Chapter 9. राजा और विभिन्न वृतांत History Part-2 class 12 in Hindi Medium ncert book solutions अध्याय-समीक्षा
Chapter 9. राजा और विभिन्न वृतांत अध्याय-समीक्षा – Complete NCERT Book Solutions for Class 12 History Part-2 (Hindi Medium). Get all chapter explanations, extra questions, solved examples and additional practice questions for Chapter 9. राजा और विभिन्न वृतांत अध्याय-समीक्षा to help you master concepts and score higher.
Chapter 9. राजा और विभिन्न वृतांत History Part-2 class 12 in Hindi Medium ncert book solutions अध्याय-समीक्षा
NCERT Solutions for Class 12 History Part-2 play an important role in helping students understand the concepts of the chapter Chapter 9. राजा और विभिन्न वृतांत clearly. This chapter includes the topic अध्याय-समीक्षा, which is essential from both academic and examination point of view. The solutions provided here are prepared strictly according to the latest NCERT syllabus and follow the guidelines of CBSE to ensure accuracy and relevance. Each question is explained in a simple and student-friendly manner so that learners can grasp the concepts without confusion. These NCERT Solutions are useful for regular study, homework help, and exam preparation. All textbook questions are solved step by step to improve problem-solving skills and conceptual clarity. Students of Class 12 studying History Part-2 can use these solutions to revise important topics, understand difficult questions, and practise effectively before examinations. The chapter Chapter 9. राजा और विभिन्न वृतांत is explained in a structured way, making it easier for students to connect the theory with the topic अध्याय-समीक्षा. By studying these updated NCERT Solutions for Class 12 History Part-2, students can build a strong foundation, boost their confidence, and score better marks in school and board exams.
Chapter 9. राजा और विभिन्न वृतांत
अध्याय-समीक्षा
अध्याय-समीक्षा
- मुग़ल कोन थे - दो महान शासक वंशो के वंशज थे | माता कि ओर से वे चीन और मध्य एशिया के मंगोल शासक चंगेज खां ( जिनकी म्रत्यु 1227 इसवी में हुई ) के उतराधिकारी थे | पिता कि और से वे ईरान एव वर्तमान तुर्की के शासक तेमूर ( जिनकी म्रत्यु 1404 इसवी में हुई ) के वंशज थे | परन्तु मुगल अपने अपने आप को मुगल या मंगोल कहलवाना पसंद नि करते थे | ऐसा इस लिए था क्योकि चंगेज खां से जुडी स्मृतिया मुगलों के प्रतियोगियों उज्वेग से भी सम्बन्धित थी |दूसरी तरफ मुगल , तेमूर के वंशज होने पर गर्व का अनुभव करते थे | ऐसा इसलिए क्योकि उनके इस महान पूर्वज ने 1390 इसवी में डेल्ही पर कब्जा क्र लिया था |
- मुगलों ने अपनी वंशावली का प्रदर्शन चित्र बनवाकर किया | प्रत्येक मुगल शासक ने तेमूर के साथ अपना चित्र बनवाया | पहला मुगल शासक बाबर मातृपक्ष से चंगेज खां का सम्बन्धी था | वो तुर्की बोलता था और उसने मुगलों का उपहास करते हुए उन्हें बाबर गिरोह के रूप में उलेखित किया | 16 वी शताब्दी के दोरान यूरोपियो ने परिवार कि इस शाखा के भारतीय शासको का वर्णन करने के लिए मुगल शब्द का प्रयोग किया | यहाँ तक कि रडयार्ड किपलिंग कि ( जंगल बुक ) के युवा नायक मोगली का नाम में इससे व्युत्पन्न हुआ है |
-
बाबर 1526 इसवी - 1530 इसवी प्रथम मुगल शासक बाबर ( 1526 इसवी - 1530 इसवी ) ने जब 1494इसवी में फरगाना राज्य का उतराधिकारी प्राप्त किया तो उनकी उम्र केवल 12 वर्ष कि थी | मंगोलों कि दूसरी शाखा , उजबेगो के आक्रमण के कारण उसे अपनी पेत्रक गद्धी छोडनी पड़ी | अनेक वर्षो तक भटकने के बाद उसने 1540 इसवी में काबुल पर लिया | उसने 1526 इसवी में काबुल पर कब्जा कर लिया | उसने 1526 इसवी में दिल्ली के इब्राहीम लोदी को पानीपत में हराया और दिल्ली , आगरा , को अपने कब्जे में कर लिया | 1527 इसवी में खानुवा में राणा सांगा राजपूत राजाओ और उनके समर्थको को हराया | 1528 इसवी में चंदेरी में राजपूतो को हराया |
- हुमायूँ - हुमायूँ ने अपने पिता कि वसीयत के अनुसार जायदाद का बटवारा किया | प्रत्येक को एक प्रांत मिला | उसके भाई मिर्जा कामरान कि मह्त्व्कंशाओ के कारण अपने अफगान प्रतिद्वंदियो ने सामने फीका पड़ गया | शेर खान ने हुमायु को दो बार हराया , 1539 इसवी में चौसा में एव 1540 इसवी कन्नोज में | इन पराजयों ने हुमायूँ को ईरान कि ओर भागने को भागने को बाध्य किया | ईरान में हुमायु ने सफाविद शाह कि मदद ली | उसने 1555 इसवी में दिल्ली पर पुंज कब्जा कर लिया परन्तु उससे अगले वर्ष इस इमारत में दुर्घटना में उसकी म्रत्यु हो गयी |
- अकबर - 13 वर्ष कि अल्पायु में सम्राट बना | 1568 इसवी में सिसिदयो कि राजधानी चितोड़ और 1569 इसवी में रणथम्भोर पर कब्जा कर लिया | 1579 इसवी 1580 इसवी के बिच मिर्जा हाकिम के पक्ष में विद्रोह हुए | सफविदो को हराकर कंधार पर कब्जा किया और कश्मीर को भी जोड़ लिया | मिर्जा हाकिम कि म्रत्यु के पश्चात काबुल को भी अपने राज्य में मिला लिया | दक्कन के अभियानों कि शुरुआत हुई |
-
जहाँगीर - मेवाड़ के सिसोदिया शासक अमर सिंह ने मुगलों कि सेवा स्वीकार कि इसके बाद सिक्खों , अहमो और अहमदनगर के खिलाफ अभियान चलाये गये , जो पूर्णत सफल नही हुए | जहाँगीर के शासन के अंतिम वर्षो में राजकुमार खुर्म जो बाद में सम्राट शाहजहाँ कहलाया , ने विद्रोह किया |
- शाहजहाँ - अफगान अभिजात खान जहान लोदी ने विद्रोह किया और वह पराजित हुआ | अहमदनगर के विरुद्ध अभियान हुआ , जिसमे बुंदेलो कि हार हुई और ओरछा पर कब्जा कर लिया गया | उत्तर - पश्चिम में बल्ख पर करने के लिए उज्बेगो के विरुद्ध अभियान हुआ , जो असफल रहा | परिनाम्सव्रूप कांधार सफविदो के हाथ में चला गया |
इस पाठ के अन्य दुसरे विषय भी देखे :
1. अध्याय-समीक्षा 2. अभ्यास (NCERT Book) 3. अतिरिक्त प्रश्नोत्तर
Welcome to ATP Education
ATP Education