Chapter-Chapter 1. प्रबंध की प्रकृति एवं महत्व Business Study class 12 in hindi Medium CBSE Notes
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Chapter 1. प्रबंध की प्रकृति एवं महत्व
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प्रबन्ध की प्रकृति -
1. प्रबन्ध कला के रूप में - प्रबंध की कला के रूप में विशेषताएं निम्न है -
(क) सैध्दान्तिक ज्ञान - कला हमेशा सैध्दान्तिक ज्ञान पर आधारित होता है | अतः प्रबन्ध कला है क्योंकि कला की ही तरह प्रबंध के विभिन्न क्षेत्रो में साहित्य तथा अध्ययन सामग्री उपलब्ध है |
(ख) व्यक्तिगत प्रयोग - सभी लोग अलग - अलग प्रकार से काम करते है क्योंकि सभी के काम करने का तरीका अलग - अलग होता है | इसलिए कला एक व्यक्तिगत अवधारणा है तथा प्रबन्ध भी |
(ख) अभ्यास एवं सृजनशीलता - कला अभ्यास तथा सृजनशीलता पर आधारित होते है | किसी भी व्यक्ति की क्षमता इस बात पर निर्भर करती है की उसने कितना अभ्यास किया है | जिस प्रकार कला को अभ्यास तथा अनुभव द्वारा सुधरा जा सकता है इसी प्रकार प्रबन्ध को भी अभ्यास तथा अनुभव द्वारा सुधारा जा सकता है |
2. प्रबन्ध विज्ञानं के रूप में - प्रबंध की विज्ञान के रूप में विशेषताएं निम्न है -
(क) व्यवस्थित ज्ञान समूह - प्रबन्ध का विज्ञान की तरह ही व्यवस्थित ज्ञान समूह है | इनके सिधांत कारण तथा परिणाम के बीच सम्बंध प्रकट करते है जो सिधान्तो, अभ्यासों तथा प्रयोगों पर आधारित होते है |
(ख) प्रशिक्षण पर आधारित सिधांत - वैज्ञानिक सिधांत कई वर्षो क शोध, परीक्षण, प्रयोग तथा अवलोकन के बाद प्राप्त होते है उसी तरह प्रबन्ध के सिधांत भी प्राप्त होते है | अतः विज्ञान की तरह ही प्रबन्ध में भी प्रशिक्षण पर आधारित सिधांत है |
(ग) व्यापक वैधता - वैज्ञानिक सिधांत सत्य पर आधारित होते है तथा सभी लोगो द्वारा स्वीकृत होते है इसी प्रकार प्रबन्ध के सिधांत भी सत्य पर आधारित होते है | इसलिए ये व्यापक रूप से वैध्य होते है |
3. पेशे के रूप में - प्रबंध की पेशे के रूप में विशेषताएं निम्न है -
(क) भलीभांति परिभाषित ज्ञान समूह - सभी पेशे भलीभांति परिभाषित ज्ञान समूह पर आधारित होते है | क्योंकि अलग - अलग पेशे के लिए अलग ज्ञान तथा अलग शिक्षा होती है जिसे काफी लम्बे समय की पढाई के बाद प्राप्त किया जाता है |
(ख) प्रतिबंधित प्रवेश - पेशे में हर कोई आसानी से प्रवेश नहीं ले सकता है क्योंकि इसमें प्रवेश प्रतिबंधित होता है केवल परीक्षा या शैक्षणिक योग्यता द्वारा ही प्रवेश संभव है |
(ग) सेवा उद्देश्य - प्रबन्ध की तरह ही पेशे का मुख्य उद्देश्य सेवा उद्देश्य होता है क्योंकि इसमें ग्राहकों को सेवाएँ प्रदान की जाती है |
(घ) नैतिक आचार संहिता - सभी पेशे की अपनी एक अलग नैतिक आचार संहिता होती है जिसका पालन हर पेशेवर को अवश्य करना होता है |
नोट - प्रबंध के लिए किसी भी प्रकार की विशेष डिग्री तथा प्रमाण पत्र की आवश्यकता नहीं होती है तथा न हीं किसी प्रकार की नैतिक आचार संहिता का पालन करना होता है | प्रबन्ध पेशे की सभी विशेषताओं को पूरा नहीं करता इसी लिए प्रबन्ध पेशा है परन्तु पूरी तरह नहीं |
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