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Chapter-8. जीव जनन कैसे करते है Science class 10 in hindi Medium CBSE Notes

CBSE Class 10 Science Notes in Hindi Medium based on latest NCERT syllabus, covering definitions, diagrams, formulas, and exam-oriented explanations.

Chapter-8. जीव जनन कैसे करते है Science class 10 in hindi Medium CBSE Notes
Updated on: 23 March 2026

8. जीव जनन कैसे करते है

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जनन के दौरान जीवों में विभिन्नता

अध्याय 8. जीव जनन कैसे करते हैं ?


जनन (Reproduction): जीव अपने प्रजाति की उतरजिविता को समष्टि में बनाए रखने के लिए अपने जैसे संतति को एक प्रक्रिया द्वारा उत्पन्न करते हैं | इस प्रक्रिया को जनन कहते हैं | 

डी. एन. ए. प्रतिकृति (Copy) का प्रजनन में महत्व : 

जनन की मूल घटना डी. एन. ए. की प्रतिकृति बनाना है । डी. एन. ए. की  प्रतिकृति बनाने के लिए कोशिकाएँ विभिन्न रासायनिक क्रियाओं का उपयोग करती है । जनन कोशिका में इस प्रकार डी. एन. ए. की दो प्रतिकृतियाँ बनती है। इनके प्रजनन में निम्नलिखित महत्त्व है |

(i) जनन के दौरान डी. एन. ए. प्रतिकृति का जीव की शारीरिक संरचना एवं डिजाइन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है जो विशिष्ट निकेत के योग्य बनाती है ।

(ii) डी. एन. ए. की प्रतिकृति संतति जीव में जैव विकास के लिए उतरदायी होती हैं ।
(iii) डी. एन. ए. की प्रतिकृति में मौलिक डी. एन. ए. से कुछ परिवर्तन होता है मूलतः समरूप नहीं होते अतः जनन के बाद इन पीढीयों में सहन करने की क्षमता होती है । 
(iv) डी. एन. ए. की प्रतिकृति में यह परिवर्तन परिवर्तनशील परिस्थितियों में जीवित रहने की क्षमता प्रदान करती है ।  

शारीरिक अभिकल्प में विविधता का कारण: 

शरीर का अभिकल्प समान होने के लिए जनन जीव के अभिकल्प का ब्लूप्रिंट तैयार करता है। परन्तु अंततः शारीरिक अभिकल्प में विविधता आ ही जाती है। क्योंकि कोशिका के केन्द्रक में पाए जाने वाले गुणसूत्रों के डी. एन. ए. के अणुओं में आनुवांशिक गुणों का संदेश होता है जो जनक से संतति पीढी में जाता है । कोशिका के केन्द्रक के डी. एन. ए.  में प्रोटीन संश्लेषण के लिए सूचना निहित होती हैं इस सूचना के भिन्न होने की अवस्था में बनने वाली प्रोटीन भी भिन्न होगी । इन विभिन्न प्रोटीनों के कारण अंततः शारीरिक अभिकल्प में विविधता आ ही जाती है।

जीवों में विभिन्नता कैसे आती है ? 

जनन के दौरान जनन कोशिकाओं में डी. एन. ए. की दो प्रतिकृति (copy) बनती है इसके साथ-साथ दूसरी कोशिकीय संरचनाओं का सृजन भी होता है, और प्रतिकृतिया जब अलग होती हैं तो एक कोशिका विभाजित होकर दो कोशिकाएँ बनाती है | चूँकि कोशिका के केन्द्रक के डी. एन. ए. में प्रोटीन संश्लेषण के लिए सूचनाएँ भिन्न होती हैं इसलिए बनने वाले प्रोटीन में भी भिन्नता आ जाती है | ये सभी जैव-रासायनिक प्रक्रिया होती है जिसमें डी. एन. ए. की प्रतिकृति बनने के दौरान ही भिन्नता आ जाती है यही जीवों में विभिन्नता का कारण है | 

जीवों में विभिन्नता का महत्त्व: 

(i) विभिन्नताओं के कारण ही जीवों कि समष्टि परितंत्र में स्थान अथवा निकेत ग्रहण करती हैं | 

(ii) विभिन्नताएँ समष्टि में स्पीशीज की उत्तरजीविता बनाए रखने में उपयोगी है | 

(iii) जीवों में पायी जाने वाली विभिन्नताएँ ही जैव-विकास का आधार है | चूँकि जबतक संतति में विभिन्नताएँ न हो जैव-विकास नहीं कहा जा सकता है | 

(iv) विभिन्नताएँ परिवर्तनशील परिस्थितियों में जीवित रहने की क्षमता प्रदान करती है ।  

विभिन्नताएँ जीवों की स्पीशीज के उत्तरजीविता के लिए उत्तरदायी है : 

जीवों में विभिन्नता ही उन्हें प्रतिकूल परिस्थितियों में बने रहने में सहायक हैं। शीतोष्ण जल में पाए जाने वाले जीव़ पारिस्थितिक तंत्र के अनुकुल जीवित रहते है। यदि वैश्विक उष्मीकरण के कारण जल का ताप बढ जाता हैं तो अधिकतर जीवाणु मर जाएगें, परन्तु उष्ण प्रतिरोधी क्षमता वाले कुछ जीवाणु ही खुद को बचा पाएगें और वृद्धि कर पाएगें । अतः जीवों में विभिन्नता स्पीशीज की उतरजीविता बनाए रखने में उपयोगी हैं ।

 

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