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Chapter-6. ऊत्तक Science class 9 in hindi Medium CBSE Notes

CBSE Class 9 Science Notes in Hindi Medium based on latest NCERT syllabus, covering definitions, diagrams, formulas, and exam-oriented explanations.

Chapter-6. ऊत्तक Science class 9 in hindi Medium CBSE Notes

6. ऊत्तक

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ऊतक परिभाषा | उत्तक के प्रकार | पादपों में उतकों के प्रकार | स्थायी ऊतक

Chapter-6. उत्तक

एक ही प्रकार की संरचना और कार्य करने वाले कोशिकाओं के समूह को उत्तक कहते हैं | 

मुख्य बिंदु: 

  • एक कोशिकीय जीवों में, सभी मौलिक कार्य एक ही कोशिका द्वारा किये जाते  हैं | उदाहरण के लिए अमीबा में एक ही कोशिका द्वारा गति, भोजन लेने की क्रिया, श्वसन क्रिया और उत्सर्जन क्रिया संपन्न की जाती है | 
  • बहुकोशिकीय जीवों में लाखों कोशिकाएँ होती हैं | इनमें से अधिकतर कोशिकाएँ कुछ ही कार्यों को संपन्न करने में सक्षम होती  हैं | इन जीवों में भिन्न-भिन्न कार्यों को करने के लिए भिन्न-भिन्न कोशिकाओं का समूह होता हैं | 
  • बहुकोशिकीय जीवों में श्रम विभाजन होता हैं | 
  • शरीर के अन्दर ऐसी कोशिकाएँ जो एक तरह के कार्यों को करने में दक्ष होती है, सदैव एक समूह में होती हैं |
  • एक ही संरचना वाले कोशिकाओं का वह समूह जो शरीर के किसी निश्चित स्थान विशिष्ट कार्य करते है उत्तक कहलाते हैं | 

मनुष्य में:

मांसपेशिय कोशिकाएँ: इसके संकुचन एवं प्रसार से शरीर  में गति होती है |

तंत्रिका कोशिकाएँ : यह संवेदनाओं को मस्तिष्क तक पहुँचाता है और मस्तिष्क से संदेशों को शरीर के एनी भागों तक लाता हैं |

रक्त कोशिकाएँ : यह ऑक्सीजन, भोजन, हारमोंस तथा अपशिष्ट पदार्थों का वहन करता हैं | 

पौधों में :

संवहन उतक भोजन एवं जल का चालन पौधे के एक भाग से दुसरे भाग तक करते हैं |

उत्तक (Tissue): एक ही प्रकार की संरचना और कार्य करने वाले कोशिकाओं के समूह को उत्तक कहते हैं | 

पादप उतक (Plant Tissues):

(i)  पौधे स्थिर होते हैं - वे गति नहीं करते हैं | क्योंकि ये अपना भोजन एक स्थान पर स्थिर रह के ही प्रकाशसंश्लेषण की क्रिया द्वारा प्राप्त कर लेते हैं | 

(ii) उनके अधिकांश उतक सहारा देने वाले होते है तथा पौधों को संरचनात्मक शक्ति प्रदान करते हैं | 

(iii) अधिकांश पादप ऊतक मृत होते हैं | ये मृत ऊतक जीवित उतकों के समान ही यांत्रिक शक्ति प्रदान करते हैं तथा उन्हें कम अनुरक्षण की आवश्यकता होती है |

(iv) पौधों में वृद्धि कुछ क्षेत्रों में ही सिमित रहती है | 

(v) पौधों में कुछ ऊतक जीवन भर विभाजित होते रहते हैं | ये ऊतक पौधों के कुछ निश्चित भाग में ही होते है | जो ऊतक के विभाजित होने के क्षमता पर आधारित होता है | विभिन्न प्रकार के पादप उतकों को वृद्धि या विभोज्योतक ऊतक और स्थायी ऊतक के रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है | 

जंतु ऊतक (Animal Tissues):

(i) दूसरी ओर जंतु भोजन, जोड़ी, और आवास की तलाश में चारों ओर धूमते हैं | 

(ii) पौधों के तुलना में जंतु अधिक ऊर्जा खर्च करते है | 

(iii) उतकों का अधिकांश भाग जीवित होता है | 

(iv) जंतुओं में कोशिकाओं की वृद्धि एकसमान होती है | इसलिए इनमें विभाज्य और अविभाज्य क्षेत्रों की कोई निश्चित सीमा नहीं होती है | 

पादपों में उतकों के प्रकार (Type of Plant Tissue):

(1) विभज्योतक ऊतक (MERISTEMATIC TISSUE) :

पौधों की वृद्धि केवल उनके कुछ निश्चित एवं  विशेष भागों में ही होता है | ऐसा विभाजित होने वाले उतकों के कारण ही होता है ऐसे विभाजित होने वाले ऊतक पौधों के वृद्धि वाले भागों में ही स्थित होते है | इस प्रकार के  ऊतक को विभज्योतक ऊतक कहते है |  

विभज्योतक ऊतक का वर्गीकरण (Classification of Meristematic Tissue):

(A) शीर्षस्थ विभज्योतक (Apical Meristem): शीर्षस्थ विभज्योतक पौधों के जड़ एवं तनों के वृद्धि वाले भाग में विद्यमान रहता है तथा यह उनकी लंबाई में वृद्धि करता है  |  

(B) पार्श्व विभज्योतक (Lateral Meristem): तने की परिधि या मूल में वृद्धि पार्श्व विभज्योतक के कारण होती है | 

(C) अंतर्विष्ट विभज्योतक (Intercalary meristem): यह पत्तियों के आधार में या टहनी के पर्व (internode) के दोनों ओर उपस्थित होते हैं | 

विभज्योतक ऊतक के गुण (Properties Of Meristematic Tissue):

(i) इस ऊतक की कोशिकाएँ अत्यधिक क्रियाशील होती हैं |

(ii) उनके पास बहुत अधिक कोशिका द्रव्य, पतली कोशिका भित्ति और स्पष्ट केन्द्रक होते हैं  | 

(iii) उनके पास रस्धानियाँ नहीं होती है | 

(2) स्थायी ऊतक (PERMANENT TISSUE):

विभज्योतक ऊतक वृद्धि कर आगे एक विशिष्ट कार्य करती हैं और विभाजित होने की शक्ति खो देती है जिसके फलस्वरूप वे स्थायी ऊतक का निर्माण करती हैं | 

विभज्योतक की कोशिकाएँ विभाजित होकर विभिन्न प्रकार के स्थायी उतकों का निर्माण करती हैं | 

परिभाषा: कोशिकाएँ जो विभेदित होकर विशिष्ट कार्य करती है और आगे विभाजित होने की शक्ति खो देती हैं इस प्रकार की ऊतक को स्थायी ऊतक कहते हैं | 

विभेदीकरण (Differentiation): उतकों द्वारा विशिष्ट कार्य करने के लिए स्थायी रूप और आकार लेने की क्रिया को विभेदीकरण कहते हैं | 

स्थायी ऊतक के प्रकार (Type of permanent tissue):

(A) सरल स्थायी ऊतक (Simple permanent tissue):

ये एक ही प्रकार के कोशिकाओं से बने होते हैं जो एक जैसे दिखाई देते हैं इस प्रकार के ऊतक को सरल स्थायी ऊतक कहते हैं | 

उदाहरण: पैरेंकाइमा, कोलेन्काईमा और स्केरेन्काइमा आदि | 

सरल स्थायी ऊतक के प्रकार (Type of simple permanent tissues):

(1) पैरेंकाइमा (Parenchyma): वे सरल स्थायी ऊतक जिसके कोशिकाओं की कुछ परतें आधारीय पैकिंग का निर्माण करती हैं | इन्हें पैरेंकाइमा ऊतक कहते हैं |

गुण (Features):

(i)  यह पतली कोशिका भित्ति वाली सरल कोशिकाओं का बना होता है | 

(ii) ये जीवित कोशिकाएँ होती है | 

(iii) ये प्राय: बंधन मुक्त होती हैं |

(iv) इस प्रकार के ऊतक की कोशिकाओं के माध्य काफी रिक्त स्थान पाया जाता है |

(v) यह ऊतक भोजन का भण्डारण करता है और पौधों को सहायता प्रदान करता है | 

(vi) जड़ एवं तनों की पैरेंकाइमा पोषक तत्व और जल का भी भण्डारण करती हैं | 

पैरेंकाइमा ऊतक के प्रकार : 

(i) क्लोरेन्काइमा (Chlorenchyma): कुछ अन्य पैरेंकाइमा जिनमें क्लोरोफिल पाया जाता है और ये प्रकाशसंश्लेषण की क्रिया करती हैं ऐसे पैरेंकाइमा को क्लोरेन्काइमा कहते हैं | 

(ii) एरेनकाईमा (Aerenchyma): जलीय पौधों में पैरेंकाइमा  की कोशिकाओं के मध्य हवा की बड़ी गुहिकाएँ (cavities) होती हैं, जो पौधों को तैरने के लिए उत्प्लावन बल (Buoyancy) प्रदान करती हैं | इस प्रकार के पैरेंकाइमा को एरेनकाईमा कहते हैं | 

(2) कोलेन्काईमा (Collenchyma): This यह एक अन्य प्रकार की सरल स्थायी ऊतक जिसके कारण पौधों में लचीलापन होता है | यह पौधों के विभिन्न भागों  जैसे- पत्ती एवं तना में बिना टूटे  हुए लचीलापन लाता है | ऐसे ऊतक को कोलेन्काइमा कहते है |  

गुण (Features):

(i) यह पौधों के पत्तीयों एवं तनों में लचीलापन लाता है | 

(ii) यह पौधों को यांत्रिक सहायता भी प्रदान करता है |

(iii) इस ऊतक की कोशिकाएँ जीवित, लंबी, और अनियमित ढंग से कोनों पर मोटी होती हैं |

(iv) कोशिकाओं के बीच कम स्थान होता है | 

हम इस ऊतक को एपिडर्मिस के नीचे पर्णवृत में पा सकते हैं | 

(3) स्केरेनकाईमा (sclerenchyma): यह एक अन्य प्रकार का सरल स्थाई ऊतक है  जो पौधों को कठोर एवं मजबूत बनाता है | इस प्रकार के सरल स्थायी ऊतक को स्केरेन्काइमा कहते है | उदाहरण: नारियल के छिलके |

ये ऊतक तने में, संवहन बण्डल के समीप, पत्तों की शिराओं में तथा बीजों और फलों के कठोर छिलके में उपस्थित होता है | 

गुण (Features):

(i) इस ऊतक की कोशिकाएँ मृत होती हैं | 

(ii) ये लंबी एवं पतली होती है क्योंकि इस  ऊतक की भीति लिग्निन के कारण मोटी होती है | 

(iii) ये भित्तियाँ प्राय: इतनी मोटी होती हैं कि कोशिका के भीतर कोई आंतरिक स्थान नहीं होता है | 

(iv) यह पौधों के भागों को मजबूती प्रदान करता है | 

लिग्निन (Lignin):  लिग्निन कोशिकाओं को दृढ बनाने के लिए सीमेंट का कार्य करने वाला एक रासायनिक पदार्थ है | 

पैरेंकाइमा, कोलेन्काईमा और स्क्लेरेन्काइमा के बीच अंतर: 

Differentiation among Parenchyma, collenchymas and Sclerenchyma:

 

           पैरेंकाइमा

         कोलेन्काईमा

          स्क्लेरेन्काइमा

  1. ये जीवित कोशिकाएँ होती हैं |
  2. कोशिका भित्ति पतली होती हैं | 
  3. इनकी कोशिकाओं के बीच काफी रिक्त स्थान होता है | 
  4. यह ऊतक भोजन का भण्डारण करता है और पौधों को सहायता प्रदान करता है | 
  1. ये जीवित कोशिकाएँ होती हैं |
  2. कोशिका भित्ति मोटी होती है |
  3. अंतरकोशिकीय अवकाश उपस्थित होती है | 
  4. यह पौधों यांत्रिक सहायता प्रदान करता है | 
  1. ये मृत कोशिकाएँ होती हैं |
  2. कोशिका भित्ति मोटी होती है |
  3. अंतरकोशिकीय अवकाश अनुपस्थित होती है | 
  4. यह पौधों के भागों को मजबूती प्रदान करता है | 

 

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