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Chapter 6. भक्ति सूफी परंपराएँ History Part-2 class 12 in Hindi Medium ncert book solutions अभ्यास (NCERT Book)

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Chapter 6. भक्ति सूफी परंपराएँ  History Part-2 class 12 in Hindi Medium ncert book solutions अभ्यास (NCERT Book)

Chapter 6. भक्ति सूफी परंपराएँ History Part-2 class 12 in Hindi Medium ncert book solutions अभ्यास (NCERT Book)

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Chapter 6. भक्ति सूफी परंपराएँ

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अभ्यास (NCERT Book)

Last Update On: 06 March 2026

 

                  भक्ति – सूफ़ी परम्पराएँ

प्रश्न – इतिहासकारों द्वारा धार्मिक परम्पराओं के इतिहासों के पुननिर्माण के लिए उपयोग किये गए विभिन्न स्त्रोतों का स्पष्ट कीजिये |

उत्तर - धार्मिक परम्पराओं के पुननिर्माण के लिए इतिहासकार विभिन्न स्त्रोतों का सहारा लेते है :

1. प्रथम सहस्त्राबदी के मध्य तक के प्रमुख स्त्रोत धार्मिक इमारतें है जिनमे स्तूप, विहार और मंदिर शामिल है | यह इमारतें किसी विशेष धार्मिक विश्वासों तथा आचरणों के प्रतीक है | इसके अतिरिक्त ऐसे धार्मिक विश्वास भी है जो साहित्यक तथा अन्य स्त्रोतों में धूमिल है |

2. 8वीं से 18वीं शताब्दी तक के नए साहित्यक स्त्रोतों में संत कवियों की रचनायें शामिल है | उन्होंने इन रचनाओं को अपने आपको जनसाधारण की क्षेत्रीय भाषाओँ में मौखिक रूप से व्यक्त किया था | इनमे से अधिकतर रचनाएँ संगीतबद्ध है |

3. इस काल की सबसे प्रभावी विशेषता संभवतः यह है कि साहित्य और मुर्तिकला दोनों में ही अनेक तरह की देवी –देवता दिखाई देते है |

4. इतिहासकारों के अनुसार यहाँ कम से कम दो प्रक्रियाएँ कार्यरत थी | यह प्रक्रियाएं ब्राहमणीय विचारधारा के प्रसार की थी | ये ग्रन्थ सरल संस्कृत छंदों में थे | इस काल की दूसरी प्रक्रिया थी – स्त्रियों, शूद्रों तथा अन्य सामाजिक वर्गों की आस्थाओं एवं आचरणों को ब्राहमणों द्वारा स्वीकृत किया जाना और उसे एक नया रूप प्रदान करना |

प्रश्न – प्रारंभिक भक्ति परम्परा की मुख्य विशेषताएँ बताइए |

उत्तर – 1. आराधना के तरीकों के क्रमिक विकास के दौरान संत कवि ऐसे नेता के रूप में उभरे जिनके इर्द –गिर्द भक्तजनों का मेला लगा रहता था | इन्ही के नेतृत्व में भक्ति आन्दोलन चला |

2. भक्ति परंपरा की एक अन्य विशेषता इसकी विविधता है |

3. धर्म के इतिहास भक्ति परम्परा को दो मुख्य वर्गों में बाँटते है : सगुन भक्ति और निर्गुण भक्ति | निर्गुण भक्ति परंपरा में अमूर्त अथवा निराकार इश्वर की उपासना की जाती थी |

4. यदपि कई भक्ति परम्पराओं में ब्राहमण देवताओं तथा भक्तजनों के बीच महत्वपूर्ण बिचौलिये बने रहे, तो भी इन परम्पराओं ने स्त्रीयों तथा “निम्न वर्णों” को स्वीकृति प्रदान की |

प्रश्न – अलवार और नयनार संत कौन थे ? उनकी गतिविधियों का संक्षिप्त वर्णन कीजिये |

उत्तर - अलवार और नयनार तमिलनाडु के बहती संत थे | प्रारंभिक भक्ति आन्दोलन उन्ही के नेतृत्व में चला | अलवार विष्णु तथा नयनार के शिव के भक्त थे | वे स्थान –स्थान पर भ्रमण करते हुए तमिल भाषा में अपने इष्ट की स्तुति में भजन गाते थे | अपनी यात्राओं के दौरान आलवारों और नय्नरों ने कुछ पवन स्थलों को अपने इष्ट का निवास -स्थल घोषित किया | साथ ही इन संतों की प्रतिमा की भी पूजा की जाती थी | इस प्रकार इस ग्रन्थ का महत्व संस्कृत के चरों वेदों के समान बताया गया |

प्रश्न- इस्लाम के पांच स्तंभ अथवा आधारभूत सिद्धांत कौन -से है ?

उत्तर – इस्लाम धर्म के पाँच स्तम्भ है जिनका पालन सभी मुसलमानों को करना चाहिए | ये स्तम्भ निम्नलिखित है –

1. उसे हर रोज पाँच बार प्रार्थना करनी अर्थात नमाज पढ़नी चाहिए |

2. उसे निर्धनों को दान देना चाहिए |

3. इस्लाम के माने वालों को रमजान के पवित्र महीने में व्रत अर्थात रोज़े रखने चाहिए |

4. उन्हें अपने जीवन -काल में कम -से -कम एक बार मक्का की यात्रा अवश्य करनी चाहिए |

5. प्रत्येक मुसलमानों को इस बात में विश्वास रखना चाहिए कि अल्लाह ही एकमात्र ईश्वर है | उसे कुरान को अल्लाह का आदेश मानना चाहिए |

प्रश्न – मस्जिद के स्थापत्य सम्बन्धी सार्वभौमिक तत्वों का उल्लेख कीजिये |

उत्तर – मस्जिद को इस्लामिक शैली का मूल – रूप माना गया है |

इसका मौलिक ढाँचा बहुत ही साधारण होता है |

इसमें एक खुला प्रांगन होता है जिसके चारों और स्तंभों वाली छते होती है |

प्रांगन के मध्य में नमाज से पहले स्नान के लिए एक तलाब भी होता है |

इसकी दाहिनी और एक मंच होता है जहाँ से इमाम प्रवचन देता है |

इसके पश्चिम में एक मेहराबों वाला हॉल होता है |
मस्जिद में मीनार भी होती है जहाँ से आजान दी जाती है |

जिस मस्जिद में मुसलमान जुम्मा की नमाज के लिए एकत्रित होते है, उसे ‘जामी मस्जिद’ कहा जाता है |

प्रश्न – सूफी सम्प्रदाए तथा भक्ति सम्प्रदाओं की विचारधारा में क्या समानताएं थी?

उत्तर – सूफी सम्प्रदायें तथा भक्ति आन्दोलन के स्थान अलग –अलग थे लेकिन दोनों के विचारों में अनेक समानताएं पाई जाती थी | इसका वर्णन इस प्रकार है –

(1) मानवतावाद – दोनों सम्प्रदाओं ने मानव को मुख्य रखा और उन्हें प्रेम से रहने का उपदेश दिया |

(2) एकेश्वरवाद – दोनों एक ही भगवान पर विश्वास रखते थे | सूफियों ने कहा भगवान एक है और हम उनकी संतान है |

(3) मनुष्य –मात्र से प्रेम – सूफी तथा भक्ति के संतों ने लोगों को कहा की मनुष्य मात्र से प्रेम करो | मानव से प्रेम ही इश्वर से प्रेम है |

(4) गुरु की महिमा – सूफी और भक्त के संतों ने गुरु की महिमा का बखान किया|

(5) सहनशीलता - सूफी और भक्त के संतों ने दोनों धर्मो को साथ मिलकर रहने का उपदेश दिया |

प्रश्न – आप ऐसा क्यों समझते है कि बाबा गुरु नानक देव जी की परम्पराएँ 21 शताब्दी में भी महत्वपूर्ण है ?

उत्तर – निम्नलिखित बातों को ध्यान में रखकर हम कह सकते है कि बाबा गुरु नानक देव जी की परम्पराएँ 21 शताब्दी में भी महत्वपूर्ण है –

(1) उनकी शिक्षाएँ आसान थी | यह आज भी व्यावहारिक है |

(2) उन्होंने जाति के आधार पर ऊँच –नीच का विरोध किया |

(3) उन्होंने मानव सेवा और आपसी प्रेम और भाईचारे को ही सबसे बड़ा धर्म बताया |

(4) उन्होंने धार्मिक अनुष्ठानों, यज्ञों तथा मूर्ति पूजा खंडन किया |

(5) उनके अनुसार भगवन एक है जो निराकार है | उसके साथ केवल ‘शब्द’ द्वारा ही संबंध जोड़ा जा सकता है |

प्रश्न – सूफी मत कि शिक्षाओं का वर्णन करो |

उत्तर – सूफी मत की निम्न शिक्षाएं है -

1. सूफी के संतों ने ईश्वर का प्रचार किया |

2. सूफी संत ने इस बात का प्रचार किया कि यदि ईश्वर से प्रेम चाहते हो तो मनुष्य से प्रेम करो |

3. सूफी कहते थे की मानव को उसका धर्म नहीं बल्कि उसका काम ऊँचा बनता है|

4. सूफी के अनुसार सभी धर्म एक सामान है क्योंकि सभी का अंतिम उदेश्य ईश्वर प्राप्ति है |

5. इस मत में शांति और अहिंसा को बहुत महत्व दिया गया है | वे ‘गुरु’ अथवा ‘पीर’ को सबसे महान बताते है |

प्रश्न – सूफी मत की चिश्ती सिलसिले से जुडी रीतियाँ बताइए |

उत्तर – (1) चिश्ती सिलसले की सूफी आध्यात्मिक संगीत की महफ़िल द्वारा ईश्वर की उपासना में विश्वास रखते थे |

(2) वे कव्वाली को बहुत महत्व देते थे | इस अवसर पर आशीर्वाद की कामना की जाती थी |

(3) उन्होंने खानकाह स्थापित किये |

(4) उन्होंने लंगर चलाये जिनमे सभी हरमों के लोग शामिल थे |

(5) उन्होंने शेख के आगे सिर झुकाना तथा लोगों को पानी पिलाना |

प्रश्न – इस्लाम दक्कन में स्थान पाने में कैसे सफल रहा ?

उत्तर – बीजापुर के के आसपास सूफी कविता की एक नयी विधा का विकास हुआ|

यह उर्दू में लिखी छोटी कवितायेँ थी | इसकी रचना चिश्ती शान्तों ने की थी | ये रचनाएँ स्त्रियों द्वारा घर का काम जैसे चक्की पिसते या चरखा कातते समय गयी जाती थी | कुछ रचनाएँ लोरिनमा और शादिनामा के रूप में लिखी गयी | संभव है कि इस क्षेत्र के सूफी यहाँ पहले से प्रचलित भक्ति परंपरा से प्रभावित हुए थे | इस माध्यम से इस्लाम दक्कन के गाँव में स्थान पाने में सफल रहा |

प्रश्न – श्री गुरु नानक देव जी तथा उनके संदेश का विशेष रूप से वर्णन करते हुए सिख धर्म के विकास का संक्षिप्त वर्णन कीजिये |

उत्तर - श्री गुरु नानक देव जी का जन्म पंजाब के ननकाना साहिब में हुआ | जो अब पाकिस्तान में है | उन्होंने गणित और हिंदी में शिक्षा प्राप्त की तथा फारसी तथा अरबी का भी ज्ञान प्राप्त किया | उनका विवाह छोटी आयु में ही हो गया था| वे अपना अधिकतर समय संतों के बीच बिताते थे | अपनी ज्ञान की प्राप्ति के बाद उन्होंने अपने ज्ञान को लोगों तक पहुचने के लिए भी दूर – दूर तक यात्राएँ भी की| उन्होंने लोगों को ईश्वर के नाम के जाप का संदेश दिया तथा मानवता के प्रेम पर बल दिया | इन परम्पराओं ने अनेक सिक्खों अर्थात शिष्यों को एकत्रता के सूत्र में बंधा |

प्रश्न – भारत में विभिन्न समुदायों के नामों का आधार क्या था ?

उत्तर – हम प्रायः हिन्दू तथा मुसलमानों जैसे शब्दों को धर्मिक समुदाय का निश्चित प्रतिक मान लेते है | परन्तु कई समयों तक इनका कोई प्रचलन नहीं था| इसके विपरीत लोगों का वर्गीकरण उनके जन्म स्थान के आदह्र पर किया जाता था | उदाहरन के लिए तुर्की मुसलमानों को तुरुष्क कहा गया | इस प्रकार तजाकिस्तान के लोगों को ताजिक तथा फारस के लोगों को पारसिक का नाम दिया गया |

     इन प्रवासी समुदाए के लिए एक अधिक सामान्य शब्द मलेच्छ था | यह नाम इस बात की ओर संकेत करता है कि वह वर्ण व्यवस्था के पालन नहीं करते थे और ऐसे भाषाएँ बोलते थे जो स्नास्कृत से नहीं निकली थी |

प्रश्न – मीराबाई पर एक टिप्पणी लिखिए |

उत्तर – मीराबाई को भक्ति लहर की सबसे प्रसिद्ध कवयित्री माना जाता है | उनकी जीवनी उनके द्वारा लिखे गए भजनों के आधार पर संकलित की गयी | यह भजन वर्षों तक मौखिक रूप से आगे बढ़ाते रहे | मीराबाई मारवाड़ के मेड़ता जिले की एक राजपूत राजकुमारी थी | उनका विवाह उनके मर्जी के खिलाफ जाकर मेवाड़ के सिसोदिया वंश में कार दिया गया | उन्होंने अपने पति की बात की परवाह न करते हुए पत्नी और माँ के परम्परागत दायित्वों को निभाने से मना कर दिया और विष्णु के अवतार कृष्ण को अपना पति मान लिया | उनके ससुराल वालों ने जहर देकर मारने का प्रयत्न किया | लेकिनुन्होने राजमहल को छोड़ दिया और वे गायिका बन गयी | उन्होंने अनेक भावना प्रधान गीतों की रचना की |

     मीरा ने जातिवाद समंज का भी उलंघन किया और राजमहल के एश्वर्य को छोड़कर विधवा के सफ़ेद वस्त्र अथवा सन्यासी वस्त्रों को अपना लिया | उनके द्वारा रचित पद आज भी लोगों द्वारा गए जाते है | ज्यादातर गुजरात और राजस्थान के गरीब लोगों द्वारा |

प्रश्न – कबीर जी के जन्म तथा गुरु के विषय में क्या विवाद है ?

उत्तर – कबीर के जन्म के विषय में आज भी यह विवाद है कि वह जन्म से हिन्दू था या मुसलमान | यह विवाद उनके संत्जिवानियों में उभर कर आती है ओ उनकी मृत्यु के 200 वर्ष बाद लिखी गयी | वैष्णव परम्परा के जीवनियो में कबीर को हिन्दू बताया गया है | परन्तु उनका पालन पोषण एक गरीब मुस्लमान परिवार में हुआ | कबीर के गुरु रामानंद थे | इतिहासकारों का यह माना है कि कबीर और रामानंद का समकालीन होना तब तक संभव नहीं लगता, जब तक की उन्हें लम्बी आयु न दे दी जाये अतः उनको जोड़ने वाली परम्पराएँ स्वीकार नहीं की जा सकती| कबीर ने कुछ अन्य शब्दों का प्रयोग भी किया, जैसे शब्द और शून्य |

ये योगी परम्परा से लिये गये | कुछ कवितायेँ जिक्र और इश्क के सूफी सिधान्तों के प्रयोग द्वरा ‘नाम सिमरन’ की हिन्दू परंपरा की अभिव्यक्ति करती है | 

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❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

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