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Chapter-Chapter 11. आधुनिकीकरण के रास्ते History class 11 in hindi Medium CBSE Notes

CBSE Class 11 History Notes in Hindi Medium based on latest NCERT syllabus, covering definitions, diagrams, formulas, and exam-oriented explanations.

Chapter-Chapter 11. आधुनिकीकरण के रास्ते History class 11 in hindi Medium CBSE Notes

Chapter 11. आधुनिकीकरण के रास्ते

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मेजी पुनर्स्थापना

मेजी पुनर्स्थापना : 

मेजी पुनर्स्थापना का अर्थ है, प्रबुद्ध सरकार का गठन | सन 1867-68 के दौरान मेजी वंश का उदय हुआ और देश में विद्यमान विभिन्न प्रकार का असंतोष मेजियों की पुनर्स्थापना का कारण बना | 

मेजियों के पुनर्स्थापना के पीछे कारण : 

(i) देश में तरह-तरह का असंतोष था |

(ii) अंतर्राष्ट्रीय व्यापार व कूटनीतिक संबंधों की भी माँग की जा रही थी।

(ii) 

मेजी शासन के अंतर्गत जापान में अर्थव्यवस्था का आधुनिकरण : 

(i) कृषि पर कर 

(ii) जापान में रेल लाइन बिछाना 

(iii) वस्त्र उद्योगों के लिए मशीनों का आयात 

(iv) मजदूरों का विदेशी कारीगरों द्वारा प्रशिक्षण 

(v) विद्यार्थियों को पढ़ने के लिए विदेश भेजना 

(vi) आधुनिक बैंकिंग व्यवस्था का प्रारंम्भ 

(vii) कंपनियों को कर में छुट और सब्सिडी देना 

जापान में मेजियों द्वारा शिक्षा एवं विद्यालयी व्यवस्था में बदलाव : 

(i) लडके और लड़कियों के लिए स्कूल जाना अनिवार्य |

(ii) पढाई की फ़ीस बहुत कम करना |

(iii) आधुनिक विचारों पर जोर देना |

(iv) राज्य के प्रति निष्ठा और जापानी इतिहास के अध्ययन पर बल दिया गया |

(iv) किताबों के चयन और शिक्षकों के प्रशिक्षण पर नियंत्रण |

(v) माता-पिता के प्रति आदर, राष्ट्र के प्रति वफ़ादारी और अच्छे नागरिक बनने की प्रेरणा दी गई | 

एदो शहर का नामकरण : मेजी शासन स्थापित होते ही एदो शहर को राजधानी बनाया गया और इसका नया नामकरण हुआ "तोक्यों"|

मेजी सरकार की नयी निति : 

(i) "समृद्ध देश, मजबूत सेना" का नया नारा दिया गया |

(ii) अर्थव्यवस्था का विकास और मज़बूत सेना का निर्माण करने की ज़रूरत पर बल दिया |

(iii) जनता के बीच राष्ट्र की भावना का निर्माण करने और प्रजा को नागरिक की श्रेणी में बदलने के लिए कार्य किया ।

(iv) नयी सरकार ने ‘सम्राट-व्यवस्था’ के पुनर्निर्माण का काम शुरू किया।

(v) राजतांत्रिक व्यवस्था के नमूनों को समझने के लिए कुछ अधिकारीयों को यूरोप भेजा गया।

(vi) सम्राट के नाम से आधुनिक संस्थाएँ स्थापित करने के अधिनियम जारी किए गए |

(vii) जनता के सार्वजनिक एवं साझे हितों को बढ़ावा देने के लिए प्रेरित किया।

जापानी भाषा में तीन लिपियों का उपयोग : 

जापानी भाषा एक साथ तीन लिपियों का प्रयोग करती है। इनमें से एक कांजी, जापानियों ने चीनियों से छठी शताब्दी में ली। चूँकि उनकी भाषा चीनी भाषा से बहुत अलग है, उन्होंने दो ध्वन्यात्मक वर्णमालाओं का विकास भी किया- हीरागाना और कताकाना। हीरागाना नारी सुलभ समझी जाती है क्योंकि हेआन काल में बहुत सी लेखिकाएँ इसका इस्तेमाल करती थीं | जैसे कि मुरासाकी। यह चीनी चित्रात्मक चिह्नों और ध्वन्यात्मक अक्षरों (हीरागाना अथवा कताकाना) को मिलाकर लिखी जाती है। शब्द का प्रमुख भाग कांजी के चिन्ह से लिखा जाता है और बाकी का हीरागाना में।

राष्ट्र के एकीकरण के लिए जापान सरकार द्वारा किया गया कार्य : 

(i) मेजी सरकार ने पुराने गाँवों और क्षेत्रीय सीमाओं को बदल कर नया प्रशासनिक ढाँचा तैयार किया। (ii) 20 साल से अधिक उम्र के नौजवानों के लिए कुछ अरसे के लिए सेना में काम करना अनिवार्य हो गया।

(iii) एक आधुनिक सैन्य बल तैयार किया गया। कानून व्यवस्था बनाई गई जो राजनीतिक गुटों के गठन को देख सके, बैठके बुलाने पर नियंत्रण रख सके, और सख्त सेंसर व्यवस्था बना सके | (iv) सेना और नौकरशाही को सीधा सम्राट के निर्देश में रखा गया। यानि कि संविधान बनने के बावजूद यह दो गुट सरकारी नियंत्रण के बाहर रहे।

(v) लोकतांत्रिक संविधान और आधुनिक सेना - इन दो अलग आदर्शों को महत्व देने के दूरगामी नतीजे हुए।

पर्यावरण पर उद्योगों के विकास का प्रभाव : 

(i) उद्योग के तेज़ और अनियंत्रित विकास और लकड़ी जैसे प्राकृतिक संसाधनों की माँग से पर्यावरण का विनाश हुआ।

(ii) औद्योगिक प्रदुषण बढ़ने से वायु प्रदुषण और जल प्रदुषण बढ़ा |

(iii) कृषि उत्पादों में कमी का प्रमुख कारण लोगों का शहरों की ओर पलायन | 

औद्योगिक प्रदुषण के खिलाफ आन्दोलन : 

संसद के पहले निम्न सदन के सदस्य तनाको शोजो (Tanaka Shozo) ने 1897 में औद्योगिक प्रदूषण के खिलाफ पहला आंदोलन छेड़ा जब 800 गाँववासी जन विरोध में इक्कठे हुए और उन्होंने सरकार को कार्रवाई करने के लिए मज़बूर किया।

मेजी संविधान समिति की विशेषताएँ : 

(i) मेजी संविधान सीमित मताधिकार पर आधारित था |

(ii) उसने डायट बनाई जिसके अधिकार सीमित थे |

(iii) शाही पुनःस्थापना करनेवाले नेता सत्ता में बने रहे और उन्होंने राजनीतिक पार्टियों का गठन किया।

(iv) 1918 और 1931 के दरमियान जनमत से चुने गए प्रधानमंत्रियों ने मंत्रिपरिषद् बनाए।

(v) उन्होंने आक्रामक राष्ट्रवाद की निति अपनाई |

तनाका शोजो और प्रदूषक के खिलाफ आन्दोलन में भूमिका : 

तनाका शोजो (1841-1913) एक किसान के बेटे थे उन्होंने ने अपनी पढ़ाई खुद की और एक मुख्य राजनैतिक हस्ती के रूप में उभरे। 1880 के दशक में उन्होंने जनवादी हकों के आंदोलन में हिस्सा लिया। इस आंदोलन ने संवैधानिक सरकार की माँग की। वह पहली संसद-डायट-में सदस्य चुने
गए। उनका मानना था कि औद्योगिक प्रगति के लिए आम लोगों की बलि नहीं दी जानी चाहिए।

आधुनिक राष्ट्र बनने के लिए जापान और चीन की अलग-अलग राहें : 

आधुनिक राष्ट्र बनने के लिए जापान और चीन निम्न नीतियाँ थी | 

जापान के आधुनिक समाज में आए बदलाव : 

(i) वाणिज्यिक अर्थव्यवस्था का विकास हुआ और वित्त और ऋण की प्रणालियाँ स्थापित हुईं।

(ii) व्यक्ति के गुण उसके पद से अधिक मूल्यवान समझे जाने लगे।

(iii) शहरों में जीवंत संस्कृति खिलने लगी जहाँ तेजी से बढ़ते व्यापारी वर्ग ने नाटक और कलाओं को प्रोत्साहन दिया।

(iv) लोगों को पढ़ने का शौक था, एदो में लोग नूडल की कटोरी की कीमत पर किताब किराये पर ले सकते थे।

फुकुजावा यूकिची : इनका जन्म एक गरीब सामुराई परिवार में हुआ। इनकी शिक्षा नागासाकी और ओसाका में हुई। इन्होंने डच और पश्चिमी विज्ञान पढ़ा और बाद में अंग्रेजी भी। 1860 में वे अमरीका में पहले जापानी दूतावास में अनुवादक के रूप में गए। इससे इन्हें पश्चिम पर किताब लिखने के लिए
बहुत कुछ मिला। उन्होंने अपने विचार क्लासिकी नहीं बल्कि बोलने चालने के अंदाज  लिखे। यह किताब बहुत ही लोकप्रिय हुई। इन्होंने एक शिक्षा संस्थान स्थापित किया जो आज केओ विश्वविद्यालय के नाम से जाना जाता है। 

फुकुजावा यूकिची (Fukuzawa Yukichi) के विचार : फुकुजावा यूकिची मेजी काल के प्रमुख बुद्धिजीवी थे जो अमरीका और पश्चिमी यूरोपीय देशों से प्रभावित थे | उनका कहना था कि जापान को ‘अपने में से एशिया को निकाल फेंकना’ चाहिए। यानि जापान को अपने एशियाई लक्षण छोड़ देने चाहिए और पश्चिम का हिस्सा बन जाना चाहिए। 

पश्चिम से प्रभावित कुछ जापानी बुद्धिजीवियों के विचार : 

(i) फुकुजावा यूकिची का विचार था कि जापान को अपने एशियाई लक्षण छोड़ देने चाहिए और पश्चिम का हिस्सा बन जाना चाहिए। 

(ii) दर्शनशास्त्री मियाके सेत्सुरे का कहना था कि विश्व सभ्यता के हित में हर राष्ट्र को अपने खास हुनर का विकास करना चाहिए।

(iii) बहुत से बुद्धिजीवी पश्चिमी उदारवाद की तरफ आकर्षित थे और वे चाहते थे कि जापान अपना आधार सेना की बजाय लोकतंत्र पर बनाए।

(iv) संवैधानिक सरकार की माँग करने वाले जनवादी अधिकारों के आंदोलन के नेता उएकी एमोरी
(Ueki Emori, 1857&1892) फ़्रांसिसी क्रांति में मानवों के प्राकृतिक अधिकार और जन प्रभुसत्ता के सिद्धांतों के प्रशंसक थे।

मेजों सरकार द्वारा संविधान की घोषणा : जापान के बहुत से प्रबुद्ध बुद्धिजीवियों ने अपने विचारों से सरकार के ऊपर दबाव डाला | कईयों ने तो आन्दोलन खड़े कर दिए जिसमें से प्रमुख थे उएकी एमोरी जिन्होंने संवैधानिक सरकार की माँग की थी | वे उदारवादी शिक्षा के पक्ष में थे जो प्रत्येक व्यक्ति को विकसित कर सके: ‘व्यवस्था से ज़्यादा कीमती चीज है, आज़ादी’। कुछ दुसरे लोगों ने तो महिलाओं के मताधिकार की भी सिफारिश की। इस दबाव ने सरकार को संविधान की घोषणा करने पर बाध्य किया।

रोजमर्रा के जिंदगी में आए बदलाव : 

(i) पैतृक परिवार व्यवस्था में कई पीढि़याँ परिवार के मुखिया के नियंत्रण में रहती थीं।

(ii) पति-पत्नी साथ रह कर कमाते और घर बसाते थे।

(iii) पारिवारिक जीवन की इस नयी समझ ने नए तरह के घरेलू उत्पादों, नए किस्म के पारिवारिक मनोरंजन और नए प्रकार के घर की माँग पैदा की।

(iv) 1920 के दशक में निर्माण कम्पनियों ने शुरू में 200 येन देने के बाद लगातार 10 साल के लिए 12 येन माहवार की किश्तों पर लोगों को सस्ते मकान मुहैया कराये- यह एक ऐसे समय में जब एक बैंक कर्मचारी (उच्च शिक्षाप्राप्त व्यक्ति) की तनख्वाह 40 येन प्रतिमाह थी।

जापान में सता केन्द्रित राष्ट्रवाद को बढ़ावा : सत्ता केन्द्रित राष्ट्रवाद 1930 - 1940 के दौरान बढ़ावा मिला जब जापान ने चीन और एशिया में अपने उपनिवेश बढ़ाने के लिए लड़ाइयाँ छेड़ीं। ये लड़ाइयाँ दूसरे विश्व युद्ध में जाकर मिल गईं जब जापान ने अमरीका के पर्ल हार्बर पर हमला किया।

निशितानी केजी द्वारा आधुनिक शब्द की परिभाषा : 

दर्शनशास्त्री निशितानी केजी ने ‘आधुनिक’ को तीन पश्चिमी धाराओं के मिलन और एकता से परिभाषित कियाः (i) पुनर्जागरण, (ii) प्रोटैस्टेंट सुधार, और (iii) प्राकृतिक विज्ञानों का विकास । उन्होंने कहा कि जापान की ‘नैतिक ऊर्जा’ (यह शब्द जर्मन दर्शनशास्त्री राके से लिया गया है) ने उसे एक उपनिवेश बनने से बचा लिया और जापान का फ़र्ज़ बनता है एक नयी विश्व पद्धति, एक विशाल पूर्वी एशिया के निर्माण का। इसके लिए एक नयी सोच की ज़रूरत है जो विज्ञान और धर्म को जोड़ सके।

आधुनिकता पर विजय संगोष्ठी : 1943 में "आधुनिकता पर विजय" विषय पर एक संगोष्ठी हुई | इसमें जापान के सामने जो दुविधा थी उस पर चर्चा हुई, यानि आधुनिक रहते हुए पश्चिम पर कैसे विजय पाई जाए।

द्वितीय विश्वयुद्ध में हार के बाद जापान में हुए परिवर्तन : 

(i) जापान का विसैन्यीकरण कर दिया गया और एक नया संविधान लागू हुआ।

(ii) कृषि सुधार, व्यापारिक संगठनों का पुनर्गठन और जापानी अर्थव्यवस्था में जायबात्सु यानि बड़ी एकाधिकार कंपनियों की पकड़ को खत्म करने की भी कोशिश की गई।

(iii) राजनीतिक पार्टियों को पुनर्जीवित किया गया और जंग के बाद पहले चुनाव 1946 में हुए। इसमें पहली बार महिलाओं ने भी मतदान किया।

(iv) अपनी भयंकर हार के बावजूद जापानी अर्थव्यवस्था का जिस तेजी से पुनर्निर्माण हुआ, उसे
एक युद्धोत्तर ‘चमत्कार’ कहा गया है।

भयंकर हार के बावजूद जापान ने तेजी से आर्थिक प्रगति की (कारण): 

अपनी भयंकर हार के बावजूद जापानी अर्थव्यवस्था का जिस तेजी से पुनर्निर्माण हुआ, उसे एक युद्धोत्तर ‘चमत्कार’ कहा गया है। लेकिन यह चमत्कार से कहीं अधिक था और इसकी जड़ें जापान के लंबे इतिहास में निहित थीं। संविधान को औपचारिक स्तर पर गणतांत्रिक रूप इसी समय दिया गया। लेकिन जापान में जनवादी आंदोलन और राजनीतिक भागेदारी का आधार बढ़ाने में बौद्धिक सक्रियता की ऐतिहासिक परंपरा रही है। युद्ध से पहले के काल की सामाजिक संबद्धता को गणतांत्रिक रूपरेखा के बीच सुदृढ़ किया गया। इसके चलते सरकार, नौकरशाही और उद्योग के बीच एक करीबी रिश्ता कायम हुआ। अमरीकी समर्थन और साथ ही कोरिया और वियतनाम में जंग से जापानी अर्थव्यवस्था को मदद मिली।

1960 के दशक में जापान द्वारा प्रौद्योगिक और अर्थव्यस्था की दो उपलब्धियाँ : 

(i) 1964 में तोक्यों में हुए ओलम्पिक खेलों का आयोजन 

(ii) 200 मील प्रति घंटे चलने वाली बुलेट ट्रेन जो की एक बेहतर और सस्ता उत्पाद था | 

 

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