Chapter-Chapter 7. रोजगार-संवृद्धि, अनौपचारीकरण एवं अन्य मुद्दे Economics-II class 12 in hindi Medium CBSE Notes
CBSE Class 12 Economics-II Notes in Hindi Medium based on latest NCERT syllabus, covering definitions, diagrams, formulas, and exam-oriented explanations.
Chapter 7. रोजगार-संवृद्धि, अनौपचारीकरण एवं अन्य मुद्दे
भारत में कार्यबल का वितरण
अध्याय 10. रोजगार-संवृद्धि, अनौपचारिकरण एवं अन्य मुद्दे
भारत में कार्यबल का वितरण :
(1) ग्रामीण कार्यबल : भारतीय अर्थव्यवस्था में कुल कार्यबल का 70% ग्रामीण क्षेत्र में पाया जाता है | ग्रामीण कार्यबल में लगभग 70% पुरुष और 30 % महिलाएं शामिल है |
(2) शहरी कार्य बल : शहरी क्षेत्र में कुल भारत का 30% ही कार्यबल है जिसमें 80 % पुरुष और 20 % महिलाएं हैं |
भारतीय अर्थव्यवस्था में अधिकांश कार्यबल ग्रामीण आधारित है |
अधिकांश कार्यबल ग्रामीण आधारित होने के कारण :
(i) अधिकांश नौकरियां ग्रामीण क्षेत्रों में ही पायी जाती है |
(ii) अधिकांश सकल घरेलु उत्पाद (GDP) ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर आधारित है |
(iii) चूँकि भारत कृषि प्रधान देश है जिसके 70% आबादी ग्रामीण इलाकों में बसती है |
महिला श्रमिकों की संख्या कम होने के कारण :
(i) महिलाओं में शिक्षा का प्रसार का कम होना, जिससे नौकरी के अवसर बहुत कम मिलते हैं |
(ii) शहरी परिवारों में महिलाओं के नौकरी करने का निर्णय उनका परिवार करता है | वे स्वयं निर्णय नहीं ले पाती हैं |
(iii) अधिकतर महिलाओं को घरेलु कार्यों तक ही सिमित रखा जाता है |
(iv) ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएं जरुरत पड़ने पर ही कार्य करती है अथवा परिवार की जिविका चलाने के लिए कम मजदूरी पर ही कार्य करती हैं |
(v) स्त्रियों को घर से बाहर काम करने पर सामाजिक रूप से वर्जित है |
सहभागिता की दर :
यह उत्पादन क्रिया में वास्तव में भाग लेने वाली जनसँख्या का प्रतिशत है जो कार्य में लगे कुल कार्यबल और देश की कुल जनसंख्या के बीच अनुपात से प्राप्त होता है |

रोजगारहीन संवृद्धि (Jobless Growth) : रोजगारहीन संवृद्धि वह स्थित है जिसके अंतर्गत अर्थव्यवस्था में उत्पादन का स्तर तो बढ़ता है परन्तु रोजगार के अवसरों में उस अनुपात में वृद्धि नहीं होती है | आर्थिक संवृद्धि होने के साथ-साथ बेरोजगारी बनी रहती है | ऐसी स्थिति को रोजगारहीन संवृद्धि कहते हैं |
उत्पादन के स्तर में वृद्धि करने के तरीके :
(i) अधिक से अधिक रोजगार के अवसर उत्पन्न करके |
(ii) बेहतर प्रौद्योगिकी अपनाकर |
आर्थिक संवृद्धि के तत्व :
(i) आर्थिक संवृद्धि तब मानी जाती है जब देश में वस्तुओं एवं सेवाओं के प्रवाह में वृद्धि हो |
(ii) उत्पादन स्तर में वृद्धि |
(iii) जीवन की गुणवता में सुधार |
(iv) वस्तु एवं सेवाओं के उपभोग में वृद्धि |
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