ATP Logo Welcome to ATP Education
Advertisement
Advertisement

Chapter-Chapter 4. विचारक, विश्वास और इमारतें History Part-1 class 12 in hindi Medium CBSE Notes

CBSE Class 12 History Part-1 Notes in Hindi Medium based on latest NCERT syllabus, covering definitions, diagrams, formulas, and exam-oriented explanations.

Chapter-Chapter 4. विचारक, विश्वास और इमारतें History Part-1 class 12 in hindi Medium CBSE Notes

Chapter 4. विचारक, विश्वास और इमारतें

Page 3 of 4

जैन धर्म और उसका विकास

तीर्थकर : जैन के मूल सिद्धांत वर्धमान महावीर के जन्म से पहले ही उत्तर भारत में प्रचलित थे। जैन परंपरा के अनुसार महावीर से पहले 23 शिक्षक हो चुके थे, उन्हें तीर्थंकर कहा जाता है |

जैन साधू तथा साध्वियों द्वारा पालन किया जाने वाला व्रत : 

ये व्रत पांच थे - 

(i) हत्या न करना 

(ii) चोरी न करना 

(iii) झूठ न बोलना 

(iv) धन इक्कठा न करना 

(v) ब्रह्मचर्य का पालन करना 

जैन दर्शन की सबसे महत्वपूर्ण अवधरणा : 

(i) अहिंसा : संपूर्ण विश्व प्राणवान है। यह माना जाता है कि पत्थर, चट्टान और जल में भी जीवन होता है। जीवों के प्रति अहिंसा - खासकर इंसानों, जानवरों, पेड़-पौधों और कीड़े-मकोड़ों को न मारना जैन दर्शन का केंद्र बिंदु है। वस्तुतः जैन अहिंसा के सिद्धांत ने संपूर्ण भारतीय चिंतन परम्परा को प्रभावित किया है।
(ii) संन्यास : जैन मान्यता के अनुसार जन्म और पुनर्जन्म का चक्र कर्म के द्वारा निर्धारित होता है। कर्म के चक्र से मुक्ति के लिए त्याग और तपस्या की जरूरत होती है। यह संसार के त्याग से ही संभव हो पाता है। इसीलिए
मुक्ति के लिए विहारों में निवास करना एक अनिवार्य नियम बन गया।

वर्धमान महावीर : महावीर अपने युग के एक महान चिंतक थे और वे जैन धर्म के 24 वें तीर्थकर थे | वह एक क्षत्रिय राजकुमार थे | उनका सबंध वज्जि संघ के लिच्छवी कुल से था | 30 वर्ष की आयु में वे घर-बार छोड़कर जंगल में रहने लगे | जहाँ उन्हें 13 वर्ष तपस्या के बाद ज्ञान प्राप्त हुआ |

जैन धर्म की शिक्षाएँ : 

(i) जैन धर्म का सबसे महत्वपूर्ण शिक्षा यह है कि पत्थर, चट्टान और जल में भी जीवन होता है। जीवों के प्रति अहिंसा - खासकर इंसानों, जानवरों, पेड़-पौधों और कीड़े-मकोड़ों को नही मारना चाहिए |

(ii)  जन्म और पुनर्जन्म का चक्र कर्म के द्वारा निर्धारित होता है। कर्म के चक्र से मुक्ति के लिए त्याग और तपस्या की जरूरत होती है। यह संसार के त्याग से ही संभव हो पाता है।

(iii) मुक्ति के लिए संसार को त्यागकर विहारों में निवास करना चाहिए |

(iv) इसके साथ इन पांच व्रतों का पालन करना चाहिए - जैसे हत्या न करना, चोरी न करना, झूठ न बोलना, धन इक्कठा न करना और ब्रह्मचर्य का पालन करना आदि | 

 

Page 3 of 4

Quick Access: | NCERT Solutions |

Quick Access: | CBSE Notes |

Quick link for study materials

×

Search ATP Education

क्या आप इस वेबसाइट पर कुछ खोज रहे हैं? अपना keyword लिखें और हम आपको सीधे आपके target page तक GOOGLE SEARCH के द्वारा पहुँचा देंगे।