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ATP Education's Blog:

मजदूरी के दलदल में देश का भविष्य

 

Updated On: 25th October 2016 11:19:47 AM

 

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देश का भविष्य कहे जाने वाले बच्चें आज की इस आधुनिक युग में भी मजदूरी के दलदल में फंसते जा रहे हैं | बचपन एक मनुष्य के जीवन का वो पल होता है जिसे याद कर वह सारी जिंदगी गुजर देता है, यही है वो हसीन पल जब कोई व्यक्ति दुनिया के सभी दुःख, चिंताओं और जिम्मेवारियों से बेपरवाह होकर खेलते-कूदते, पढ़ते लिखते गुजार देखा है | जब वह प्रौढ़ा अवस्था में जाता है और जिंदगी की अन्य सच्चाइयों से जब वह रूबरू होता है | कष्ट, परेशानियाँ आ घेरती है तो कहता है, इससे तो अच्छा मेरे वो बचपन के दिन थे जब कोई चिंता फिक्र नहीं होती थी, सिर्फ पढना और दोस्तों के साथ खेलना यही तो था | क्या मजा था मेरे बचपन में, परन्तु सभी का बचपन ऐसा नहीं होता |

आज देश के आधे से अधिक 14 वर्ष से कम आयु के बच्चे ऐसे है जो सप्ताह के सातों दिन काम करते है | यह स्थित विश्व की तुलना में भारत में भयावह है | हमारे देश के लिए यह बालश्रम एक अभिशाप बन चूका  है | सरकार की लाख कोशिशो के बावजूद भी हम बाल-मजदूरी पर लगाम लगाने में कामयाब नहीं हुए है | यह कुप्रथा देश के शहरी और देहात दोनों में समान रूप से वितरित है | जिन बच्चों के हाथ में कॉपी-किताब, पेन-पेन्सिल खेलने के समान होना चाहिए आज उन हाथों में बर्तन, झाड़ू-पोछे और बोझ थामा दिया गया है | जिन बच्चों की उम्र 14 वर्ष से कम हो और वे जीविका के लिए काम करे तो इसे बाल-मजदूरी या बालश्रम कहते है | 

गरीबी, लाचारी, भूख और माता-पिता के प्रताड़ना के कारण आज ये बच्चे बाल-मजदूरी के दल-दल में फँसते चले जा रहे है | भारत में बाल-मजदूरी का सबसे बड़ा कारण गरीबी  है | कई बार गरीबी के कारण कई माँ-बाप बाल-मजदूरी करवाने वाले लोगों के चंगुल में फंस जाते है | कई बार के अपने नैनिहालों के जीवन से भी हाथ धो बैठते है | आज हमारा समाज असमानता से गुजर रहा है | एक तरफ वे बच्चे जिनके पीछे उनके माँ-बाप हजारों हजार उनके भविष्य और खाने पीने पर खर्च कर रहे है, दुसरे वे बच्चे जो भूख, कुपोषण और तिरस्कार की जिंदगी जी रहे है | कई बच्चे गरीब, अनाथ है अथवा किसी दुष्ट व्यक्ति के शोषण का शिकार है | इन्हे पेट भर भोजन नसीब नहीं होता है, और काम इनसे एक व्यस्क व्यक्ति की तरह ली जाती है | 

आज हमारे समाज में इस विषय में काफी सुधार की आवश्यकता है | सरकार ने बालश्रम के लिए कानून बना दिया, इसे गैर-क़ानूनी घोषित कर दिया लेकिन उस मानसिकता में कोई दृश्य परिवर्तन नहीं हुआ है जिसकी आज अपेक्षा की जानी चाहिए | सरकार की इस कोशिश से उन लोगों को धर-पकड़ने में मदद जरुर मिली है जो गैर-क़ानूनी ढंग से 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों से काम करवाते है या उन्हें कैद करके रखते है | बालश्रम रोकने की इस लड़ाई में सबसे पहले हमें अपने समाज को शिक्षित करना होगा और गरीबी के लिए समुचित व्यवस्था करनी होगी | 

 

विषय: 

बाल-मजदूरी, बालश्रम, बाल-मजदूरी एक अभिशाप, बाल-मजदूरी की समस्या | 

 

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Total Comments: 1
ATP Admin
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ATP Admin says:

" Hi this is good "

 

   Commented On : 29th December 2016 01:00:57 AM

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