Chapter-Chapter 7. रोजगार-संवृद्धि, अनौपचारीकरण एवं अन्य मुद्दे Economics-II class 12 in hindi Medium CBSE Notes
CBSE Class 12 Economics-II Notes in Hindi Medium based on latest NCERT syllabus, covering definitions, diagrams, formulas, and exam-oriented explanations.
Chapter 7. रोजगार-संवृद्धि, अनौपचारीकरण एवं अन्य मुद्दे
बेरोजगारी
अध्याय 7.
बेरोजगार : जब कोई सक्षम व्यक्ति प्रचलित मजदूरी दर पर कार्य करने को इच्छुक हो, परन्तु उसे काम नहीं मिलता हो तो उस व्यक्ति को बेरोजगार कहते हैं |
बेरोजगारी : जब किसी सक्षम व्यक्तियों को जो काम करने के इच्छुक है और उन्हें प्रचलित मजदूरी दर पर भी काम नहीं मिल रहा हो तो ऐसी अवस्था को बेरोजगारी कहते हैं |
बेरोजगारी एक अवस्था है जब ये बहुत से लोगों के लिए बनी रहती है तो कहते है कि बेरोजगारी है |
बेरोजगारी के प्रकार :
(1) ग्रामीण बेरोजगारी
(A) अदृश्य या प्रछन्न बेरोजगारी
(B) मौसमी बेरोजगारी
(2) शहरी बेरोजगारी
(A) औद्योगिक बेरोजगारी
(B) शिक्षित बेरोजगारी
(1) ग्रामीण बेरोजगारी :
(A) अदृश्य या प्रछन्न बेरोजगारी : यह वह अवस्था जब किसी काम पर आवश्यकता से अधिक श्रमिक लगे होते है | यदि कुछ श्रमिकों को हटा लिया जाये तो कुल उत्पादन में कोई कमी नहीं होती है | इन श्रमिकों की सीमांत उत्पादकता शून्य या नगण्य होती है |
इस प्रकार की बेरोजगारी कृषि क्षेत्र में पाई जाती है |
अदृष्ट बेरोजगारी के कारण :
(i) कृषि पर आश्रित श्रमिकों की बड़ी संख्या |
(ii) गांवों में कृषि के अलावा अन्य वैकल्पिक रोजगारों की आभाव |
(iii) व्यावसायिक कृषि के बजाय जीवन निर्वाह कृषि का होना |
(B) मौसमी बेरोजगारी : यह बेरोजगारी ग्रामीण भारत में पाई जाती है | इसमें श्रमिक वर्ष के कुछ ही महीने काम पाता है और वर्ष के शेष महीने बेरोजगार रहता है | इस प्रकार की बेरोजगारी कृषि क्षेत्र में लगे लोगों में पाई जाती है | इसके अलावा अन्य मौसमी कार्य करने वाले शादियों में कार्य करने वाले पुरोहित एवं नाई, शादियों में काम करने वाले, बैंड बजाने वाले, ईंट भट्ठे वाले, गन्ना पिराई वाले |
मौसमी बेरोजगारी के कारण :
(i) बहुत से लोगों का काम मौसमी होता है और पुस्तैनी होता है जिन्हें वे छोड़ना नहीं चाहते है |
(ii) वैकल्पिक रोजगार का आभाव |
(iii) ऐसे लोगों को अन्य दूसरा काम करने का अनुभव नहीं है |
(2) शहरी बेरोजगारी
(A) औद्योगिक बेरोजगारी : इस श्रेणी में उन निरक्षर व्यक्तियों को शामिल किया जा सकता है जो उद्योगों, खनिज, यातायात, व्यापार तथा निर्माण आदि व्यवसायों में काम करने के इच्छुक हैं | औद्योगिक बेरोजगारी जनसँख्या में वृद्धि के साथ बढती जाती है |
(B) शिक्षित बेरोजगारी : ऐसी बेरोजगारी में कोई शिक्षित व्यक्ति अन्य श्रमिकों से अधिक कार्यकुशलता होते हुए भी उनकों अपनी योग्यतानुसार काम नहीं मिलता है और वे बेरोजगारी से ग्रसित रहते हैं |
भारत में शिक्षित बेरोजगारी के प्रमुख कारण :
(i) देश में सामान्य शिक्षा का तीव्र प्रसार |
(ii) दोषपूर्ण शिक्षा पद्धति जो कि रोजगार-उन्मुख नहीं हैं |
(iii) रोजगार अवसरों का अपर्याप्त सृजन
भारत में बेरोजगारी का कारण :
1. भारतीय अर्थव्यवस्था का धीमा विकास |
2. जनसंख्या में अत्यधिक वृद्धि |
3. भूमि पर जनसंख्या का बढ़ता दबाव |
4. दोषपूर्ण शिक्षा प्रणाली |
5. कुटीर और लघु उद्योगों का पतन |
6. रोजगार रहित संवृद्धि |
बेरोजगारी दूर करने के उपाय :
1. मौजूदा शिक्षा प्रणाली में सुधार के साथ-साथ कौशल विकाश के लिए जोर |
2. जनसंख्या वृद्धि पर नियंत्रण |
3. कुटीर और लघु उद्योग (द्वितीयक क्षेत्रक) को बढ़ावा |
4. आधारित संरचना का विकास इससे रोजगार के अवसर उत्पन्न होते हैं |
5. स्वरोजगार को बढ़ावा देना ताकि अधिक से अधिक शिक्षित बेरोजगार अपनी योग्यतानुसार स्वरोजगार कर सके |
6. रोजगार के कार्यक्रमों चलाने वाले अथवा अवसरों को उत्पन्न करने वाले सहकारी समितियों को सरकारी अनुरक्षण प्रदान करना |
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