Chapter-Chapter 11. प्रकृति की अमूल्य संपदा Science Curiosity class 6 in hindi Medium CBSE Notes
CBSE Class 6 Science Curiosity Notes in Hindi Medium based on latest NCERT syllabus, covering definitions, diagrams, formulas, and exam-oriented explanations.
Chapter 11. प्रकृति की अमूल्य संपदा
CBSE Full Notes
Chapter 11. प्रकृति की अमूल्य संपदा
प्राकृतिक संसाधन हमारे जीवन का आधार हैं। वायु, जल, सूर्य, वन, मिट्टी तथा खनिजों के बिना पृथ्वी पर जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती। इन संसाधनों का संतुलित एवं जिम्मेदारीपूर्ण उपयोग करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। इस अध्याय में प्राकृतिक संसाधनों के महत्व, उनके उपयोग तथा संरक्षण के उपायों का विस्तृत अध्ययन किया गया है।
Detailed Notes (विस्तृत अध्ययन नोट्स)
प्राकृतिक संसाधन सीमित हैं। कुछ संसाधन जैसे सूर्य एवं पवन निरंतर उपलब्ध रहते हैं, जबकि कई संसाधनों के बनने में लाखों वर्ष लगते हैं। इसलिए उनका विवेकपूर्ण उपयोग करना तथा उन्हें भविष्य की पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखना आवश्यक है।
प्राकृतिक संसाधन (Natural Resources)
प्रकृति द्वारा प्राप्त सभी उपयोगी पदार्थ एवं ऊर्जा स्रोत प्राकृतिक संसाधन कहलाते हैं। ये मनुष्य, पशु-पक्षियों तथा पौधों के जीवन के लिए आवश्यक हैं।
मुख्य प्राकृतिक संसाधन
- वायु
- जल
- सूर्य का प्रकाश
- वन
- मृदा
- चट्टानें
- खनिज
वायु (Air)
वायु विभिन्न गैसों का मिश्रण है। सभी जीव श्वसन के लिए ऑक्सीजन पर निर्भर हैं, जबकि पौधे प्रकाश संश्लेषण के लिए कार्बन डाइऑक्साइड का उपयोग करते हैं।
वायु का महत्व
- श्वसन के लिए ऑक्सीजन प्रदान करती है।
- प्रकाश संश्लेषण में सहायक है।
- पवन ऊर्जा का स्रोत है।
- मौसम एवं जलवायु को प्रभावित करती है।
जल (Water)
जल जीवन की मूल आवश्यकता है। पीने, भोजन बनाने, कृषि, उद्योग तथा स्वच्छता जैसे लगभग सभी कार्यों में जल का उपयोग होता है।
जल के प्रमुख स्रोत
- वर्षा
- नदियाँ
- झीलें
- तालाब
- भूजल
- हिमनद
पृथ्वी पर उपलब्ध अधिकांश जल समुद्रों में खारे जल के रूप में है, जबकि उपयोग योग्य मीठे जल की मात्रा बहुत कम है।
जल संरक्षण (Water Conservation)
जल का सावधानीपूर्वक उपयोग करना तथा उसकी बर्बादी रोकना जल संरक्षण कहलाता है। जल संरक्षण वर्तमान तथा भविष्य दोनों के लिए आवश्यक है।
जल संरक्षण के उपाय
- वर्षा जल संचयन अपनाना।
- रिसाव वाले नलों की मरम्मत करना।
- अनावश्यक जल की बर्बादी रोकना।
- जल स्रोतों को स्वच्छ रखना।
- घरेलू जल का पुनः उपयोग करना।
सौर ऊर्जा (Solar Energy)
सूर्य पृथ्वी पर ऊर्जा का सबसे बड़ा स्रोत है। पौधे सूर्य के प्रकाश की सहायता से भोजन बनाते हैं तथा मनुष्य सौर ऊर्जा का उपयोग बिजली उत्पादन एवं अन्य कार्यों में करता है।
सौर ऊर्जा के उपयोग
- सौर पैनलों द्वारा बिजली बनाना।
- सौर कुकर में भोजन पकाना।
- सौर जल ऊष्मक द्वारा पानी गर्म करना।
- ग्रामीण क्षेत्रों में प्रकाश व्यवस्था।
वन (Forest)
वन प्राकृतिक पर्यावरण का महत्वपूर्ण भाग हैं। वे केवल पेड़ों का समूह नहीं बल्कि अनेक प्रकार के जीव-जंतुओं एवं पौधों का निवास स्थान हैं।
वनों का महत्व
- ऑक्सीजन प्रदान करते हैं।
- कार्बन डाइऑक्साइड का अवशोषण करते हैं।
- वन्य जीवों को प्राकृतिक आवास देते हैं।
- मिट्टी का कटाव रोकते हैं।
- वर्षा एवं जलवायु संतुलन बनाए रखते हैं।
- लकड़ी, औषधियाँ एवं अन्य वन उत्पाद उपलब्ध कराते हैं।
मृदा (Soil)
मृदा पौधों की वृद्धि का आधार है। इसमें जल, वायु, खनिज, ह्यूमस तथा सूक्ष्मजीव पाए जाते हैं, जो पौधों को पोषण प्रदान करते हैं।
मृदा के मुख्य घटक
- खनिज कण
- ह्यूमस
- जल
- वायु
- सूक्ष्मजीव
चट्टानें एवं खनिज (Rocks and Minerals)
चट्टानें पृथ्वी की ठोस बाहरी परत बनाती हैं। इन्हीं से विभिन्न प्रकार के खनिज प्राप्त होते हैं, जिनका उपयोग उद्योगों, भवन निर्माण तथा मशीनों के निर्माण में किया जाता है।
मुख्य उपयोग
- भवन निर्माण
- सड़क निर्माण
- धातु उद्योग
- सीमेंट उद्योग
- आभूषण निर्माण
प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण
प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करना प्रत्येक नागरिक का दायित्व है। यदि इनका अत्यधिक दोहन किया गया, तो भविष्य में इनकी कमी हो सकती है।
संरक्षण के उपाय
- अधिक से अधिक वृक्ष लगाना।
- जल एवं बिजली की बचत करना।
- 3R सिद्धांत अपनाना।
- प्रदूषण को कम करना।
- प्राकृतिक संसाधनों का आवश्यकता अनुसार ही उपयोग करना।
याद रखने योग्य बातें
- प्राकृतिक संसाधन जीवन के लिए अनिवार्य हैं।
- वायु में नाइट्रोजन सर्वाधिक मात्रा में होती है।
- ऑक्सीजन श्वसन तथा कार्बन डाइऑक्साइड प्रकाश संश्लेषण के लिए आवश्यक है।
- सूर्य ऊर्जा का सबसे बड़ा प्राकृतिक स्रोत है।
- जल संरक्षण भविष्य के लिए अत्यंत आवश्यक है।
- वन पर्यावरण संतुलन बनाए रखते हैं।
- मृदा का निर्माण चट्टानों के अपक्षय से होता है।
- ह्यूमस मिट्टी की उर्वरता बढ़ाता है।
- खनिज उद्योगों एवं निर्माण कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
- 3R सिद्धांत पर्यावरण संरक्षण का प्रभावी उपाय है।
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