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Chapter-Chapter 2. भारत में राष्ट्रवाद History class 10 in hindi Medium CBSE Notes


Last Updated : July 19, 2026

CBSE Class 10 History Notes in Hindi Medium based on latest NCERT syllabus, covering definitions, diagrams, formulas, and exam-oriented explanations.

Chapter-Chapter 2. भारत में राष्ट्रवाद History class 10 in hindi Medium CBSE Notes
Updated on: 19 July 2026

Chapter 2. भारत में राष्ट्रवाद

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सविनय अवज्ञा आंदोलन और राष्ट्रवाद का विस्तार

Chapter 2. भारत में राष्ट्रवाद

असहयोग आंदोलन की समाप्ति के बाद भी स्वतंत्रता की लड़ाई रुकी नहीं। महात्मा गांधी ने अंग्रेजों की अन्यायपूर्ण नीतियों के विरुद्ध सविनय अवज्ञा आंदोलन शुरू किया। नमक कानून का विरोध, दांडी यात्रा तथा देशभर में हुए आंदोलनों ने भारतीय राष्ट्रवाद को नई ऊर्जा प्रदान की।

Part 2 – सविनय अवज्ञा आंदोलन और राष्ट्रवाद का विस्तार

इस भाग में सविनय अवज्ञा आंदोलन, दांडी यात्रा, गांधी-इरविन समझौता तथा विभिन्न सामाजिक वर्गों की भागीदारी का अध्ययन करेंगे।

सविनय अवज्ञा आंदोलन (1930)

सविनय अवज्ञा आंदोलन ब्रिटिश कानूनों का शांतिपूर्ण उल्लंघन करने के उद्देश्य से प्रारम्भ किया गया।

  1. इस आंदोलन की शुरुआत 1930 में हुई।
  2. महात्मा गांधी ने इसका नेतृत्व किया।
  3. मुख्य उद्देश्य ब्रिटिश शासन का विरोध करना था।
  4. अन्यायपूर्ण कानूनों का शांतिपूर्ण उल्लंघन किया गया।
  5. यह आंदोलन पूरे देश में तेजी से फैल गया।

दांडी यात्रा (Dandi March)

दांडी यात्रा सविनय अवज्ञा आंदोलन की सबसे महत्वपूर्ण घटना थी।

  1. दांडी यात्रा 12 मार्च 1930 को प्रारम्भ हुई।
  2. यात्रा साबरमती आश्रम से दांडी तक निकाली गई।
  3. कुल दूरी लगभग 240 मील (390 किमी) थी।
  4. 6 अप्रैल 1930 को गांधीजी ने नमक कानून तोड़ा।
  5. यह आंदोलन ब्रिटिश शासन के विरुद्ध जन-आंदोलन बन गया।

नमक कानून का महत्व

गांधीजी ने नमक को आंदोलन का प्रतीक बनाया क्योंकि यह प्रत्येक भारतीय के जीवन से जुड़ा था।

  1. नमक प्रत्येक व्यक्ति की आवश्यक वस्तु थी।
  2. ब्रिटिश सरकार ने नमक पर कर लगाया था।
  3. गरीब और अमीर सभी इस कर से प्रभावित थे।
  4. नमक कानून तोड़कर ब्रिटिश शासन को चुनौती दी गई।
  5. इससे आंदोलन को व्यापक जनसमर्थन मिला।

सविनय अवज्ञा आंदोलन के प्रमुख कार्यक्रम

इस आंदोलन के दौरान अनेक प्रकार से ब्रिटिश शासन का विरोध किया गया।

  1. नमक कानून का उल्लंघन।
  2. विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार।
  3. स्वदेशी वस्तुओं का प्रयोग।
  4. करों का भुगतान न करना।
  5. सरकारी संस्थाओं का विरोध।
  6. शांतिपूर्ण धरने और प्रदर्शन।

गांधी-इरविन समझौता (1931)

1931 में महात्मा गांधी और लॉर्ड इरविन के बीच समझौता हुआ।

  1. मार्च 1931 में गांधी-इरविन समझौता हुआ।
  2. सरकार ने कई राजनीतिक कैदियों को रिहा किया।
  3. गांधीजी ने सविनय अवज्ञा आंदोलन स्थगित कर दिया।
  4. गांधीजी ने द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में भाग लेने की सहमति दी।
  5. नमक बनाने की सीमित अनुमति दी गई।

गोलमेज सम्मेलन (Round Table Conference)

भारत के संवैधानिक भविष्य पर चर्चा के लिए लंदन में गोलमेज सम्मेलन आयोजित किए गए।

  1. प्रथम गोलमेज सम्मेलन 1930 में हुआ।
  2. द्वितीय गोलमेज सम्मेलन 1931 में आयोजित हुआ।
  3. महात्मा गांधी ने द्वितीय सम्मेलन में भाग लिया।
  4. सम्मेलन से कोई ठोस परिणाम नहीं निकला।
  5. इसके बाद आंदोलन पुनः प्रारम्भ कर दिया गया।

महिलाओं की भूमिका

सविनय अवज्ञा आंदोलन में महिलाओं की भागीदारी उल्लेखनीय रही।

  1. महिलाओं ने विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार किया।
  2. धरनों और जुलूसों में सक्रिय भाग लिया।
  3. खादी के प्रचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  4. अनेक महिलाओं ने जेल यात्राएँ भी कीं।

किसानों की भूमिका

ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों ने आंदोलन को व्यापक समर्थन दिया।

  1. किसानों ने करों का विरोध किया।
  2. कई स्थानों पर लगान देने से इंकार किया।
  3. राष्ट्रीय आंदोलन में सक्रिय भागीदारी निभाई।
  4. ग्रामीण क्षेत्रों में राष्ट्रवाद का प्रसार हुआ।

व्यापारी और औद्योगिक वर्ग की भूमिका

व्यापारियों और उद्योगपतियों ने भी राष्ट्रीय आंदोलन का समर्थन किया।

  1. विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार का समर्थन किया।
  2. स्वदेशी उद्योगों को प्रोत्साहन दिया।
  3. राष्ट्रीय आंदोलन को आर्थिक सहायता प्रदान की।
  4. स्वदेशी व्यापार के विस्तार में योगदान दिया।

सविनय अवज्ञा आंदोलन का महत्व

इस आंदोलन ने स्वतंत्रता संघर्ष को एक नई दिशा प्रदान की।

  1. राष्ट्रवाद पूरे देश में और अधिक मजबूत हुआ।
  2. ब्रिटिश शासन की नीतियों का व्यापक विरोध हुआ।
  3. जनता का स्वतंत्रता आंदोलन पर विश्वास बढ़ा।
  4. महिलाओं, किसानों और व्यापारियों की भागीदारी बढ़ी।
  5. भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली।
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