Chapter-Chapter 2. दो ध्रुवीयता का अंत Political Science-I class 12 in hindi Medium CBSE Notes
CBSE Class 12 Political Science-I Notes in Hindi Medium based on latest NCERT syllabus, covering definitions, diagrams, formulas, and exam-oriented explanations.
Chapter 2. दो ध्रुवीयता का अंत
शॉक थेरेपी
शॉक थेरेपी: शाब्दिक अर्थ है आघात पहुँचाकर उपचार करना। साम्यवाद के पतन के बाद सोवियत संघ के गणराज्यों को विश्व बैंक और अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष द्वारा निर्देशित साम्यवाद से पूंजीवाद की ओर संक्रमण (परिवर्तन) के मॉडल को अपनाने को कहा गया। इसे ही शॉक थेरेपी कहते है।
शॉक थेरेपी की विशेषताएँ:
1. मिल्कियत का प्रमुख रूप निजी स्वामित्व।
2. राज्य की संपदा का निजीकरण।
3. सामूहिक फार्म की जगह निजी फार्म।
4. मुक्त व्यापार व्यवस्था को अपनाना।
5. मुद्राओं की आपसी परिवर्तनीयता।
6. पश्चिमी देशों की आर्थिक व्यवस्था से जुड़ाव।
शॉक थेरेपी के दुस्परिणाम :
1. पूर्णतया असफल, रूस का औद्योगिक ढांचा चरमरा गया।
2. रूसी मुद्रा रूबल में गिरावट।
3. समाज कल्याण की पुरानी व्यवस्था नष्ट।
4. 90 प्रतिशत उद्योगों को निजी हाथों या कम्पनियों को कम दामों (औने-पौने) दामों में बेचा गया जिसे इतिहास की सबसे बड़ी गराज सेल कहा जाता है।
5. पुराना व्यावसायिक ढांचा टूट चूका था जिससे आर्थिक विषमता बढ़ी।
6. सामूहिक खेती प्रणाली समाप्त हो चुकी थी जिससे खाद्यान्न संकट हो गया।
7. माफिया वर्ग का उदय।
8. कमजोर संसद व राष्ट्रपति को अधिक शक्तियाँ जिससे सत्तावादी राष्ट्रपति शासन।
गराज-सेल : शॉक थेरेपी से उन पूर्वी एशियाई देशों की अर्थव्यवस्था चरमरा गई जिनमें पहले साम्यवादी शासन थी | रूस में, पूरा का पूरा राज्य-नियंत्रित औद्योगिक ढाँचा चरमरा उठा। लगभग 90 प्रतिशत उद्योगों को निजी हाथों या कंपनियों को बेचा गया। आर्थिक ढाँचे का यह पुनर्निर्माण चूँकि सरकार द्वारा निर्देशित औद्योगिक नीति के बजाय बाजार की ताकतें कर रही थीं, इसलिए यह कदम सभी उद्योगों को मटियामेट करने वाला साबित हुआ। इसे ‘इतिहास की सबसे बड़ी गराज-सेल’
के नाम से जाना जाता है |
गराज-सेल जैसी हालात उत्पन्न होने का कारण : महत्त्वपूर्ण उद्योगों की कीमत कम से कम करके आंकी गई और उन्हें औने-पौने दामों में बेच दिया गया। हालाँकि इस महा-बिक्री में भाग लेने के लिए सभी नागरिकों को अधिकार-पत्र दिए गए थे, लेकिन अधिकांश नागरिकों ने अपने अधिकार-पत्र कालाबाजारियों के हाथों
बेच दिये क्योंकि उन्हें धन जरुरत थी। रूसी मुद्रा रूबल के मूल्य में नाटकीय ढंग से गिरावट आई। मुद्रास्पफीति इतनी ज्यादा बढ़ी कि लोगों की जमापूँजी जाती रही।
शॉक थेरेपी के परिणामस्वरुप आर्थिक बदलाव :
(i) समाज कल्याण की पुरानी व्यवस्था को क्रम से नष्ट किया गया |
(ii) माफिया वर्ग ने आर्थिक गतिविधियों को अपने नियंत्रण में ले लिया |
(iii) राज्य की संपदा का निजीकरण किया गया |
(iv) सामूहिक फॉर्म को निजी फॉर्म में बदला गया |
(v) साम्यवादी अर्थव्यवस्था को पूंजीवादी की ओर मोड़ा गया |
(vi) अंदरूनी अर्थव्यवस्थाओं के रुझान को बाहरी व्यवस्थाओं के प्रति बुनियादी तौर पर बदल गए |
(vii) पूँजीवादी व्यवस्था को अपनाने के लिए वित्तीय खुलापन, मुद्राओं की आपसी परिवर्तनीयता और मुक्त व्यापार की नीति महत्त्वपूर्ण मानी गई।
पूर्व साम्यवादी देश और भारत:
1. पूर्व साम्यवादी देशों के साथ भारत के संबंध अच्छे है, रूस के साथ विशेष रूप से प्रगाढ़ है।
2. दोनों का सपना बहुध्रवीय विश्व का है।
3. दोनों देश सहअस्तित्व, सामूहिक सुरक्षा, क्षेत्रीय सम्प्रभुता, स्वतन्त्र विदेश नीति, अर्न्तराष्ट्रीय झगड़ों का वार्ता द्वारा हल, संयुक्त राष्ट्रसंघ के सुदृढ़ीकरण तथा लोकतंत्र में विश्वास रखते है।
4. 2001 में भारत और रूस द्वारा 80 द्विपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर
5. भारत रूसी हथियारों का खरीददार।
6. रूस से तेल का आयात।
7. परमाण्विक योजना तथा अंतरिक्ष योजना में रूसी मदद।
8. कजाकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान के साथ उर्जा आयात बढ़ाने की कोशिश।
रूस द्वारा भारत की विभिन्न क्षेत्रों में मदद -
(i) हथियार एवं सैन्य उपकरण : भारत रूस के लिए हथियारों का दूसरा सबसे बड़ा खरीददार देश है। भारतीय सेना को अधिकांश सैनिक साजो-सामान रूस से प्राप्त होते हैं।
(ii) तेल और ऊर्जा के क्षेत्र : भारत तेल के आयातक देशों में से एक है इसलिए भी भारत रूस के लिए महत्त्वपूर्ण है। उसने तेल के संकट की घड़ी में हमेशा भारत की मदद की है। भारत रूस से अपने ऊर्जा-आयात को भी बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। ऐसी कोशिश कजाकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान के साथ भी चल रही है।
(iii) परमाणु ऊर्जा : रूस भारत के परमाण्विक योजनाओं और परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में लगातार सहयोग देता रहा है | कई परमाणु-बिजली घरों के विकास में रूस भारत की मदद कर रहा है |
(iv) अंतरिक्ष उद्योग : आज भारत अंतरिक्ष में तेजी से पैर फैला रहा है, और वर्त्तमान में कई नए कीर्तिमान भी स्थापित किया है | रूस ने भारत के अंतरिक्ष उद्योग में भी जरूरत के वक्त क्रायोजेनिक इंजन दे कर मदद की है। भारत और रूस विभिन्न वैज्ञानिक परियोजनाओं में साझीदार हैं।
(v) कश्मीर मुद्दा : रूस ने हमेशा अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर कश्मीर मुद्दे पर भारत का साथ ही नहीं दिया अपितु एक अच्छे मित्र की भांति साथ-साथ खड़ा रहा |
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