1. समकालीन विश्व में लोकतंत्र Political Science class 9 in Hindi Medium ncert book solutions मुख्य बिंदु
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1. समकालीन विश्व में लोकतंत्र
मुख्य बिंदु
मुख्य बिन्दुएँ :
चिली में तख्तापलट :
- 11 सितंबर, 1973 को चिले के राष्ट्रपति आयेंदे की सरकार का उन्ही की सेना ने तख्तापलट कर दिया, जिसकी अगुआई जनरल आगस्तो पिनोशे किया किया |
- तख्तापलट के बाद जनरल आगस्तो पिनोशे चिली के राष्ट्रपति बने |
- फ़ौज ने राष्ट्रपति आयेंदे के निवास को घेर लिया और बम बरसाने लगे, इस फौजी हमले में राष्ट्रपति आयेंदे की मौत हो गई |
- इस तख्तापलट के लिए सैन्य शासकों को अमेरिका का साथ था, क्योंकि अमेरिका की सरकार आयेंदे शासन से खुश नहीं थीं |
- पिनोशे की सरकार ने आयेंदे के समर्थकों और लोकतंत्र की मांग करने वालों का दमन किया, उनकी हत्या कराई |
- वे सभी फौजी अधिकारी जिन्होंने तख्तापलट में शामिल होने से इंकार कर दिया था | उनकी हत्याएँ करा दी गई जिनमें चिले के वायुसेना के प्रमुख जनरल अल्बर्टो बैशेले प्रमुख थे | उनकी पत्नी और बेटी को जेल में डालकर काफी प्रताड़ित किया गया |
चिली में लोकतंत्र की वापसी :
- 17 वर्ष के शासन के बाद पिनोशे का सैनिक शासन 1988 में समाप्त हुआ जब उन्होंने जनमत संग्रह कराने का फैसला लिया | लोगों ने उनके सैन्य शासन को नकार दिया |
- सैन्य शासन के अंत के बाद जनरल बैशेले की बेटी मिशेल बैशेले चिली की राष्ट्रपति चुनी गई जो एक लोकतांत्रिक सरकार है |
- लोकतान्त्रिक सरकार द्वारा कराये गए जाँच में पाया गया कि पिनोशे सरकार सिर्फ क्रूर ही नहीं थी अपितु उसने भरी भ्रष्टाचार किया था |
पोलैंड में अलोकतांत्रिक सरकार :
- 1980 में पोलैंड पर जारुजेल्स्की के नेतृत्व में पोलिश यूनाइटेड वर्कर्स पार्टी का शासन था, जो मजदुर वर्ग के नाम पर शासन चला रहा था |
- पोलिश यूनाइटेड वर्कर्स पार्टी उन साम्यवादी दलों में से एक था जो तब पूर्वी यूरोप के अनेक देशों पर शासन करते थे |
- इन साम्यवादी शासन वाले देशों में किसी अन्य राजनितिक दलों को राजनिति में भाग लेने की अनुमति नहीं थी |
- लोग साम्यवादी शासन या अधिकारीयों का चुनाव अपनी इच्छा से नहीं कर सकते थे |
- नेताओं या पार्टी या सरकार के खिलाफ आवाज़ उठाने वालों को जेल में डाल दिया जाता था |
- पोलैंड की सरकार को एक बड़े साम्यवादी देश, सोवियत संघ का समर्थन हासिल था और वही इस पर नियंत्रण भी करता था |
- जनरल जारुजेल्स्की ने आन्दोलनों और अपनी आलोचनाओं से घबराकर दिसंबर 1981 में मार्शल लॉ घोषित कर दिया |
पोलैंड में लोकतंत्र :
- लेनिन जहाज कारखाना के मजदूरों ने हड़ताल किया जिसका नेतृत्व बाद में लेक वलेशा ने किया जो एक पेशे से इलेक्ट्रिशियन था | बाद में वह पोलैंड का राष्ट्रपति चुना गया |
- पोलैंड में कानून के अनुसार हड़ताल की इजाज़त नहीं थी क्योंकि देश में शासक दल से अलग किसी स्वतंत्र मजदूर संघ की अनुमति नहीं थी |
- जब हड़ताल को समर्थन मिलना शुरू हो गया तो मजदूरों ने अन्य बड़ी मांगे शुरू कर दी जो निम्न थी - स्वतंत्र मजदूर संघ बनाने की मांग की, राजनैतिक बंदियों को रिहा किया जाए और प्रेस पर लगी सेंसरशिप हटाई जाए |
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