Chapter-Chapter 2. भारतीय अर्थव्यवस्था 1950 - 1990 Economics-II class 12 in hindi Medium CBSE Notes
CBSE Class 12 Economics-II Notes in Hindi Medium based on latest NCERT syllabus, covering definitions, diagrams, formulas, and exam-oriented explanations.
Chapter 2. भारतीय अर्थव्यवस्था 1950 - 1990
भारत का विदेशी व्यपार
भारत का विदेशी व्यापार
विदेशी व्यापार की रचना - व्यापार की रचना से अभिप्राय आयात और निर्यात की मदों से है | सरल शब्दों में व्यापार की रचना का अर्थ है की किस - किस प्रकार की वस्तुओं का आयात और निर्यात किया जा रहा है |
भारतीय विदेशी व्यापार की रचना की प्रमुख विशेषताएं -
- कृषि निर्यातों में गिरावट : भारत के कुल निर्यातों में कृषि उत्पादित वस्तुओं के प्रतिशत भाग में काफी कमी आई है | इसका मुख्य कारण घरेलु उद्योगों द्वारा कृषि वस्तुओं का कच्चे माल के रूप में करना है |
- परंपरागत मदों के निर्यात में प्रतिशत गिरावट : भारत के निर्यातों में जूट, चाय, आनाज जैसे परंपरागत मदे शामिल है | परन्तु समय के साथ इनकी घरेलु मांग बढ़ने के कारण कुल निर्यातों में इनका भाग घटने लगा |
- निर्मित वस्तुओं के प्रतिशत भाग में वृद्धि : जैसे-जैसे भारत में उद्योगों की संख्या में वृद्धि हुई वैसे-वैसे कुल निर्यातों में विनिर्मित वस्तुओ के भाग में भी भारी वृद्धि देखी गई |
विदेशी व्यापार की दिशा - व्यापार की दिशा का अर्थ है की किन-किन देशो के साथ एक देश वस्तुओं और सेवाओं का आयात निर्यात करता है |
आयात प्रतिस्थापन - आयात प्रतिस्थापन एक रणनीति है जिसके अंतर्गत ऐसी वस्तुएँ जिनका विदेशो से आयात किया जाता है उनका देश के अंदर ही उत्पादन करने को प्रोत्साहन दिया जाता है ताकि विदेशी मुद्रा की ज्यादा से ज्यादा बचत की जा सके |
घरेलू उद्योगों का विदेशी प्रतियोगिता से सुरक्षा में आयात प्रतिस्थापन की भूमिका -
घरेलू उद्योगों को विदेशी प्रतियोगिता से सुरक्षा प्रदान करने के लिए दो तरीके अपनाएँ गए |
(i) प्रशुल्क : प्रशुल्क आयातित वास्तुओं पर लगाया गया कर है | प्रशुल्क लगाने पर आयातित वस्तुएं महँगी हो जाती है जिससे घरेलु बाजार में उनकी माँग गिरने लगती है |
(ii) कोटा : यहाँ कोटे का अर्थ है आयात के लिए किसी वस्तु की मात्रा निश्चित करना ताकि उससे ज्यादा कोई उस वास्तु का आयात ना कर सके |
प्रशुल्क और कोटे का प्रभाव यह होता है की इससे आयात प्रतिबंधित हो जाता है जिसके कारण घरेलु उद्योगों की विदेशी प्रतियोगिता से सुरक्षा होती है |
इस पाठ के अन्य दुसरे विषय भी देखे :
1. पंचवर्षीय योजनाएँ एवं उनका लक्ष्य
2. कृषि की विशेषताएँ, समस्याएँ एंव नीतियाँ
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