Chapter-11. मानव-नेत्र एवं रंगबिरंगी दुनियाँ Science class 10 in hindi Medium CBSE Notes
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11. मानव-नेत्र एवं रंगबिरंगी दुनियाँ
प्रिज्म से प्रकाश का अपवर्तन
अध्याय 11. मानव-नेत्र एवं रंगबिरंगी दुनियाँ
प्रिज्म से प्रकाश का अपवर्तन :
प्रकाश का अपवर्तन (Refraction of Light): जब कोई प्रकाश की किरण एक माध्यम से दुसरे माध्यम में प्रवेश करती है तो यह अपने मार्ग से विचलित हो जाती है इसे ही प्रकाश का अपवर्तन कहते है |
प्रिज्म (Prizm): यह एक तिकोना काँच का स्लैब होता है जिसके दो त्रिभुजाकार आधार तथा तीन आयताकार पार्श्व पृष्ठ होते हैं | ये पृष्ठ एक दुसरे पर झुके होते हैं |

प्रिज्म
प्रिज्म कोण (Angle of Prizm): इसके दो पार्श्व फलकों के बीच के कोण को प्रिज्म कोण कहते हैं |
काँच के त्रिभुजाकार प्रिज्म से प्रकाश का अपवर्तन
PE - आपतित किरण
EF - अपवर्तित किरण
FS - निर्गत किरण
∠A, ∠B, ∠C - प्रिज्म कोण
∠D - विचलन कोण
∠i - आपतन कोण
∠r - अपवर्तन कोण
∠e - निर्गत कोण

प्रिज्म द्वारा प्रकाश का अपवर्तन : यहाँ PE आपतित किरण है, EF अपवर्तित किरण है तथा FS निर्गत किरण है। आप देख सकते हैं कि पहले पृष्ठ AB पर प्रकाश की किरण वायु से काँच में प्रवेश कर रही है। अपवर्तन वेफ पश्चात प्रकाश की किरण अभिलंब की ओर मुड़ जाती है। दूसरे पृष्ठ AC पर, प्रकाश की किरण काँच से वायु में प्रवेश करती है, तो प्रकाश कि किरण अभिलंब से दूर भागती है |
- प्रिज्म भी काँच के घनाकार स्लैब की तरफ अपवर्तन के सभी नियमों का पालन करता है |

स्पेक्ट्रम : जब सूर्य का श्वेत प्रकाश किसी प्रिज्म से होकर गुजरता है तो विभिन्न वर्णक्रमों में विभाजित हो जाता है | प्रकाश के अवयवी वर्णों के इस बैंड को स्पेक्ट्रम कहते हैं |
इस वर्णक्रम को VIBGYOR से दर्शाया जाता है ताकि इनका क्रम याद रखने में सहायक हो |
बैगनी (violet), जमुनी (Indigo), नीला (blue), हरा (green), पीला (yellow), नारंगी (orange) तथा लाल (red) |
विक्षेपण : प्रकाश के अवयवी वर्णों में विभाजन को विक्षेपण कहते हैं |
श्वेत प्रकाश: कोई भी प्रकाश जो सूर्य के प्रकाश के सदृश स्पेक्ट्रम बनाता है, प्रायः
श्वेत प्रकाश कहलाता है।
स्पेक्ट्रम प्राप्त करने के लिए सर आइजक न्यूटन का प्रयोग :

आइजक न्यूटन ने सर्वप्रथम सूर्य का स्पेक्ट्रम प्राप्त करने के लिए काँच के प्रिज़्म का उपयोग किया। एक दूसरा समान प्रिज़्म उपयोग करके उन्होंने श्वेत प्रकाश के स्पेक्ट्रम के वर्णों को और अधिक विभक्त करने का प्रयत्न किया। किन्तु उन्हें और अधिक वर्ण नहीं मिल पाए। फिर एक दूसरा सर्व सम प्रिज़्म पहले प्रिज्म के सापेक्ष उलटी स्थिति में रखा। इससे स्पेक्ट्रम के सभी वर्ण दूसरे प्रिज़्म से होकर गुशरे। उन्होंने देखा कि दूसरे प्रिश्म से श्वेत प्रकाश का किरण पुंज निर्गत हो रहा है। इस प्रेक्षण से न्यूटन को यह विचार आया कि सूर्य का प्रकाश सात वर्णों से मिलकर बना है।
- न्यूटन के इस प्रयोग के आधार पर हम कह सकते है कि सूर्य का प्रकाश सात वर्णों से मिलकर बना है |
- श्वेत प्रकाश प्रिश्म द्वारा इसके सात अवयवी वर्णों में विक्षेपित हो जाता है।
- किसी प्रिश्म से गुशरने के पश्चात, प्रकाश के विभिन्न वर्ण, आपतित किरण के सापेक्ष अलग-अलग कोणों पर झुकते (मुड़ते) हैं।
- लाल प्रकाश सबसे कम झुकता है जबकि बैंगनी सबसे अधिक झुकता है।
- आइजक न्यूटन ने सर्वप्रथम सूर्य का स्पेक्ट्रम प्राप्त करने के लिए काँच के प्रिज़्म
का उपयोग किया। - एक दूसरा समान प्रिज़्म उपयोग करके उन्होंने श्वेत प्रकाश के स्पेक्ट्रम के वर्णों को और अधिक विभक्त करने का प्रयत्न किया।
इस पाठ के अन्य दुसरे विषय भी देखे :
3. प्रिज्म से प्रकाश का अपवर्तन
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