Chapter-6. ऊत्तक Science class 9 in hindi Medium CBSE Notes
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6. ऊत्तक
जंतु ऊतक | जंतु उत्तक के प्रकार | एपिथेलियम ऊतक | एपिथेलियम ऊतक के गुण
जंतु ऊतक (Animal Tissues) :
जंतु कोशिकाओं से बने उतकों के समूह को जंतु ऊतक कहते है |
ये चार प्रकार के होते हैं |
(1) एपिथेलियम ऊतक
(2) संयोजी ऊतक
(3) पेशीय ऊतक
(4) तंत्रिका ऊतक
(1) एपिथेलियम ऊतक (Epithelium Tissues):
जंतु के शरीर को ढकने या बाह्य रक्षा प्रदान करने वाले ऊतक एपिथेलियम ऊतक कहलाता है | त्वचा, मुँह, आहारनली, रक्तवाहिनी नली का अस्तर, फेफड़ें की कुपिका, वृक्कीय नली आदि सभी एपिथेलियम ऊतक से बने होते हैं |
एपिथेलियम ऊतक का कार्य (Functions of Epithelium Tissues):
(i) ये शरीर के अन्दर स्थित बहुत से अंगों और गुहिकाओं (cavities) को ढकते हैं |
(ii) ये भिन्न-भिन्न प्रकार के शारीरिक तंत्रों को एक दुसरे से अलग करने के लिए अवरोध का निर्माण करते है |
(iii) ये अनवरत (continuous) परत का निर्माण करती है |
(iv) यह बाहरी वातावरण और शरीर के विभिन्न अंगो के बीच पदार्थों के आदान-प्रदान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं |
एपिथेलियम ऊतक के गुण (Features of Epithelium Tissues):
(i) एपिथेलियम ऊतक की कोशिकाएँ एक दुसरे से सटी होती हैं |
(ii) कोशिकाओं के बीच काम स्थान होता है |
(iii) शरीर में प्रवेश करने वाला या शरीर से बाहर निकलने वाला पदार्थ एपिथेलियम की किसी परत से होकर गुजरता है |
(iv) विभिन्न एपिथेलियम उतकों की संरचना भिन्न-भिन्न होती है |
एपिथेलियम उत्तक के प्रकार (Types of Epithelium Tissues):
(1) सरल शल्की एपिथेलियम (Simple Squamous Epithelium):
कोशिकाओं में रक्त नलिका अस्तर या कूपिका, जहाँ पदार्थों का संवहन वरणात्मक पारगम्य झिल्ली द्वारा होता है, वहाँ पर चपटी एपिथीलियमी उत्तक कोशिकाएँ होती हैं। इनको सरल शल्की एपिथीलियम कहते हैं।

गुण (Properties) :
(i) ये अत्यधिक पतली और चपटी होती हैं तथा कोमल अस्तर का निर्माण करती हैं।
(ii) आहारनली तथा मुँह का अस्तर शल्की एपिथीलियम से ढका होता है। शरीर का रक्षात्मक कवच अर्थात् त्वचा इन्हीं शल्की एपिथीलियम से बनी होती है।
(2) स्तरित शल्की एपिथेलियम (Stratified Squamous Epithelium) : त्वचा की एपिथीलियमी कोशिकाएँ इनको कटने तथा फटने से बचाने के लिए कई परतों में व्यवस्थित होती हैं। चूँकि ये कई परतों के पैटर्न में व्यवस्थित होती हैं इसलिए इन एपिथीलियम को स्तरित शल्की एपिथीलियम कहते हैं।

(3) स्तम्भाकार (पक्षमाभी) एपिथेलियम (Columnar Epithelium) : जहाँ अवशोषण और स्राव होता है, जैसे आँत के भीतरी अस्तर (lining) में, वहाँ लंबी एपिथीलियमी कोशिकाएँ मौजूद होती हैं। इस प्रकार के एपिथेलियम को पक्ष्माभी स्तंभाकार एपिथेलियम कहते है |

कार्य (Functions) :
(i) यह स्तंभाकार एपिथीलियम, एपिथीलियमी अवरोध् को पार करने में सहायता प्रदान करता है।
(ii) श्वास नली में, स्तंभाकार एपिथीलियमी ऊतक में पक्ष्माभ (Cilia) होते हैं, जो कि एपिथीलियमी उत्तक की कोशिकाओं की सतह पर बाल जैसी रचनाएँ होती हैं। ये पक्ष्माभ गति कर सकते हैं तथा इनकी गति श्लेष्मा को आगे स्थानांतरित करके साफ करने में सहायता करती हैं।
(4) घनाकार एपिथीलियम (Cuboidal Epithelium) : ये एपिथेलियम उतक घनाकार होती हैं |

कार्य (Functions) :
(i) घनाकार एपिथीलियम वृक्कीय नली तथा लार ग्रंथि की नली के अस्तर का निर्माण करता है, जहाँ यह उसे यांत्रिक सहारा प्रदान करता है।
(ii) ये एपिथीलियम कोशिकाएँ प्रायः ग्रंथि कोशिका के रूप में अतिरिक्त विशेषता अर्जित करती हैं, जो एपिथीलियमी उत्तक की सतह पर पदार्थों का स्राव कर सकती हैं।
ग्रंथिल एपिथीलियम (Grandular Epithelium) : कभी-कभी एपिथीलियमी ऊतक का कुछ भाग अंदर की ओर मुड़ा होता है तथा एक बहुकोशिक ग्रंथि का निर्माण करता है। यह ग्रंथिल एपिथीलियम कहलाता है।
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4. जंतु ऊतक | जंतु उत्तक के प्रकार | एपिथेलियम ऊतक | एपिथेलियम ऊतक के गुण
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