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Chapter-5. तत्वों के आवर्त वर्गीकरण Science class 10 in hindi Medium CBSE Notes

CBSE Class 10 Science Notes in Hindi Medium based on latest NCERT syllabus, covering definitions, diagrams, formulas, and exam-oriented explanations.

Chapter-5. तत्वों के आवर्त वर्गीकरण Science class 10 in hindi Medium CBSE Notes
Updated on: 14 March 2026

5. तत्वों के आवर्त वर्गीकरण

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आवर्त सारणी की प्रवृति

आधुनिक आवर्त सारणी की प्रवृति:

संयोजकता: किसी तत्व के परमाणु के सबसे बाहरी कोशों में उपस्थित संयोजी इलेक्ट्रोनों की संख्या को संयोजकता कहते हैं | 

परमाणु साइज़ : एक स्वतंत्र परमाणु के केंद्र से उसके सबसे बाहरी कोश की दूरी ही परमाणु के साइज़ को दर्शाती है। परमाणु की साइज़ को मापने के लिए उसकी त्रिज्या को मापा जाता है | 

परमाणु की त्रिज्या को पिकोमीटर pm में मापा जाता है | 

1 pm = 10-12 m होता है | 

हाइड्रोजन परमाणु की त्रिज्या 37 पिकोमीटर होता है | 

कुछ अन्य तत्वों का परमाणु त्रिज्या: 

तत्व (प्रतिक)  परमाणु त्रिज्या 

लिथियम (Li)

बेरेलियम (Be)

बोरोन (B)

ऑक्सीजन (O) 

नाइट्रोजन (N) 

कार्बन (C) 

सोडियम (Na) 

 152 pm 

 111 pm

88 pm

 66 pm 

 74 pm

 77 pm 

 86 pm 

आधुनिक आवर्त सारणी के गुण : 

(i) आवर्त में बाईं से दाईं ओर जाने पर परमाणु त्रिज्या घटती है। नाभिक में आवेश के बढ़ने से यह इलेक्ट्रॉनों को नाभिक की ओर खींचता है जिससे परमाणु का साइज़ घटता जाता है।

(ii) समूह में ऊपर से नीचे जाने पर परमाणु का साइज़ बढ़ता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि नीचे जाने पर एक नया कोश जुड़ जाता है। इससे नाभिक तथा सबसे बाहरी कोश के बीच की दूरी बढ़ जाती है और इस कारण नाभिक का आवेश बढ़ जाने के बाद भी परमाणु का साइज़ बढ़ जाता है।

(iii) आवर्त में जैसे-जैसे संयोजकता कोश के इलेक्ट्रॉनों पर किया जाने वाला प्रभावी नाभिकीय आवेश बढ़ता है, इलेक्ट्रॉन त्यागने की प्रवृत्ति घट जाती है।

(iv) समूह में नीचे की ओर, संयोजकता इलेक्ट्रॉन पर क्रिया करने वाला प्रभावी नाभिकीय आवेश घटता है क्योंकि सबसे बाहरी इलेक्ट्रॉन नाभिक से दूर होते हैं।

(v) आवर्त में बाएं से दाएँ जाने पर धात्विक लक्षण घटता है और समूह में नीचे जाने पर धात्विक गुण बढ़ता है |

(vi) आवर्त में बाएं से दाएँ जाने पर इलेक्ट्रान त्यागने की प्रवृति घटती जाती है और इलेक्ट्रान ग्रहण करने की प्रवृति बढ़ती जाती है |

आवर्त सारणी में धातुओं, अधतुओं एवं उपधातुओं की स्थिति :

धातुओं की  स्थिति : 

सोडियम (Na) एवं मैग्नेशियम (Mg) जैसी धातुएँ सारणी के बाईं ओर स्थित होती है | वैसे आधुनिक आवर्त सारणी में धातुओं की संख्या अधातुओं एवं उपधातुओं की तुलना में कहीं अधिक है | 

धातुओं में आबंध बनाते समय इलेक्ट्रान त्यागने की प्रवृति होती है | अर्थात विद्युत धनात्मक होते हैं | 

उपधातु (Metalloids): वे तत्व जो धातुओं एवं अधातुओं दोनों के गुणधर्म को प्रदर्शित करते हैं, अर्द्धधातु या उपधातु कहलाते हैं |

आधुनिक आवर्त सारणी में एक टेढ़ी-मेढ़ी रेखा (zig-zag line) धातुओं को अधातुओं से अलग करती है | 

उदाहरण : बोरोन (B), सिलिकॉन (Si), जर्मेनियम (Ge), आर्सेनिक (As), टेल्यूरियम (Te) और पॉलोनियम (Po). 

अधातुओं की स्थिति :

विद्युतऋणाणात्मकता की प्रवृत्ति के अनुसार अधातुएँ आवर्त सारणी के दाहिनी ओर ऊपर की ओर स्थित होती हैं। अधातुओं के ऑक्साइड की प्रकृति अम्लीय होती है | इनमें इलेक्ट्रोन ग्रहण करने की क्षमता होती है | 

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