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Chapter-Chapter 3. नियोजित विकास की राजनीति Political Science-II class 12 in hindi Medium CBSE Notes

CBSE Class 12 Political Science-II Notes in Hindi Medium based on latest NCERT syllabus, covering definitions, diagrams, formulas, and exam-oriented explanations.

Chapter-Chapter 3. नियोजित विकास की राजनीति Political Science-II class 12 in hindi Medium CBSE Notes

Chapter 3. नियोजित विकास की राजनीति

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विकास के मॉडल

दूसरी पंचवर्षीय योजना की विशेषताएँ : 

(i) दूसरी पंचवर्षीय योजना में भरी उद्योगों के विकास पर जोर दिया गया | 

(ii) सरकार ने देशी उद्योगों को संरक्षण देने के लिए भारी आयत शुल्क लगा दिया |

(iii) इस योजना से निजी और सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योगों को आगे बढ़ने में मदद मिली |

(iv) बिजली, रेलवे, इस्पात, मशीनरी और संचार जैसे उद्योगों सार्वजानिक क्षेत्र में विकसित किया गया | 

पंचवर्षीय योजनाओं के साथ समस्याएँ/कठिनाइयाँ :

(i) भारत प्रौध्योगोकी का लिहाज से पिछड़ा होना |

(ii) विश्व बाजार से पौद्योगिकी खरीदने में बहुमूल्य विदेशी मुद्रा का खर्च होना |

(iii) उद्योगों का कृषि की अपेक्षा निवेश को ज्यादा आकर्षित करना जिससे खाद्यान्न संकट का खतरा|

(iv) उद्योग और कृषि के बीच संतुलन |

केरल मॉडल : केरल में विकास और नियोजन के लिए जो रास्ता चुना गया उसे केरल मॉडल कहते हैं | इस मॉडल में शिक्षा, स्वास्थ्य, भूमि-सुधार, कारगर खाध्य वितरण और गरीबी उन्मूलन पर जोर दिया गया | केरल में प्रतिव्यक्ति आय अपेक्षाकृत कम है और यहाँ औद्योगिक-आधार भी तुलनात्मक रूप से कमजोर रहा है | इसके बावजूद केरल में साक्षरता शत-प्रतिशत है | 

विकास के पूंजीवादी मॉडल : पूंजीवादी मॉडल में विकास का काम पूर्णतया निजी क्षेत्रों के भरोसे होता है और सभी योजनाएँ लाभ के उदेश्य से बनाई जाती है | 

समाजवादी मॉडल : समाजवादी मॉडल वह मॉडल है उत्पादन के सभी क्षेत्रों पर राज्य का नियत्रण होता है और इसमें निजी सम्पति को ख़त्म कर दिया जाता है | इसमें योजनायें जन-कल्याण के उदेश्य से बनायें जाते हैं | 

मिश्रित अर्थव्यवस्था : चूँकि भारत ने विकास के दोनों मॉडलों को मिले-जुले रूप को अपनाया इसी कारण भारत को मिश्रित-अर्थव्यवस्था कहा जाता है | 

पूंजीवादी मॉडल और समाजवादी मॉडल में अंतर : 

पूंजीवादी मॉडल  समाजवादी मॉडल 

(1) इसमें उत्पादन इकाइयाँ निजी हाथों में होती है |  

(1) इसमें उत्पादन इकाइयाँ राज्य के हाथों में होती हैं | 

(2) इसमें योजनाएँ लाभ के उदेश्य से बनाए जाते हैं |

(2) इसमें योजनाएँ लोक-कल्याण के उदेश्य से बनाए जाते है | 

(3) इसमें निजी सम्पति को ख़त्म नहीं किया जाता है | 

(3) इसमें निजी सम्पति को ख़त्म कर दिया जाता है | 

विकास के शुरूआती रणनीतियों को लेकर विवाद : 

शुरूआती दौर में विकास की जो रणनीतियाँ अपनाई गई उन पर बड़े सवाल उठे और इसके पीछे विवाद का मुख्य कारन निम्नलिखित था | 

(i) भारत जैसे पिछड़ी अर्थव्यवस्था में कृषि और उद्योग के बीच किसमें ज्यादा संसाधन लगाए जाये | 

(ii) दूसरी पंचवर्षीय योजना में कृषि योजनाओं का आभाव था और इस योजना के दौरान उद्योगों पर जोर देने के कारण खेती और ग्रामीण इलाकों को चोट पहुंची |

(iii) जे. सी. कुमारप्पा जैसे गाँधीवादी अर्थशास्त्रियों ने एक वैकल्पिक योजना का खाका प्रस्तुत किया था जिसमें ग्रामीण औद्योगीकरण पर ज्यदा जोर था |

(iv) चौधरी चरण सिंह ने भारतीय अर्थव्यवस्था के नियोजन में कृषि को केंद्र में रखने के लिए दमदार ढंग से बात उठाई |

(v) कई अन्य लोगों का मानना था कि औद्योगिक उत्पादन की वृद्धि दर को तेज किए बगैर गरीबी के मकडजाल से छुटकारा नहीं मिल सकता है | 

 

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