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Chapter-Chapter 8. किसान जमींदार और राज्य History Part-2 class 12 in hindi Medium CBSE Notes


Last Updated : July 27, 2026

CBSE Class 12 History Part-2 Notes in Hindi Medium based on latest NCERT syllabus, covering definitions, diagrams, formulas, and exam-oriented explanations.

Chapter-Chapter 8. किसान जमींदार और राज्य History Part-2 class 12 in hindi Medium CBSE Notes
Updated on: 27 July 2026

Chapter 8. किसान जमींदार और राज्य

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सम्पूर्ण नोट्स

अध्याय 8 : किसान, जमींदार और राज्य

परिचय : यह अध्याय 16वीं से 18वीं शताब्दी के बीच के भारत के ग्रामीण जीवन, कृषि व्यवस्था, जमींदारों और राज्य के बीच संबंधों पर केंद्रित है। यह हमें बताता है कि मुग़ल काल में ग्रामीण समाज और प्रशासन कैसे एक-दूसरे से जुड़े हुए थे।

1. ग्रामीण समाज की मुख्य विशेषताएँ

  • भारत मुख्यतः कृषि प्रधान देश था। अधिकांश लोग गाँवों में रहते थे और खेती ही उनका मुख्य व्यवसाय था।
  • गाँव स्वावलंबी इकाई थे — अपनी आवश्यक वस्तुएँ स्वयं तैयार करते थे।
  • किसान, कारीगर, पुजारी और मज़दूर मिलकर गाँव की सामाजिक संरचना बनाते थे।

2. भूमि और खेती

  • भूमि उत्पादन का मुख्य साधन थी।
  • भूमि तीन प्रकार की थी — सिंचित, असिंचित और ऊसर
  • खेती में गेहूँ, धान, बाजरा, कपास, गन्ना, तिलहन आदि फसलें उगाई जाती थीं।
  • खेती प्रायः मानसून पर निर्भर रहती थी, पर कुछ स्थानों पर सिंचाई के साधन (कुएँ, तालाब) विकसित थे।

3. किसान वर्ग और उनके प्रकार

  • खुदक़ाश किसान: अपनी भूमि पर खेती करने वाले।
  • पैदावर किसान: दूसरों की भूमि पर मजदूरी के रूप में खेती करने वाले।
  • बंधुआ मज़दूर: ऋण या सामाजिक कारणों से किसी ज़मींदार के अधीन काम करने वाले।
  • किसानों को भूमि कर देना पड़ता था जिसे राजस्व कहा जाता था।

4. कर प्रणाली और राज्य

  • भूमि से प्राप्त राजस्व राज्य की आय का मुख्य स्रोत था।
  • अकबर के शासनकाल में राजस्व व्यवस्था को टोडरमल ने व्यवस्थित किया, जिसे ज़ब्त प्रणाली कहा जाता है।
  • भूमि का सर्वेक्षण कर उसकी उपज के आधार पर कर तय किया जाता था।
  • कई बार कर की वसूली मध्यस्थों (जमींदारों) के माध्यम से की जाती थी।

5. जमींदारों की भूमिका

  • जमींदार राज्य और किसानों के बीच सेतु का कार्य करते थे।
  • वे राजस्व संग्रह करते, कानून-व्यवस्था बनाए रखते और सैनिक सहायता देते थे।
  • कुछ जमींदार बहुत प्रभावशाली बन गए और अपने क्षेत्रों में अर्ध-स्वतंत्र शासक की तरह व्यवहार करते थे।
  • जमींदारों के पास आम तौर पर बड़े-बड़े किले और हवेलियाँ होती थीं।

6. गाँव की आंतरिक संरचना

  • गाँव में विभिन्न जातियों के लोग रहते थे – हर जाति का अपना पेशा होता था।
  • ग्राम पंचायत गाँव की स्थानीय संस्था थी जो विवादों और भूमि विभाजन के कार्य देखती थी।
  • कई बार ‘मुखिया’ या ‘पटेल’ प्रशासनिक कार्यों का संचालन करता था।
  • महिलाएँ खेती और घरेलू दोनों कार्यों में भाग लेती थीं।

7. कृषि उत्पादन और व्यापार

  • अतिरिक्त उत्पादन का उपयोग व्यापार में किया जाता था।
  • कृषि उत्पादन स्थानीय बाजारों में और बड़े व्यापारिक केंद्रों जैसे आगरा, लाहौर, अहमदाबाद में बेचा जाता था।
  • भारत कृषि उत्पादों के निर्यात के लिए भी प्रसिद्ध था — कपास, रेशम, मसाले आदि।

8. मुगल प्रशासन और ग्रामीण समाज

  • मुग़ल शासन में भूमि कर प्रणाली के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को राज्य से जोड़ा गया।
  • राजस्व अधिकारी किसानों के उत्पादन और भुगतान की निगरानी करते थे।
  • राज्य कभी-कभी किसानों को राहत भी देता था जैसे – सूखा या अकाल की स्थिति में।
  • हालाँकि, अत्यधिक कर वसूली और युद्धों के कारण कई किसानों पर बोझ बढ़ गया।

9. ग्रामीण विद्रोह

  • अत्यधिक कर, जमींदारी अत्याचार और अकाल के कारण किसानों में असंतोष बढ़ा।
  • इससे समय-समय पर किसान विद्रोह हुए – जैसे जाट विद्रोह, सिक्ख आंदोलन और मराठा संघर्ष
  • इन आंदोलनों ने मुगल शासन की स्थिरता को कमजोर किया।

10. निष्कर्ष

किसान, जमींदार और राज्य के बीच का संबंध भारत की सामाजिक और आर्थिक संरचना की रीढ़ था। मुगल काल में भूमि कर व्यवस्था ने राज्य को शक्ति दी, पर किसानों पर बोझ भी बढ़ाया। फिर भी, यह काल ग्रामीण भारत की उत्पादन शक्ति और सामाजिक विविधता का साक्षी रहा।

संक्षेप में (मुख्य बिंदु)

  • भारत का समाज मुख्यतः कृषि आधारित था।
  • जमींदार राज्य के राजस्व संग्रहकर्ता थे।
  • अकबर के शासन में टोडरमल ने भूमि कर व्यवस्था को संगठित किया।
  • किसानों की स्थिति राज्य की नीतियों पर निर्भर थी।
  • किसान विद्रोहों ने मुग़ल साम्राज्य की कमजोरी को उजागर किया।
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