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भूकम्प और तबाही

 

Updated On: 25th October 2016 11:19:22 AM

 

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 पृथ्वी के भूपटल में तनाव और विक्षोभ (disturbance) उत्पन्न होने के कारण सतह पर अचानक हलचल होने लगाती है, पृथ्वी की सतह का हिलना या कांपना, भूकंप कहलाता है।

भूकंप प्राकृतिक आपदाओं में से सबसे विनाशकारी विपदा है जिसमें लोगों का सोंचने या समझने का समय तक नहीं मिल पाता, इससे मानवीय जीवन की बड़ी संख्या में जान-माल की हानि हो सकती है। आमतौर पर भूकंप का प्रभाव अत्यंत विस्तृत क्षेत्र में होता है। भूकंप, व्यक्तियों को घायल करने और उनकी मौत का कारण बनने के साथ ही व्यापक स्तर पर तबाही का कारण बनता है। इस तबाही के अचानक और तीव्र गति से होने के कारण जनमानस को इससे बचाव का समय नहीं मिल पाता है।

इसकी कोई भविष्यवाणी नहीं कि जा सकती, यही कारण है कि बीसवीं सदी के अंतिम दो दशकों के दौरान पृथ्वी के विभिन्न स्थानों पर 26 बड़े भूकंप आए, जिससे वैश्विक स्तर पर करीब डेढ़ लाख लोगों की असमय मौत हुई। यह दुर्भाग्य ही है कि भूकंप का परिणाम अत्यंत व्यापक होने के बावजूद अभी तक इसके बारे में सही-सही भविष्यवाणी करने में सफलता नहीं मिली है। इसी कारण से इस आपदा की संभावित प्रतिक्रिया के अनुसार ही कुछ कदम उठाए जाते सकते हैं। ऐसी आपदाओं के लिए केवल एहतियाती कदम अथवा बचाव ही उपाय है |  

सिस्मोलॉजी : विज्ञान की वह शाखा जिसके अंतर्गत भूकंप का अध्ययन किया जाता है, भूकंप विज्ञान (सिस्मोलॉजी) कहलाती है और भूकंप विज्ञान का अध्ययन करने वाले वैज्ञानिकों को भूकंपविज्ञानी कहते हैं। अंग्रेजी शब्द ‘सिस्मोलॉजी’ में ‘सिस्मो’ उपसर्ग ग्रीक शब्द है जिसका अर्थ भूकंप है। भूकंपविज्ञानी भूकंप के परिमाण को आधार मानकर उसकी व्यापकता को मापते हैं। भूकंप के परिमाण को मापने की अनेक विधियां हैं।

हमारी धरती मुख्य तौर पर चार परतों से बनी हुई है, 

(i) इनर कोर

(ii) आउटर कोर

(iii) मैनटल

(iv) क्रस्ट

                                       earthequiak

पृथ्वी के ऊपरी मैन्टल को लिथोस्फेयर कहते हैं। ये 50 किलोमीटर की मोटी परत, वर्गों में बंटी हुई है, जिन्हें टैकटोनिक प्लेट्स कहा जाता है। ये टैकटोनिक प्लेट्स अपनी जगह से हिलती रहती हैं लेकिन जब ये बहुत ज्यादा हिल जाती हैं, तो भूकंप आ जाता है। ये प्लेट्स क्षैतिज और ऊर्ध्वाधर, दोनों ही तरह से अपनी जगह से हिल सकती हैं। इसके बाद वे अपनी जगह तलाशती हैं और ऐसे में एक प्लेट दूसरी के नीचे आ जाती है।

Layers of the Earth

भूकंप को इस प्रकार परिभाषित किया जा सकता है कि “पृथ्वी के भूपटल में उत्पन्न तनाव के आकस्मिक मुक्त होने से धरती की सतह के हिलने की घटना भूकंप कहलाती है”। इस तनाव के कारण हल्का सा कंपन उत्पन्न होने पर पृथ्वी में व्यापक स्तर पर उथल-पुथल विस्तृत क्षेत्र में तबाही का कारण बन सकती है। भूकंप की तीव्रता को रिएक्टर पैमाने पर मापा जाता है |

 

भूकंप के केंद्र जहाँ सबसे अधिक तबाही होती है उसी के आस-पास होता है | अर्थात जिस बिंदु पर भूकंप उत्पन्न होता है उसे भूकंपी का केंद्र बिंदु और उसके ठीक ऊपर पृथ्वी की सतह पर स्थित बिंदु को अधिकेंद्र अथवा अंतःकेंद्र के नाम से जाना जाता है। अधिकेंद्र की स्थिति को उस स्थान के अक्षांशों और देशांतरों के द्वारा व्यक्त किया जाता है।

भूकंप के समय कुछ देर के लिए एक हल्का सा झटका महसूस होता है। फिर कुछ अंतराल के बाद एक लहरदार या झटकेदार कंपन महसूस होता है, जो पहले झटके से अधिक प्रबल होता है। छोटे भूकंपों के दौरान भूमि कुछ सेकंड तक कांपती है, लेकिन बड़े भूकंपों में यह अवधि एक मिनट से भी अधिक हो सकती है। जिन भूकम्पों की अवधि 1 मिनट से अधिक होती है और तीव्रता भी अधिक हो उसमें जान-माल की हानि सबसे अधिक होती है | सबसे अधिक हानि भूकंप के केंद्र के आस-पास के स्थानों में होता है |

भूकंप के कारण धरती के कांपने की अवधि विभिन्न कारणों जैसे अधिकेंद्र से दूरी, मिट्टी की स्थिति, इमारतों की ऊंचाई और उनके निर्माण में प्रयुक्त सामग्री पर निर्भर करती है। अब तक संसार में कई हजार जानें इस प्राकृतिक आपदा से जा चुकीं है | 

 

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Total Comments: 2
ATP Admin
All Class

ATP Admin says:

"  बिलकुल सही जानकारी दिया है आपने दिलीप जी | धन्यबाद  "

 

   Commented On : 17th September 2015 02:26:09 PM

dilip
Class IX

dilip says:

"  भूकंप तो एक प्राकृतिक आपदा है | 7 रिएक्टर स्केल से ऊपर खतरनाक होता है |  "

 

   Commented On : 12th October 2014 11:07:08 PM

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