कुर्सी का बिक्री मूल्य = ₹1000।
- अंतर = ₹400।
- यह ₹400 राजेश के कौशल, समय और प्रयास के मौद्रिक मूल्य को दर्शाता है।
- लकड़ी से फर्नीचर बनाकर राजेश ने लकड़ी का मूल्य संवर्धन किया।
मूल्य संवर्धन की प्रक्रिया
किसी वस्तु के उत्पादन और बिक्री की प्रक्रिया में अलग-अलग चरण हो सकते हैं। प्रत्येक चरण में श्रम, कौशल, संसाधन या सेवा जुड़ने के कारण वस्तु के मूल्य में वृद्धि हो सकती है।
उदाहरण: लकड़ी → फर्नीचर का निर्माण → तैयार कुर्सी → बाजार में बिक्री
सेवा
सेवा ऐसी गतिविधि है जिसमें किसी व्यक्ति या समुदाय की सहायता की जाती है। सेवा कार्यों में आर्थिक भुगतान आवश्यक नहीं होता।
- मंदिरों में सेवा कार्य।
- गुरुद्वारों में लंगर।
- मस्जिदों और गिरजाघरों में विभिन्न सेवा कार्य।
- समाज के जरूरतमंद लोगों की सहायता।
लंगर
गुरुद्वारों में श्रद्धालुओं को सामुदायिक रसोई के माध्यम से निःशुल्क भोजन कराया जाता है। यह सेवा और सामुदायिक सहभागिता का उदाहरण है।
सामुदायिक सहभागिता
सामुदायिक सहभागिता का अर्थ है किसी समुदाय के लोगों का मिलकर ऐसे कार्यों में भाग लेना जिनसे समुदाय और समाज को लाभ हो।
- लोग मिलकर सार्वजनिक स्थानों की सफाई कर सकते हैं।
- वृक्षारोपण कार्यक्रमों में भाग ले सकते हैं।
- सामुदायिक सेवा कार्य कर सकते हैं।
- त्योहारों और सामुदायिक कार्यक्रमों में मिलकर कार्य कर सकते हैं।
- समाज के कल्याण के लिए सामूहिक प्रयास कर सकते हैं।
स्वच्छ भारत अभियान
स्वच्छ भारत अभियान को अध्याय में सामुदायिक सहभागिता के उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया गया है। इसमें नागरिक अपने घरों के साथ-साथ गलियों, सड़कों, पार्कों और अन्य सार्वजनिक स्थानों को स्वच्छ रखने के लिए सामूहिक प्रयास करते हैं।
वन महोत्सव
वन महोत्सव भारत में वृक्षों के महत्व और वन संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने का एक उदाहरण है। इसमें समुदाय के सदस्य वृक्षारोपण अभियानों में एक साथ भाग लेते हैं।
त्योहार और सामुदायिक सहभागिता
- त्योहारों के अवसर पर लोग मिलकर अनेक गतिविधियाँ करते हैं।
- लोग मिलकर स्थानों की सजावट करते हैं।
- मिलकर विभिन्न व्यंजन तैयार करते हैं।
- ऐसी गतिविधियाँ सामाजिक सहयोग और सामुदायिक भावना को बढ़ाती हैं।
आर्थिक गतिविधियों के प्रमुख पारिश्रमिक
| पारिश्रमिक का प्रकार | अर्थ |
|---|---|
| वेतन | कर्मचारी को नियमित रूप से दिया जाने वाला निश्चित भुगतान। |
| मजदूरी | विशिष्ट समय अवधि के कार्य के लिए श्रमिक को किया गया भुगतान। |
| शुल्क | व्यावसायिक परामर्श या सेवा के बदले किया गया भुगतान। |
| वस्तु के रूप में भुगतान | धन के बजाय किसी वस्तु के रूप में किया गया भुगतान। |
महत्वपूर्ण अंतर
| आर्थिक गतिविधि | गैर-आर्थिक गतिविधि |
|---|---|
| मौद्रिक मूल्य से संबंधित होती है। | मुख्य रूप से सेवा, प्रेम, कर्तव्य आदि से संबंधित होती है। |
| आय या अर्थोपार्जन किया जा सकता है। | आय अर्जित करना मुख्य उद्देश्य नहीं होता। |
| उदाहरण: नौकरी, व्यापार, मजदूरी। | उदाहरण: परिवार की सेवा, स्वयंसेवा। |
महत्वपूर्ण शब्द
- आर्थिक गतिविधि: धन या मौद्रिक मूल्य से संबंधित गतिविधि।
- गैर-आर्थिक गतिविधि: ऐसी गतिविधि जिसमें आय अर्जित करना मुख्य उद्देश्य नहीं होता।
- बाजार: वस्तुओं और सेवाओं के लेन-देन का स्थान।
- शुल्क: सेवा या व्यावसायिक परामर्श के बदले किया गया भुगतान।
- वेतन: कर्मचारी को नियमित रूप से किया जाने वाला निश्चित भुगतान।
- मजदूरी: श्रमिक को किसी विशेष समय अवधि के कार्य के बदले किया गया भुगतान।
- वस्तु के रूप में भुगतान: कार्य के बदले वस्तु के रूप में प्राप्त गैर-मौद्रिक भुगतान।
- मूल्य संवर्धन: उत्पादन या परिवर्तन के विभिन्न चरणों में वस्तु के मूल्य में वृद्धि।
- सामुदायिक सहभागिता: समुदाय के लोगों द्वारा मिलकर समाजोपयोगी कार्यों में भाग लेना।
Exam Booster
- कार्य और गतिविधियाँ → आर्थिक एवं गैर-आर्थिक गतिविधियाँ।
- आर्थिक गतिविधि → धन/मौद्रिक मूल्य या अर्थोपार्जन से संबंधित।
- गैर-आर्थिक गतिविधि → सेवा, प्रेम, कर्तव्य, सम्मान आदि से संबंधित।
- बाजार → वस्तुओं और सेवाओं का लेन-देन।
- शुल्क → सेवा या व्यावसायिक परामर्श का भुगतान।
- वेतन → नियमित निश्चित भुगतान।
- मजदूरी → विशेष समय अवधि के कार्य का भुगतान।
- वस्तु के रूप में भुगतान → गैर-मौद्रिक भुगतान।
- मूल्य संवर्धन → वस्तु के मूल्य में वृद्धि।
- राजेश के उदाहरण में ₹600 की लकड़ी से ₹1000 की कुर्सी बनी।
- ₹400 राजेश के कौशल, समय और प्रयास के मौद्रिक मूल्य को दर्शाता है।
- लंगर → सेवा और सामुदायिक सहभागिता का उदाहरण।
- स्वच्छ भारत अभियान → सामुदायिक सहभागिता का उदाहरण।
- वन महोत्सव → वृक्षारोपण और वन संरक्षण के प्रति सामुदायिक जागरूकता का उदाहरण।
Quick Revision
- काम → अनेक प्रकार की गतिविधियाँ
- आर्थिक गतिविधि → आय/मौद्रिक मूल्य
- गैर-आर्थिक गतिविधि → सेवा/प्रेम/कर्तव्य
- बाजार → वस्तु एवं सेवा का लेन-देन
- वेतन → नियमित भुगतान
- मजदूरी → समय अवधि के कार्य का भुगतान
- शुल्क → सेवा का भुगतान
- वस्तु के रूप में भुगतान → वस्तु द्वारा पारिश्रमिक
- मूल्य संवर्धन → वस्तु के मूल्य में वृद्धि
- सेवा → बिना मौद्रिक लाभ के समाजोपयोगी कार्य भी हो सकता है
- सामुदायिक सहभागिता → मिलकर समाजोपयोगी कार्य करना
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