Chapter-Chapter 4. निर्धनता Economics-II class 12 in hindi Medium CBSE Notes
CBSE Class 12 Economics-II Notes in Hindi Medium based on latest NCERT syllabus, covering definitions, diagrams, formulas, and exam-oriented explanations.
Chapter 4. निर्धनता
निर्धनता परिचय और कारण
निर्धनता : निर्धनता एक अवस्था है जिसमें कोई व्यक्ति अपनी आय से मुलभुत आवश्यकताओं को भी पूरा नहीं कर सके |
निर्धनता के लक्षण :
(i) इनके पास परिसम्पतियाँ बहुत कम होती है | किसी किसी के पास तो रहने के लिए घर भी नहीं होते
(ii) भूमि भी नहीं होती और यदि होती भी है तो वह सुखी और बंजर होती है |
(iii) इनके पास जीविका के साधन नहीं होते हैं |
(iv) निर्धन परिवारों में भूख और भुखमरी होती है |
(v) निर्धन परिवारों में शिक्षा स्तर बहुत हु निम्न होता है |
ग्रामीण निर्धन:
(i) ग्रामीण निर्धन प्राय: भूमिहीन श्रमिक होते हैं या बहुत ही छोटे जोतों के स्वामी होते हैं |
(ii) ये भूमिहीन मजदूर भी हो सकते है जो अपनी आय से अपनी मुलभुत आवश्यकताओं जैसे रोटी, कपड़ा, मकान और स्वास्थ्य आदि को पूरा नहीं कर पाते है |
(iii) बहुत से ग्रामीण निर्धन गैर-कृषि कार्य करते है |
शहरी निर्धन:
(i) शहरों में अधिकांश निर्धन वही हैं जो गांवों से वैकल्पिक रोजगार और निर्वाह की तलाश में शहर चले आए हैं |
(ii) ये लोग तरह-तरह के अनियमित काम करते हैं |
(iii) ये शहरों में स्वनियोजित व्यवसाय करते हैं, सडकों के किनारे, गलियों में घूम-घूम कर थोडा सा कोई समान लेकर बेचते हैं |
निर्धनता रेखा:
निर्धन व्यक्तियों की पहचान के लिए सरकार निर्धन और गैर-निर्धन के बीच एक सीमा तय करती है, वर्त्तमान में यह सीमा गांवों में 816 रुपया प्रतिव्यक्ति प्रतिमाह और शहरों में 1000 रुपया प्रतिव्यक्ति प्रतिमाह है यदि कोई इस सीमा से कम कमाता है तो वह निर्धन है | इसी सीमा को निर्धनता रेखा कहते है |
मासिक प्रतिव्यक्ति उपभोग व्यय (MPCE) : यह भारत में निर्धनता तय करने की एक विधि है | हमारी सरकार निर्धन परिवारों की पहचान के लिए मासिक प्रतिव्यक्ति उपभोग व्यय (MPCE) को परिवार की आय के रूप द्योतक के रूप में मानती है |
मासिक प्रतिव्यक्ति उपभोग व्यय (MPCE) की कमियाँ :
क्या मासिक प्रतिव्यक्ति उपभोग व्यय (MPCE) निर्धनता तय करने का उपयुक्त मानदंड है ?
(i) यह सभी निर्धनों को एक वर्ग में मान लेता है |
(ii) या विधि भी मुख्यत: भोजन और कुछ चुनी हुई वस्तुओं पर व्यय को आय का प्रतिक मानती है |
(iii) यह यह नहीं बता पाता कि सबसे अधिक सहायता की आवश्यकता किस निर्धन व्यक्ति को है |
(iv) यह विधि सामाजिक कारणों जैसे बुनियादी शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, पेय जल और स्वच्छता आदि पर ध्यान नहीं देता है |
निर्धनता का वर्गीकरण:
निर्धनता के कई प्रकार है और कई तरीकों से निर्धनता को वर्गीकृत किया गया है | जैसे -
(i) सापेक्ष निर्धनता: जब हम अपनी निर्धनता का माप किसी अन्य के मुकाबले तुलना कर करते है तो ऐसी निर्धनता को सापेक्ष निर्धन कहते है | जैसे मैं मोहन से निर्धन हूँ | बांग्लादेश भारत से अधिक निर्धन देश है |
(ii) निरपेक्ष निर्धनता: जब कोई वास्तव में निर्धन होता है वह वास्तव में तय निर्धनता रेखा से नीचे है तो ऐसे निर्धनता को निरपेक्ष निर्धनता कहलाता है |
एक अन्य निर्धनता का वर्गीकरण है :
(i) चिरकालिक निर्धनता: ऐसा निर्धन जो बहुत समय से निर्धन है निरंतर निर्धन और गैर निर्धन के बीच झूलता रहता है चिरकालिक निर्धनता कहलाता है |
(ii) अल्पकालिक निर्धनता: वह व्यक्ति जो कभी धनी की श्रेणी में हुआ करता था परन्तु अब उसका भाग्य साथ नहीं देता और वह निर्धन की श्रेणी में आ गया है ऐसी निर्धनता को अल्पकालिक निर्धनता कहते है |
जीविकापार्जन के आधार पर सामाजिक विभाजन :
जीविकापार्जन के आधार पर यदि हम अपने समाज को विभाजित करे तो यह दो भागों में बाँटा जा सकता है |
(i) उत्पादक संसाधनों के स्वामी : वे जो उत्पादक संसाधनों के स्वामी है और बहुत अच्छी आय कमाते है |
(ii) श्रमिक : वे जो जीवित रहने के लिङङङए उनके पास केवल अपना श्रम है |
भारत में निर्धनता का कारण:
(क) निम्न पूँजी निर्माण
(ख) आधारित संरचनाओं का आभाव
(ग) माँग का आभाव
(घ) जनसंख्या दबाव या जनसंख्या विस्फोट
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