Chapter-2. भारतीय संविधान में अधिकार Political Science class 11 in hindi Medium CBSE Notes
CBSE Class 11 Political Science Notes in Hindi Medium based on latest NCERT syllabus, covering definitions, diagrams, formulas, and exam-oriented explanations.
2. भारतीय संविधान में अधिकार
अधिकारों की आवश्यकता
अधिकारों की आवश्यकता:
व्यक्ति के व्यक्तिगत विकास हेतु अधिकारों की आवश्यकता होती है | ये भारतीय संविधान के भाग तीन में मौलिक अधिकारों के रूप में भारतीय नागरिकों को प्राप्त है |
अधिकारों की आवश्यकता निम्न कारणों से हैं :
(1) अधिकार मानव के व्यक्तित्व को सँवारते हैं |
(2) लोकतंत्र के लिए नागरिक स्वतंत्रताएँ अनिवार्य हैं, क्योंकि कोई भी राज्य मनमानी ढंग से नागरिक अधिकारों का दमन नहीं कर सकता, लोकतंत्र में जनता ही सर्वोपरी है |
(3) अधिकार शासन की मनमानी शक्तियों और कार्यों पर रोक का काम करते हैं |
(4) गरीबी और उत्पीडन से राहत पाने के लिए हमारे संविधान ने बहुत से अधिकार दिए हैं | इन नागरिक अधिकारों की रक्षा सर्वोच्य न्यायालय करता है |
अधिकारों का घोषणा पत्र : संविधान द्वारा प्रदत्त और संरक्षित अधिकारों की सूची को ‘अधिकारों का घोषणा पत्र’ कहते हैं जिसकी मांग 1928 में नेहरु जी ने उठाई थी |
नागरिक स्वतंत्रता की प्राप्ति: नागरिक स्वतंत्रता प्राप्त करने के लिए जनता को निरंकुश राजाओं के विरुद्ध घोर संघर्ष करना पड़ा था | ये स्वतंत्रताएँ थी मनमाने ढंग से गिरफ़्तारी पर रोक, भाषण की स्वतंत्रता एवं धार्मिक स्वतंत्रता आदि | शुरू-शुरू में इन्हें नागरिक स्वतंत्रता कहा जाता था |
मानव अधिकार घोषणा पत्र : 1789 में फ़्रांस की क्रांति के पश्चात् फ्रांस की राष्ट्रिय विधानसभा ने एक सुप्रसिद्ध मानव अधिकार घोषणा-पत्र जारी किया | इसमें यह घोषणा की गयी थी कि “सारे मनुष्य समान पैदा होते हैं, अत: उनके अधिकार समान होने चाहिए |”
मानवाधिकार: एक समान्य मनुष्य के जीवन जीने के लिए तथा उनके व्यक्तिगत विकास के लिए कुछ अधिकार होने चाहिए इसी कड़ी में, सितंबर 1789 में अमेरिकी कांग्रेस ने संविधान में दस संशोधन स्वीकार किये तथा दिसंबर 1791 तक वे अमेरिकी सविधान के अंग बन गए | सामूहिक रूप से उन्हें अधिकार पत्र (बिल ऑफ़ राइट्स ) कहा जाता है | इस प्रावधान में निम्न अधिकार थे - भाषण की स्वतंत्रता, समाचारपत्रों की स्वतंत्रता, धार्मिक स्वतंत्रता, शांतिपूर्वक सभा-सम्मेलन करने का अधिकार, संपति की जब्ती से सरक्षण का अधिकार तथा निर्मम दंड से सुरक्षा आदि |
लोकहित मुकदमा : भारत में गरीबी से ग्रस्त और उत्पीडन से राहत पाने के लिए कोई साधन नहीं, कई बार सरेआम असंवैधानिक तरीके से लोगों के साथ अन्याय होता है और कानून वहाँ कुछ नहीं कर पाता है | इस प्रकार जनहित के लिए अदालत में किये गए मुकदमे को जनहित मुकदमा (public interest litigation, PIL) कहते हैं |
इस पाठ के अन्य दुसरे विषय भी देखे :
Class 11, all subjects CBSE Notes in hindi medium, cbse class 11 Political Science notes, class 11 Political Science notes hindi medium, cbse 11 Political Science cbse notes, class 11 Political Science revision notes, cbse class 11 Political Science study material, ncert class 11 science notes pdf, class 11 science exam preparation, cbse class 11 physics chemistry biology notes
Welcome to ATP Education
ATP Education