Chapter 2. लेखन कला और शहरी जीवन History class 11 in Hindi Medium ncert book solutions अभ्यास NCERT
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Chapter 2. लेखन कला और शहरी जीवन
अभ्यास NCERT
अभ्यास:
संक्षेप में उत्तर: दीजिए
Q1. आप यह कैसे कह सकते हैं कि प्राक्रतिक उर्वरता तथा खाद्य उत्पादन के उच्च स्तर ही आरंभ में शहरीकरण के कारण थे?
उत्तर:
(i) यहाँ पूर्वोत्तर भाग में हरे-भरे, ऊँचे-नीचे मैदान हैं। यहाँ अच्छी फसल के लिए पर्याप्त वर्षा होती है। पशुपालन के लिए घास के विस्तृत क्षेत्र हैं।
(ii) इन क्षेत्रों में शहरों के लिए भरण-पोषण का साधन बन सकने की क्षमता थी। दजल-फरात नदियाँ उपजाऊ बारीक मिट्टी लाती थीं जिससे यहाँ पर्याप्त अनाज पैदा होता था।
Q2. आपके विचार से निम्नलिखित में से कौन-सी आवश्यक दशाएँ थीं जिनकी वजह से प्रारंभ में शहरीकरण हुआ था और निम्नलिखित में से कौन-कौन सी बातें शहरों के विकास के फलस्वरूप उत्पन्न हुईं?
(क) अत्यंत उत्पादक खेती,
(ख) जल-परिवहन,
(ग) धातु और पत्थर की कमी,
(घ) श्रम विभाजन,
(ड) मुद्राओं का प्रयोग,
(च) राजाओं की सैन्य-शक्ति जिसने श्रम को अनिवार्य बना दिया।
उत्तर:
(i) निम्नलिखित आवश्यक दशाएँ थीं जिनकी वजह से प्रारम्भ में शहरीकण हुआ था
(क) अत्यन्त उत्पादक खेती
(ख) जल-परिवहन
(घ) श्रम-विभाजन
(च) राजाओं की सैन्यशक्ति जिसने श्रम को अनिवार्य बना दिया
(ii) निम्नलिखित बातें शहरों के विकास के फलस्वरूप उत्पन्न हुईं
(ग) धातु और पत्थर की कमी
(ङ) मुद्राओं का प्रयोग
Q3. यह कहना क्यों सही होगा कि खानाबदोश पशुचारक निश्चित रूप से शहरी जीवन के लिए खतरा थे?
उत्तर:
खानाबदोश पशुचारक निश्चित रूप से शहरी जीवन के लिए खतरा थे,यह निम्नलिखित तथ्यों से स्पष्ट होता है
(i) मारी नगर के दक्षिण के मैदान के खानाबदोश पशुचारक या गड़रिये किसानों के लिए खाद्य का प्रबन्ध करते थे परन्तु कई बार दोनों के मध्य झगड़े हो जाते थे। गड़रिये कई बार भेड़-बकरियों को पानी पिलाने के लिए बोए गए खेतों से गुजर जाते थे जिससे किसान की फसल को हानि पहुँचती थी।
(ii) खानाबदोश गड़रिये कई बार किसानों के गाँवों पर हमला बोल देते थे। वे उनका एकत्र धन-धान्य लूट लेते थे।
(iii) पश्चिमी मरुस्थल से गर्मियों में खानाबदोश गड़रिये अपने साथ मेसोपोटामिया में बोए हुए खेतों में अपनी भेड़-बकरियाँ ले आते थे। ये समूह गड़रियों, फसल काटने वाले मजदूरों अथवा भाड़े के सैनिकों के रूप में आए और समृद्ध होकर यहीं बस गए तथा शासन शक्ति भी प्राप्त कर ली।
Q4. आप ऐसा क्यों सोचते हैं कि पुराने मंदिर बहुत कुछ घर जैसे ही होंगे?
उत्तर:
कुछ प्राचीन मन्दिर साधारण घरों से अलग किस्म के नहीं होते थे क्योंकि मन्दिर में किसी स्थानीय देवता का वास होता था। मन्दिरों की बाहरी दीवारें विशेष अन्तरालों के बाद भीतर और बाहर की ओर मुड़ी होती थीं। यही इन मन्दिरों की मुख्य विशेषता थी। सामान्य घरों की दीवारें ऐसी नहीं होती थीं
संक्षेप में निबंध लिखिए
Q5. शहरी जीवन शुरू होने के बाद कौन-कौन सी नयी संस्थाएँ अस्तित्व में आईं? आपके विचार से उनमें से कौन-सी संस्थाएँ राजा की पहल पर निर्भर थीं।
उत्तर:
शहरी जीवन शुरू होने के बाद निम्नलिखित संस्थाएँ अस्तित्व में आईं
- व्यापार
- विनिर्माण
- सेवाएँ
- श्रम-विभाजन
- खाद्य-पदार्थों का संग्रहण एवं वितरण
- मुद्रा-निर्माण
- लेखा-विभाग
- आयात-निर्यात
- परिवहन व्यवस्था
- लेखन प्रणाली
- साक्षरता
- मन्दिर
- युद्धबन्दी
- परिवार
- विवाह
- वास्तुकला
- पशुचारक
- कब्रिस्तान
इनमें से निम्नलिखित संस्थाएँ राजा के महल पर निर्भर थीं
- व्यापार
- सेवाएँ
- श्रम-विभाजन
- खाद्य-पदार्थों का संग्रहण एवं वितरण
- मुद्रा-निर्माण
- आयात-निर्यात
- युद्धबन्दी
- कब्रिस्तान
Q6. किन पुरानी कहानियों से हमें मेसोपोटामिया की सभ्यता की झलक मिलती है?
उत्तर: मेसोपोटामिया की सभ्यता की झलक देने वाली कुछ पुरानी कहानियाँ निम्नलिखित हैं
(i) ओल्ड टेस्टामेंट की कहानी : यूरोप के निवासियों के लिए मेसोपोटामिया अत्यन्त महत्त्वपूर्ण था। बाइबिल के प्रथम भाग ‘ओल्ड टेस्टामेंट’ की ‘बुक ऑफ जेनेसिस’ में ‘शिमार’ अर्थात् सुमेर का वर्णन किया गया है। उसके अनुसार वहाँ ईंटों से बने अनेक नगर हैं। यूरोप के यात्री और विद्वान् मेसोपोटामिया को किस प्रकार से अपने पूर्वजों की भूमि मानते थे और जब इस क्षेत्र में पुरातत्त्वीय खोज प्रारम्भ हुई तो ओल्ड टेस्टामेंट के शाब्दिक सत्य को प्रमाणित करने का प्रयास किया गया।
(ii) जलप्लावन की कहानी : बाइबिल के अनुसार यह जलप्लावन पृथ्वी पर सम्पूर्ण जीवन को नष्ट करने वाला था। किन्तु ईश्वर ने जलप्लावन के बाद भी जीवन को पृथ्वी पर सुरक्षित रखने के लिए ‘नोआ’ नामक एक मानव को चुना। नोआ ने एक बड़ी नाव बनाई और उसमें सभी जीव-जन्तुओं का एक-एक जोड़ा रख लिया और जब जलप्लावन हुआ तो शेष सब. कुछ नष्ट हो गया। नाव में रखे संभी जोड़े बच गए।
(iii) ‘गिल्गेमिश’ महाकाव्य की कहानी : ऐसी ही एक कहानी ‘गिल्गेमिश’ महाकाव्य के अन्त में मिलते हैं। इससे पता चलता है कि मेसोपोटामिया के लोगों को अपने नगरों पर बहुत गर्व था। ऐसा कहा जाता है कि ‘गिल्गेमिश ने एनमर्कर के कुछ समय बाद उरुक मगर पर शासन किया था। वह एक महान् योद्धा था जिसने दूर-दूर तक के प्रदेशों को अपने अधीन कर लिया था, लेकिन उसे उस समय गहरा झटका लगा जब उसका वीर मित्र अचानक, मर गया। इससे दु:खी होकर वह अमरत्व की खोज में निकल पड़ा। उसने सागरों-महासागरों को पार किया और दुनिया का चक्कर लगाया। मगर उसे अपने साहसिक कार्य में सफलता नहीं मिली। हारकर गिल्गेमिश अपने नगर उरुक लौट आया। वहाँ जब वह अपने को सन्तुष्ट करने के लिए शहर की प्राचीर के आसपास चहलकदमी कर रहा था तब उसकी दृष्टि उन शानदार ईंटों पर पड़ी जिनसे उसकी नींव डाली गई थी। वह भाव-विभोर हो उठा। इस प्रकार उरुक नगर की विशाल प्राचीर पर पहुँचकर उस महाकाव्य की लम्बी वीरतापूर्ण और साहसभरी कथा का अन्त हो गया।
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